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सूरत में मां ने मोबाइल चलाने से रोका तो 13 साल के बच्चे ने लगाई फांसी, गेम की लत ने ली जान

दीपेश सोनिकर ने सभी अभिभावकों से अपील की कि बच्चों को जरूरत से ज्यादा मोबाइल फोन न दें.माता-पिता को खुद भी मोबाइल का सीमित इस्तेमाल करना चाहिए और बच्चों के साथ ज्यादा समय बिताना चाहिए.

सूरत में मां ने मोबाइल चलाने से रोका तो 13 साल के बच्चे ने लगाई फांसी, गेम की लत ने ली जान
मोबाइल न चलाने की बात कहने पर बच्चे ने फांसी लगातर दी जान. (NDTV इमेज)
  • सातवीं क्लास में पढ़ने वाले 13 साल के बच्चे ने मोबाइल चलाने से रोकने पर आत्महत्या कर ली
  • मां ने उसे मोबाइल बंद कर पहले होमवर्क करने के लि कहा था
  • बच्चे को गेम खेलने की लत थी. मोबाइल चलाने से मना करने पर वह बहुत ज्यादा गुस्सा हो गया
सूरत:

गुजरात के सूरत शहर से एक बेहद दर्दनाक और झकझोर देने वाली घटना सामने आई है. मोबाइल की लत बच्चों की जिंदगी पर किस कदर असर डाल रही है, इसका एक दुखद उदाहरण वड रोड इलाके में देखने को मिला. यहां सातवीं क्लास में पढ़ने वाले 13 साल के बच्चे ने सिर्फ इसलिए फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली, क्योंकि उसके माता-पिता ने उससे मोबाइल छोड़कर होमवर्क करने के लिए कहा था. इस दर्दनाक घटना से पूरा परिवार गहरे सदमे में है. यह घटना दूसरे माता-पिता के लिए भी एक वॉर्निंग है कि अपने बच्चे को ोबाइल की लत न लगने दें. 

मोबाइल चलाने से मान करने पर बच्चे से लगाई फांसी

यह घटना सोमवार शाम करीब साढ़े छह बजे वड रोड स्थित लक्ष्मीनगर सोसाइटी में हुई. मूल रूप से ओडिशा का रहने वाला एक परिवार पिछले कुछ समय से सूरत में रह रहा है. परिवार में माता-पिता, एक बेटी और 13 साल का एक बेटा था. पिता लूम्स फैक्ट्री में मजदूरी करते हैं. मृतक छात्र सूरत महानगरपालिका की नगर प्राथमिक शिक्षा समिति के स्कूल में 7वीं क्लास में पढ़ता था. 

बच्चे के माता-पिता का रो-रोकर बुरा हाल

बच्चे के माता-पिता का रो-रोकर बुरा हाल

बच्चे को थी गेम खेलने की लत

सूरज को भी दूसरे बच्चों की तरह मोबाइल पर गेम खेलने की लत लग चुकी थी. वह लंबे समय तक मोबाइल में ही बिजी रहता था. घटना वाले दिन भी माता-पिता ने उसे डांटा नहीं, बल्कि प्यार से मोबाइल बंद कर स्कूल का होमवर्क पूरा करने के लिए कहा था. लेकिन उसको ये बात इतनी ज्यादा बुरी लगी कि वह गुस्से में अपने कमरे में चला गया और दुपट्टे से पंखे पर फंदा लगाकर आत्महत्या कर ली. जब तक उसे पंखे से नीचे उतारा गया तब तक काफी देर हो चुकी थी. 

बच्चा स्वभाव से जिद्दी था

मृतक के एक जानकार दीपेश सोनिकर ने बताया कि बच्चा स्वभाव से काफी गुस्सैल था.परिवार का कहना है कि जब भी उसे किसी बात के लिए समझाया जाता या टोका जाता, वह नाराज हो जाता था. पिछले कुछ समय से मोबाइल गेमिंग की लत की वजह से उसका व्यवहार पहले से ज्यादा जिद्दी और आक्रामक हो गया था. हालांकि, पुलिस पूरे मामले की जांच कर रही है और आत्महत्या के सही कारणों का पता लगा रही है. 

माता-पिता से मोबाइल ज्यादा न चलाने की अपील

इस घटना के बाद दीपेश सोनिकर ने सभी अभिभावकों से अपील की कि बच्चों को जरूरत से ज्यादा मोबाइल फोन न दें. उन्होंने कहा कि माता-पिता को खुद भी मोबाइल का सीमित इस्तेमाल करना चाहिए और बच्चों के साथ ज्यादा समय बिताना चाहिए, ताकि वे खुलकर अपनी बातें शेयर कर सकें. लगातार मोबाइल गेम खेलने से बच्चों के स्वभाव और मानसिक स्थिति पर नकारात्मक असर पड़ सकता है, इसलिए समय रहते सतर्क रहना बेहद जरूरी है.

मोबाइल से बच्चो ंको होते हैं ये बड़े नकसान

घटना की सूचना मिलते ही चौक बाजार पुलिस मौके पर पहुंची और शव को पोस्टमॉर्टम के लिए भेज दिया. पुलिस ने आकस्मिक मौत का मामला दर्ज कर आगे की कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी है. वहीं, इस दर्दनाक घटना ने एक बार फिर बच्चों में बढ़ती डिजिटल लत, मानसिक स्वास्थ्य और अभिभावकों की भूमिका को लेकर गंभीर बहस छेड़ दी है. विशेषज्ञों का मानना है कि बच्चों के व्यवहार में अचानक आने वाले बदलावों को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए और जरूरत पड़ने पर समय रहते उनकी भावनात्मक और मनोवैज्ञानिक मदद लेनी चाहिए.

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