- अहमदाबाद के गरबा कार्यक्रम में मंच से हुई विवादित घोषणा, मचा बवाल
- गैर-हिंदुओं को मैदान छोड़ने की अपील पर गरबा आयोजन विवादों में
- आदित्य गढ़वी बोले- 'गरबा ने कभी किसी का सरनेम नहीं पूछा'
गुजरात के अहमदाबाद में आयोजित एक लोकप्रिय नवरात्रि गरबा कार्यक्रम के दौरान की गई एक घोषणा को लेकर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है. शहर के शेला रोड स्थित पार्टी प्लॉट में आयोजित ‘रंग मोरला फीट आदित्य गढ़वी' कार्यक्रम में मंच से गैर-हिंदुओं और मुसलमानों को मैदान छोड़ने की अपील की गई. इस घोषणा का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गया, जिसके बाद इसे लेकर राजनीतिक और सामाजिक बहस शुरू हो गई. विवाद बढ़ने पर प्रसिद्ध लोकगायक आदित्य गढ़वी ने सार्वजनिक रूप से इस घोषणा से खुद को अलग बताया है.
मंच से की गई विवादित घोषणा
मामला अहमदाबाद के एक प्रमुख गरबा आयोजन से जुड़ा है, जहां कार्यक्रम के दौरान मंच पर मौजूद एंकर और आरजे आकाश त्रिवेदी ने एक विवादित घोषणा की. घोषणा में कहा गया कि कोई भी गैर-हिंदू या मुस्लिम व्यक्ति स्वेच्छा से कार्यक्रम स्थल छोड़ दे.
घोषणा में विश्व हिंदू परिषद (वीएचपी) के हेल्पलाइन नंबर का भी जिक्र किया गया और मंच से उपस्थित वीएचपी कार्यकर्ताओं से आसपास नजर रखने की अपील की गई. इसके बाद कार्यक्रम का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया और इस पर विभिन्न प्रतिक्रियाएं सामने आने लगीं.
VHP ने क्या कहा?
विवाद के बीच विश्व हिंदू परिषद ने इस कदम का बचाव किया. संगठन का कहना है कि वीएचपी और बजरंग दल के स्वयंसेवक नियमित रूप से ऐसे आयोजनों का दौरा करते हैं और गैर-हिंदुओं के प्रवेश को रोकने के लिए निगरानी रखते हैं. हालांकि घटना के बाद यह मुद्दा गरबा आयोजनों में प्रवेश, पहचान और सांस्कृतिक आयोजनों की प्रकृति को लेकर नई बहस का कारण बन गया है.
सोशल मीडिया पर छिड़ी बहस
घटना का वीडियो सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर इसे लेकर व्यापक चर्चा शुरू हो गई. एक वर्ग ने मंच से की गई घोषणा पर सवाल उठाए, जबकि दूसरे पक्ष ने इसे आयोजन की प्रकृति से जुड़ा मुद्दा बताया.

सिंगर ने जारी किया बयान
Photo Credit: सोशल मीडिया पोस्ट का स्क्रीनशॉट
आदित्य गढ़वी ने जारी किया बयान
विवाद बढ़ने के बाद गुजरात के लोकप्रिय लोकगायक आदित्य गढ़वी ने सोशल मीडिया पर विस्तृत बयान जारी कर घोषणा से दूरी बनाई. उन्होंने कहा कि मंच से जो कुछ हुआ, वह उनकी जानकारी या सहमति से नहीं हुआ था. गढ़वी ने कहा कि कुछ लोगों ने बैकस्टेज की व्यवस्था अपने हाथ में लेकर उनके मंच का इस्तेमाल ऐसे उद्देश्य के लिए किया, जिससे उनका कोई संबंध नहीं है. उन्होंने स्पष्ट किया कि उनकी टीम और कार्यक्रम के एंकर से भी इस बारे में कोई सलाह-मशविरा नहीं किया गया था.

आदित्य गढ़वी का बयान
Photo Credit: सोशल मीडिया पोस्ट का स्क्रीनशॉट
‘गरबा ने कभी किसी का सरनेम नहीं पूछा'
अपने बयान में आदित्य गढ़वी ने गरबा की समावेशी परंपरा पर जोर दिया. उन्होंने कहा कि पीढ़ियों से गुजरात और देशभर के लोग अलग-अलग धर्मों के बावजूद एक साथ गरबा खेलते आए हैं. उन्होंने कहा, 'गरबा ने कभी किसी से उसका सरनेम नहीं पूछा. जो भी मां अम्बा के प्रति श्रद्धा और सम्मान लेकर आता है, उसका मेरी मंडली में स्वागत है. यह राजनीति नहीं, बल्कि मेरे संस्कार हैं. मेरा मंच संगीत और भक्ति के लिए है.'
जहां अहमदाबाद का यह गरबा कार्यक्रम धार्मिक और सांस्कृतिक आयोजनों में भागीदारी को लेकर बहस में आ गया है. वहीं आदित्य गढ़वी के बयान ने यह साफ कर दिया है कि वह मंच से की गई विवादित घोषणा से स्वयं को पूरी तरह अलग मानते हैं.
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