Silver Work On Indian Sweets: भारतीय मिठाइयों की बात हो और उन पर चमकता हुआ चांदी का वर्क नजर न आए, ऐसा बहुत कम देखने को मिलता है. काजू कतली, सोहन पापड़ी, पेड़ा, बर्फी और कई पारंपरिक मिठाइयों पर लगी यह पतली सिल्वर लेयर मिठाई को शाही लुक देती है. हालांकि बहुत से लोग आज भी सोचते हैं कि आखिर मिठाइयों पर चांदी का वर्क लगाया क्यों जाता है? क्या यह सिर्फ सजावट के लिए होता है या इसके पीछे कोई पुरानी परंपरा भी जुड़ी हुई है?
भारत में चांदी के वर्क का इस्तेमाल सदियों से होता आ रहा है. पुराने समय में राजघरानों और शाही दावतों में खाने को खास और प्रीमियम दिखाने के लिए सोने और चांदी का इस्तेमाल किया जाता था. धीरे-धीरे यह परंपरा आम लोगों तक भी पहुंच गई और मिठाइयों पर चांदी का वर्क लगाना शुभता और सम्मान का प्रतीक माना जाने लगा.
मिठाई को देता है रॉयल लुक
चांदी का वर्क मिठाई को ज्यादा आकर्षक और रिच दिखाने का काम करता है. त्योहार, शादी या किसी खास मौके पर लोग ऐसी मिठाइयां पसंद करते हैं जो देखने में शानदार लगें. यही वजह है कि आज भी ज्यादातर प्रीमियम स्वीट्स पर सिल्वर वर्क लगाया जाता है.

आयुर्वेद में चांदी को माना गया है ठंडक देने वाला
आयुर्वेद में चांदी को ठंडी तासीर वाला माना गया है. कई पुराने ग्रंथों में चांदी के इस्तेमाल को शरीर के लिए फायदेमंद बताया गया है. माना जाता था कि सीमित मात्रा में इस्तेमाल होने वाला शुद्ध चांदी का वर्क शरीर को ठंडक पहुंचाने में मदद कर सकता है. हालांकि एक्सपर्ट्स साफ कहते हैं कि सिर्फ फूड ग्रेड वर्क का ही इस्तेमाल होना चाहिए.
कैसे बनता है चांदी का वर्क?
चांदी को बेहद पतली परत में पीटकर वर्क तैयार किया जाता है. यह इतना हल्का और पतला होता है कि हाथ लगाते ही टूट सकता है. इसी वजह से इसे बहुत सावधानी से मिठाइयों पर लगाया जाता है.
खरीदते समय रखें ध्यान
आजकल बाजार में नकली वर्क भी बिकने लगे हैं. इसलिए हमेशा भरोसेमंद दुकानों से ही मिठाई खरीदनी चाहिए. असली चांदी का वर्क बहुत पतला और हल्का दिखाई देता है, जबकि नकली वर्क ज्यादा चमकदार और मोटा लग सकता है.
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