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बच्चों को फोन-टैबलेट से दूर रखने वाले पैरेंट्स तुरंत पढ़ें ये खबर, इस देश के शिक्षा विभाग ने दी बिल्कुल उलटी सलाह

Smartphone Addiction In Children: बच्चों से फोन-टैबलेट छीनना सही है या गलत? हांगकांग की शिक्षा मंत्री की ये बात हर माता-पिता को सुननी चाहिए...

बच्चों को फोन-टैबलेट से दूर रखने वाले पैरेंट्स तुरंत पढ़ें ये खबर, इस देश के शिक्षा विभाग ने दी बिल्कुल उलटी सलाह
हांगकांग के स्कूलों में फोन बैन नहीं होगा, बच्चों को सिखाया जाएगा AI और डिजिटल टूल्स का सही इस्तेमाल. (सांकेतिक तस्वीर)
AI

World News: आजकल हर घर की एक ही कहानी है. बच्चे फोन या टैबलेट से चिपके रहते हैं और माता-पिता उन्हें स्क्रीन से दूर करने में लगे रहते हैं. कुछ स्कूलों ने तो गैजेट्स लाने पर पूरी तरह पाबंदी लगा दी है. सबको लगता है कि मोबाइल बच्चों का दुश्मन है. लेकिन, हांगकांग की शिक्षा मंत्री क्रिस्टीन चोई ऐसा बिल्कुल नहीं मानतीं. उनका सीधा सा कहना है, 'अगर हम बच्चों को फोन-टैबलेट से सिर्फ इसलिए दूर रखेंगे क्योंकि उन्हें इसका सही इस्तेमाल नहीं आता, तो वे इसे कभी सीख ही नहीं पाएंगे. कल को उन्हें इसी डिजिटल दुनिया में काम करना है.'

हांगकांग के स्कूलों में अब क्या बदलेगा?

साउथ चाइना मॉर्निंग पोस्ट की रिपोर्ट के मुताबिक, बच्चों को भविष्य के लिए तैयार करने के लिए हांगकांग ने एक नया 'डिजिटल ब्लूप्रिंट' लागू किया है. अब वहां के स्कूलों में बच्चों को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और नई तकनीक के जरिए पढ़ाया जाएगा. सिर्फ बच्चे ही नहीं, टीचर्स के लिए भी हर 3 साल में 30 घंटे की डिजिटल ट्रेनिंग जरूरी कर दी गई है.

क्या कंप्यूटर टीचर्स की छुट्टी कर देंगे?

बिल्कुल नहीं! क्रिस्टीन चोई कहती हैं कि तकनीक सिर्फ पढ़ाई में मदद करने वाला एक टूल है. एक अच्छे टीचर की जगह कोई भी कंप्यूटर या मशीन नहीं ले सकती.

हांगकांग की सोच दुनिया से अलग क्यों?

जरा दुनिया के बाकी देशों को देखिए. स्वीडन और नॉर्वे जैसे देश स्कूलों में मोबाइल फोन और AI पर बैन लगा रहे हैं. वे वापस सिर्फ किताबों से पढ़ाने की तैयारी कर रहे हैं. लेकिन हांगकांग की सोच ज्यादा 'प्रैक्टिकल' है. एक्सपर्ट्स भी मानते हैं कि अगर बच्चों को स्कूल में सही तरीके से गैजेट्स चलाना नहीं सिखाया गया, तो वे घर आकर इसका गलत इस्तेमाल ही करेंगे.

असली चुनौती गैजेट्स पर बैन लगाना नहीं है, बल्कि बच्चों को 'डिजिटल डिसिप्लिन' सिखाना है.

क्या बच्चे अब लिखना-पढ़ना भूल जाएंगे?

माता-पिता को सबसे बड़ा डर यही होता है कि गैजेट्स के चक्कर में बच्चे हाथ से लिखना और किताबें पढ़ना छोड़ देंगे. इस डर पर शिक्षा मंत्री हंसते हुए कहती हैं, 'सालों पहले जब कैलकुलेटर आया था, तब भी लोगों को लगा था कि बच्चे गुणा-भाग भूल जाएंगे, पर ऐसा नहीं हुआ ना?' उन्होंने साफ किया कि स्कूलों में कॉपी-किताब से पढ़ने और हाथ से लिखने पर पहले की तरह ही पूरा जोर रहेगा.

बच्चों का 'स्क्रीन टाइम' कैसे मैनेज करें?

अगर हांगकांग की तरह हमें भी बच्चों को गैजेट्स के फायदे सिखाने हैं, तो घर पर ये 3 काम जरूर करें:-

  1. बच्चों को फोन दें, लेकिन दिन में सिर्फ 1-2 घंटे के लिए.
  2. उन्हें सिर्फ गेम खेलने के बजाय कोडिंग या नई भाषा सिखाने वाले ऐप्स के इस्तेमाल के लिए कहें.
  3. बच्चों के सामने आप भी अपना फोन कम इस्तेमाल करें, क्योंकि बच्चे आपको देखकर ही सीखते हैं.
FAQs (अक्सर पूछे जाने वाले सवाल)

सवाल-1. क्या स्मार्टफोन और टैबलेट से बच्चों की पढ़ाई सच में बेहतर होती है?
जवाब: जी हां, अगर इसका सही इस्तेमाल (जैसे एजुकेशनल ऐप्स और इंटरनेट रिसर्च के लिए) किया जाए, तो बच्चे मुश्किल चीजों को वीडियो और ग्राफिक्स के जरिए आसानी से समझ सकते हैं.

सवाल-2. क्या गैजेट्स से बच्चों की हैंडराइटिंग खराब हो जाती है?
जवाब: नहीं, ऐसा जरूरी नहीं है. स्कूलों और घरों में डिजिटल लर्निंग के साथ-साथ अगर कॉपी पर लिखने की रोजाना प्रैक्टिस कराई जाए, तो बच्चों की हैंडराइटिंग बिल्कुल खराब नहीं होगी.

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