सितंबर का महीना आते ही घर-परिवार में पूजा-पाठ और पितरों के तर्पण की बातें शुरू हो जाती हैं. हिंदू पंचांग में अमावस्या तिथि का बहुत बड़ा धार्मिक महत्व माना गया है, खासकर जब बात भाद्रपद या पितृ पक्ष की शुरुआत से जुड़ी हो. इस दिन हर घर में पितरों की आत्मा की शांति के लिए तर्पण, दान और विशेष भोग तैयार किया जाता है. बड़े-बुजुर्ग हमेशा कहते हैं कि इस दिन बना भोजन केवल पेट भरने के लिए नहीं, बल्कि पूर्वजों के प्रति हमारा आदर और कृतज्ञता दिखाने का जरिया होता है.
लेकिन हर गृहिणी के सामने सबसे बड़ी उलझन यही होती है कि इस खास मौके पर थाली में क्या-क्या पकवान बनाए जाएं. पितरों का खाना बनाते समय कुछ खास नियमों और सात्विकता का ध्यान रखना बेहद जरूरी होता है. अगर आप भी सोच रही हैं कि इस सितंबर अमावस्या पर कौन से पारंपरिक व्यंजन बनाएं जो स्वादिष्ट भी हों और नियमों के अनुसार सही भी, तो यह पूरी थाली की गाइड आपके बहुत काम आएगी.
| अमावस्या थाली चैकलिस्ट |
|---|
| खीर |
| पूड़ी |
| कद्दू की सब्जी |
| अरबी |
| चने की दाल |
| गुड़ और तिल |
| मौसमी फल |
अमावस्या के भोजन में क्यों जरूरी है सात्विकता
अमावस्या और श्राद्ध के भोजन में सात्विकता सबसे पहला नियम है. इसका मतलब यह है कि इस दिन के खाने में प्याज, लहसुन, हींग जैसी तेज गंध वाली चीजें बिल्कुल नहीं डाली जातीं. खाना सादे मसालों जैसे जीरा, सेंधा नमक, हरी मिर्च और देसी घी में तैयार किया जाता है. माना जाता है कि बिना किसी तीखेपन के बना शांत और सुपाच्य भोजन ही पूर्वजों तक तृप्ति पहुंचाता है.
पितरों के लिए पारंपरिक भोग की थाली
जब भी पितरों के निमित्त भोग की थाली सजाई जाती है, तो कुछ पारंपरिक पकवानों का होना अनिवार्य माना जाता है.
चावल या मखाने की खीर: पितरों के भोग में खीर सबसे मुख्य पकवान है. गाय के ताजे दूध में नए चावल या मखाने डालकर धीमी आंच पर गाढ़ी खीर बनाई जाती है. मिठास के लिए इसमें चीनी या मिश्री का प्रयोग करें. ऐसा माना जाता है कि खीर की महक से ही पितृ तृप्त होते हैं.
गरमा-गरम पूड़ियां: गेहूं के सादे आटे में हल्का सा मोयन डालकर नरम पूड़ियां तली जाती हैं. पितरों की थाली में रोटी के मुकाबले पूड़ी रखने की पुरानी परंपरा है.
खट्टा-मीठा कद्दू (काशीफल): अमावस्या की थाली कद्दू की सब्जी के बिना अधूरी मानी जाती है. पीले पके कद्दू को मेथी दाना, हरी मिर्च और थोड़े से गुड़ के साथ पकाया जाता है. इसका हल्का खट्टा-मीठा स्वाद हर किसी को पसंद आता है.
सूखी या रसेदार अरबी: अरबी भी पितरों के प्रिय भोज्य पदार्थों में से एक है. अजवाइन के तड़के में बनी सूखी अरबी खाने में बहुत स्वादिष्ट लगती है और पचने में भी हल्की होती है.
चने की सादी दाल: बिना प्याज-लहसुन के केवल जीरा और देसी घी का छौंक लगाकर बनाई गई चने की दाल थाली को पूरा करती है.
गुड़, काले तिल और मौसमी फल: भोग निकालते समय थाली में थोड़ा सा गुड़, काले तिल और केले या सेब जैसे मौसमी फल जरूर रखे जाते हैं.
घर के लिए आसान सात्विक लंच मेन्यू
पितरों को भोग लगाने और गाय, कौवे, कुत्ते व चींटियों का हिस्सा निकालने के बाद घर के सभी सदस्य भोजन करते हैं. दोपहर के खाने के लिए आप एक हल्का और संतुलित सात्विक मेन्यू तैयार कर सकती हैं.
- अरहर या मूंग की पतली दाल के साथ सादा बासमती चावल.
- लौकी की सादी सब्जी या तोरी की सब्जी, जो पेट के लिए बहुत ठंडी और सुपाच्य होती है.
- भुने जीरे और काले नमक से सजा ठंडा खीरे का रायता.
- तवे पर सिंकी हुई देसी घी लगी रोटियां.
- मीठे में बची हुई मखाना खीर.
यह सादा खाना न सिर्फ परंपरा के अनुकूल है, बल्कि बदलते मौसम में शरीर को हल्का और स्वस्थ भी रखता है.
अमावस्या पर भोजन बनाते समय किन बातों का रखें ध्यान?
अमावस्या का भोजन तैयार करते समय मन की पवित्रता और रसोई की सफाई सबसे ज्यादा मायने रखती है.
- खाना बनाने से पहले स्नान जरूर कर लें और एकदम साफ-सुथरे कपड़े पहनकर ही रसोई में जाएं.
- पितरों का खाना बनाते वक्त मन में कोई गुस्सा, चिढ़ या नकारात्मक विचार न लाएं, शांत मन से बनाया खाना ही शुभ फल देता है.
- जब तक पितरों के नाम की पहली थाली न निकल जाए, तब तक परिवार का कोई भी सदस्य खाना न खाए और न ही खाने को चखे.
- लोहे या मिट्टी के बर्तन में खाना बनाना बहुत उत्तम माना जाता है, प्लास्टिक के बर्तनों में भोग बिल्कुल न परोसें.
- खाना परोसने के लिए पत्तल या कांसे की थाली का इस्तेमाल करना सबसे शुभ माना गया है.
अगर आपके घर में इस दिन ब्राह्मण भोज की परंपरा है, तो उन्हें आदरपूर्वक बैठाकर भोजन कराएं और अपनी सामर्थ्य के अनुसार दक्षिणा व वस्त्र दान करें. अगर किसी वजह से ब्राह्मण भोज कराना संभव न हो, तो किसी जरूरतमंद व्यक्ति को यह सात्विक भोजन कराकर भी पुण्य प्राप्त किया जा सकता है. इस आसान मेन्यू से आपकी अमावस्या की तैयारी बिना किसी हड़बड़ाहट के पूरी श्रद्धा के साथ संपन्न होगी.
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