सतलोक आश्रम प्रकरण में कोर्ट से जमानत मिलने के बाद रामपाल शुक्रवार (10 अप्रैल) को जेल से बाहर आया. 11 साल से अधिक समय तक जेल में रहने के बाद उसे जमानत मिली. रामपाल के परिवार के सदस्य और वकील जेल परिसर में मौजूद थे. पुलिस ने कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए जेल के बाहर व्यापक सुरक्षा इंतजाम किए थे. रामपाल के कई अनुयायी भी वहां इकट्ठा हो गए थे. उच्च न्यायालय ने 8 अप्रैल को रामपाल को जमानत दे दी थी. रामपाल ने हिसार की एक अदालत द्वारा 25 सितंबर 2025 को पारित विवादित आदेश के खिलाफ अपील दायर की थी, जिसमें उसकी नियमित जमानत याचिका खारिज कर दी गई थी.
साल 2014 में हिंसा से जुड़ा है मामला
प्राथमिकी में आरोप लगाया गया था कि 2014 में रामपाल ने 900 से अधिक समर्थकों के साथ मिलकर हिसार जिले के बरवाला स्थित सतलोक आश्रम में अपनी गिरफ्तारी का विरोध किया था. अभियोजन पक्ष के अनुसार, बड़ी संख्या में रामपाल के समर्थक इकट्ठा हुए थे, जिनमें से कुछ हथियारबंद थे. रामपाल ने कथित तौर पर महिलाओं और बच्चों को ढाल के रूप में इस्तेमाल किया था, जिसके परिणामस्वरूप हिंसा भड़क उठी थी.
-
राज्यों के CM के बीच हो CEO जैसी रेस... निखिल कामत ने देश की तरक्की के लिए बताया नया फॉर्मूला -
NDTV वर्ल्ड समिट 2026: अप्रेजल और शादी के जिक्र पर क्या बोले निखिल कामत? -
AI नहीं खा सकता आपकी नौकरी, बस करना होगा ये काम, टेक दिग्गज Andrew Ng ने किया दावा -
NDTV World Summit 2026: भारत की Growth Story पर निखिल कामत का नजरिया, AI को लेकर क्या दी चेतावनी? -
NDTV World Summit 2026:निखिल कामत ने देश की तरक्की के लिए बताया फॉर्मूला, राज्यों के CM के बीच हो CEO जैसी रेस -
"AI को वैसा पुराना कंप्यूटर मत समझो..." स्वामी सर्वप्रियानंद ने चेतावनी -
NDTV World Summit 2026: बॉलीवुड से ग्लोबल स्टेज तक, Mohini Dey के 20 साल के सफर की अनसुनी बातें -
कार की सर्विस समय पर कराते हैं, शरीर की क्यों नहीं? लीलावती अस्पताल के ट्रस्टी की काम की सलाह -
क्या AI इस जमाने का असुर है? न्यू यॉर्क वेदांत सोसाइटी के रेजिडेंट मिनिस्टर स्वामी सर्वप्रियानंद ने दिया जवाब -
'खुशनसीब हूं कि भारत में पैदा हुई, जहां मस्जिद और मंदिर एक साथ मौजूद हैं', NDTV वर्ल्ड समिट 2026 में मोहिनी डे
जेल के बाहर समर्थकों का स्वागत
रामपाल के समर्थकों ने जेल के बाहर उनका स्वागत किया. सुरक्षा के कड़े इंतजामों के बीच रामपाल जेल से बाहर आए. फिलहाल मामले की आगे की सुनवाई उच्च न्यायालय में जारी रहेगी. बता दें कि रामपाल 15वीं शताब्दी के संत कबीर की शिक्षाओं का पालन और प्रचार करने का दावा करता है. उसके अनुयायी उसे एक संत मानते हैं और भक्ति और मोक्ष के उसके दृष्टिकोण में विश्वास करते हैं.
यह भी पढ़ेंः पत्नी को पसंद नहीं था पति का काला रंग, प्रेमी के साथ मिलकर कर दी हत्या
NDTV.in पर ताज़ातरीन ख़बरों को ट्रैक करें, व देश के कोने-कोने से और दुनियाभर से न्यूज़ अपडेट पाएं