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This Article is From Mar 21, 2026

खुद था 12वीं पास और करता था कैंसर का इलाज, सूरत के इस फर्जी योग गुरु के कारनामे सुन सिर पकड़ लेंगे

पुलिस जांच में सामने आया है कि प्रदीप जोटंगिया कोई प्रशिक्षित योगगुरु या डॉक्टर नहीं, बल्कि केवल 12वीं पास एक साधारण व्यक्ति है. जानकारी के मुताबिक, वह पहले राजकोट में हेयर सैलून चलाता था. बाद में सूरत आकर उसने अपनी पहचान बदल ली.

खुद था 12वीं पास और करता था कैंसर का इलाज, सूरत के इस फर्जी योग गुरु के कारनामे सुन सिर पकड़ लेंगे
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  • सूरत पुलिस ने प्रदीप जोटंगिया को नकली नोटों के करीब दो करोड़ रुपये के काले कारोबार में गिरफ्तार किया है
  • प्रदीप जोटंगिया कोई प्रशिक्षित योगगुरु या डॉक्टर नहीं, बल्कि केवल 12वीं कक्षा पास एक व्यक्ति है
  • उसने कैंसर और हृदय रोग जैसी गंभीर बीमारियों का झूठा इलाज और गारंटी देने का दावा किया था
सूरत:

सूरत में नकली नोटों के काले कारोबार के खुलासे के बाद फर्जी योगगुरु के बारे में कुछ और खुलासे हुए हैं. पुलिस ने प्रदीप जोटंगिया नाम के व्यक्ति को करीब 2 करोड़ रुपये की नकली नोटों को चलाने के मामले में गिरफ्तार किया है. इन नोटों से वह कैंसर जैसे जानलेवा इलाज का झूठा दावा करता था. शुरुआत में यह मामला सिर्फ नकली करेंसी तक सीमित लग रहा था, लेकिन जांच आगे बढ़ने के साथ ही इसके पीछे का पूरा खेल उजागर हो गया.

योगगुरु या डॉक्टर नहीं सिर्फ12वीं पास है 

पुलिस जांच में सामने आया है कि प्रदीप जोटंगिया कोई प्रशिक्षित योगगुरु या डॉक्टर नहीं, बल्कि केवल 12वीं पास एक साधारण व्यक्ति है. जानकारी के मुताबिक, वह पहले राजकोट में हेयर सैलून चलाता था. बाद में सूरत आकर उसने अपनी पहचान बदल ली और खुद को एक चमत्कारी योगगुरु के रूप में पेश करना शुरू कर दिया.

कैंसर जैसी बीमारियों को ठीक करने की गारंटी देता था

इस फर्जी बाबा ने “श्री सत्यम योग फाउंडेशन” के नाम से लोगों के बीच अपनी छवि बनाई और धीरे-धीरे लोगों की आस्था और विश्वास को अपने फायदे के लिए इस्तेमाल करने लगा. बिना किसी मेडिकल डिग्री या वैध प्रशिक्षण के वह गंभीर बीमारियों के इलाज का दावा करता था, जिससे कई लोग उसके झांसे में आ गए.

हैरानी की बात यह है कि यह व्यक्ति कैंसर और हृदय के ब्लॉकेज जैसी गंभीर बीमारियों को ठीक करने की गारंटी देता था. सोशल मीडिया पर अपलोड किए गए उसके वीडियो में वह बड़े-बड़े दावे करता नजर आया, जिससे आम लोग आसानी से प्रभावित हो जाते थे और उसके पास इलाज के लिए पहुंचते थे.

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किसी भी मान्यता प्राप्त डॉक्टर या विशेषज्ञ का नाम नहीं

जांच में यह भी सामने आया है कि प्रदीप मरीजों का इलाज अपने घर या ऑफिस में बैठकर करता था. वह सोफे पर बैठकर मरीजों की फाइल देखता और उपचार बताता था. इन फाइलों में किसी भी मान्यता प्राप्त डॉक्टर या विशेषज्ञ का नाम नहीं होता था, बल्कि केवल उसका खुद का फोटो लगा होता था, जो पूरे मामले को और संदिग्ध बनाता है. पुलिस को आशंका है कि उसने प्राकृतिक उपचार और आध्यात्मिक शक्तियों के नाम पर लोगों से लाखों रुपये वसूले हैं. फिलहाल पुलिस इस पूरे नेटवर्क की गहराई से जांच कर रही है और यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि इस फर्जीवाड़े में और कौन-कौन लोग शामिल हैं.

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