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कैसे गिने जाते थे राम मंदिर में चढ़ावे के पैसे, जानिए पूरी कहानी, कौन हैं राम शंकर और गोपाल राय

Ram Mandir Donation Scame: राम मंदिर के दान में हुए कथित गबन के बाद मामले में लगातार खुलासे हो रहे हैं. गोपाल राय और राम शंकर उर्फ टिन्नू यादव का नाम तेजी से सामने आया है. दोनों मंदिर के दान से सीधे जुड़े थे.

कैसे गिने जाते थे राम मंदिर में चढ़ावे के पैसे, जानिए पूरी कहानी, कौन हैं राम शंकर और गोपाल राय
राम मंदिर (फाइल फोटो)
अयोध्या:

राम मंदिर में चढ़ावा चोरी का मामला पूरे देश में चर्चा में है. SIT ने मामले में जांच तेज कर दी है. मंदिर ट्रस्ट के ऑडिट डिपार्मेंट से लेकर SBI की शाखा तक सभी से पूछताछ की जा रही है. रामशंकर यादव उर्फ टिन्नू और गोपाल राय ये दो नाम सबसे ज्यादा चर्चा में है. क्योंकि दोनों मुख्य रूप से राम मंदिर में आने वाले चढ़ावे से जुड़े थे. अब ये सभी सवालों के घेरे में हैं. जिनको लेकर कुछ अहम खुलासे भी हो रहे हैं. इसके अलावा SIT ने 11 लोगों से पूछताछ भी की थी. जिनमें से कई लोगों के पास बड़ी संपत्ति मिली है. इसके अलावा राम मंदिर में चढ़ावा अलग-अलग हिस्सों से आता है. ऐसे में उसकी भी जांच हो रही है. माना जा रहा है कि SIT की आगे की जांच में और तथ्य सामने आ सकते हैं. 

चर्चा में राम शंकर और गोपाल राय 

राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले में फिलहाल राम शंकर यादव उर्फ टिन्नू और गोपाल राय का नाम सबसे ज्यादा चर्चा में है. राम शंकर यादव पेशे से ड्राइवर थे. 1980 और 1990 के दशक में वो ऑटो चलाते थे. साल 1995-96 में वो अयोध्या के कारसेवकपुरम आया और यहां की गाड़ियां चलाने लगा. इसके बाद विश्व हिंदू परिषद के पदाधिकारियों की गाड़ियां चलाने का काम उसे दिया जाने लगा. विश्व हिंदू परिषद के दाऊद भाग का काम भी उसे दे दिया जाता था. जबकि कार्यशाला की मालवाहक गाड़ियां भी चलाईं थी. राम मंदिर के शिलान्यास के बाद कार्यशाला और राम मंदिर के रिपेयरिंग का काम और प्राण प्रतिष्ठा के बाद चंदा गिनने के काम में उनको लगा दिया गया था. बताया जा रहा है कि राम शंकर यादव संपत्ति में तेजी से इजाफा हुआ है.

वहीं बात अगर गोपाल राय की जाए तो वह चंदे के पैसों की गिनती के प्रभारी थे. गोपाल राय विश्व हिंदू परिषद के पदाधिकारी हैं. वो विहिप के केंद्रीय मंत्री के पद पर हैं. ये राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के भी पदाधिकारी रह चुके हैं. विश्व हिंदू परिषद की तरफ से ट्रस्ट और बैंक के बीच निगरानी का काम इन्हीं के अधीन किया जाता था. इनके तहत कई लोग थे, जिनको चंदा गिनने के काम में लगाया जाता था. चंदे की गिनती में सबसे अहम रोल इन्ही का होता था. 

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राम मंदिर में अलग-अलग जगहों से आता है दान 

राम मंदिर में अलग-अलग जगहों से दान आता है. प्रवेश मार्ग से लेकर मंदिर में भगवान के सामने और निकास द्वार पर लगभग 4 दर्जन से अधिके दान पत्र रखे गए हैं. जहां पर लोग अपनी सुविधा अनुसार दान करते हैं. कुछ लोग जो दान पत्र में दान नहीं करते हैं  वो छोटे और बड़े धन को ट्रस्ट के कार्यालय में जाकर दान करके दान प्राप्त की रसीद लेते हैं. वहीं कुछ लोग दान पात्र में गुप्त दान करते हैं. जो पैसा गुप्त दान के जरिए प्राप्त होता है, जो की नगद धनराशि सोने चांदी के रूप में होती है. वह पैसा सभी बॉक्स से निकाल के एक जगह पर जोड़ा जाता है और बड़े हाल में बैठकर के उसकी गिनती होती है. 

5 हजार करोड़ रुपए की राशि गिनी गई 

यह पैसा भीड़ के ऊपर डिपेंड करता है की कितनी चढ़ावा धनराशि आ रही है कभी-कभी यह धनराशि कई लाख तक पहुंच जाती है. जबकि कभी यह धन राशि दो-तीन लाख तक ही रह जाती है . पैसा स्टेट बैंक की तरफ से नामित एजेंसी और ट्रस्ट के कुछ भरोसेमंद कर्मचारियों के देखरेख में गिना जाता है. जिसका सारा लेखा-जोखा लेकर के प्रतिदिन स्टेट बैंक में यह पैसा जमा हो जाता है. इसके लिए लगभग दो दर्जन लोग इस सिस्टम में लगे हुए हैं और इसकी समय-समय पर ट्रस्ट ऑडिट भी करता रहता है . राम मंदिर में अब तक लगभग 5 हजार करोड़ से ज्यादा की धनराशि चंदे के रूप में ट्रस्ट को मिली है. इसके पहले प्रेस कॉन्फ्रेंस में ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय ने बताया था कि लगभग 1900 करोड रुपए मंदिर बनाने में खर्च हो चुका है शेष धनराशि जो कुछ बची है वह बैंक में जमा है. 

मीडिया से बात करने से बच रहे संबंधित लोग 

इस मुद्दे पर चाहे बैंक का व्यक्ति हो चाहे ट्रस्ट का व्यक्ति हो चाहे पुलिस से जुड़ा कोई व्यक्ति हो कोई कुछ भी बोलने को ऑन रिकॉर्ड ऑफ रिकॉर्ड तैयार नहीं है. मीडिया कर्मियों को देखते ही लोग अपना मुंह बंद कर लेते हैं और मीडिया वालों को इस पर बात न करने के लिए कहते हैं. हालांकि चंपत राय ने बीती रात एक विज्ञप्ति जारी करके खंडन किया है. उनका कहना है कि इस तरह की कोई बात अभी नहीं है और इस पर ऑडिट हो रहा है जांच पड़ताल और ऑडिट के बाद यह सारा मामला सामने आएगा. 

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सवालों के घेरे में मिश्रा परिवार 

अयोध्या के कथित चंदा चढ़ावा घोटाले के मामले में SIT ने जिन लोगों से पूछताछ की है. उनमें रवि मिश्रा, अनुकल्प मिश्रा और लवकुश मिश्रा एक ही परिवार के हैं. रवि मिश्रा के बेटे अनुकल्प मिश्रा है और लवकुश मिश्रा रवि मिश्रा का दामाद है. रवि मिश्रा और अनुकल्प का गांव मिल्कीपुर के ईटगांव में है. एनडीटीवी ने पहले ईंटगांव जाकर रवि मिश्रा के घर पर उनके पिता से बात की तो उन्होंने कहा कि उनके बेटे और पोते उनसे मतलब नहीं रखते हैं और ना ही उन्हें इस मामले में कुछ कहना है. गांव के लोग भी कैमरे पर कुछ बात करने से मना कर रहे हैं. अयोध्या के रुदौली के पास फगौली ठकुरान का रहने वाला लवकुश मिश्रा रवि मिश्रा का दामाद है. लवकुश के घर उनकी बहन मिलीं तो दरवाजे के अंदर से बात करते हुए दावा करती हैं कि उनके भाई ने कुछ गलत नहीं किया है. उन्होंने बताया कि लवकुश अयोध्या में रहता है और मंदिर में कैसे जुड़ा है, परिवार को इसकी जानकारी नहीं है. 

सुप्रीम कोर्ट कराए मामले की जांच: सपा सांसद अवधेश प्रसाद

राम मंदिर के कथित चंदा गबन मामले में अयोध्या की फैजाबाद लोकसभा सीट से सपा सांसद अवधेश प्रसाद ने NDTV से कहा कि राज्य सरकार की गठित कमिटी इस जांच के लिए पर्याप्त नहीं है. इसके लिए सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में कोर्ट की तरफ से गठित जांच समिति को पड़ताल करनी चाहिए. उन्होंने कहा कि राम मंदिर में देश दुनिया के लोग आस्था लेकर आते हैं. ऐसे में राज्य सरकार के अधीन काम करने वाले आईएएस और आईपीएस अधिकारी ठीक से जांच नहीं कर पाएंगे. उन्होंने कहा कि राम मंदिर सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर बना है तो जांच भी सुप्रीम कोर्ट को कराना चाहिए. अवधेश प्रसाद ने आशंका जताई कि नक़दी के अलावा हीरे जवाहरात और सोने चांदी का चढ़ावा आता है, ऐसे में दान की गई हर चीज को जांच के दायरे में लाना चाहिए.

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लेखक के बारे में
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रनवीर सिंह
रिपोर्टर
रणवीर लगभग 18 वर्षों के अनुभव वाले पत्रकार हैं। यूपी के गोरखपुर के रहने वाले रणवीर वर्तमान में एनडीटीवी के ब्यूरो चीफ पद पर लखनऊ में कार्यरत हैं। इन 1... और पढ़ें
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