हमारे भारतीय रसोई में नमक के बिना किसी भी खाने की कल्पना नहीं की जा सकती. दाल हो, सब्जी हो या फिर सुबह का नाश्ता, अगर नमक जरा सा भी कम या ज्यादा हो जाए तो पूरे खाने का स्वाद बिगड़ जाता है. आजकल जब लोग अपनी सेहत को लेकर सजग हो रहे हैं, तो आम सफेद टेबल साल्ट को छोड़कर देसी विकल्पों की तरफ तेजी से मुड़ रहे हैं. बाजार में दो नाम सबसे ज्यादा सुनाई देते हैं, एक सेंधा नमक और दूसरा काला नमक.
अक्सर लोग इन दोनों को लेकर काफी भ्रम में रहते हैं. कई लोगों को लगता है कि दोनों एक ही तरह के पहाड़ी नमक हैं, बस रंग का थोड़ा फर्क है. लेकिन असलियत इससे काफी अलग है. दोनों के बनने का तरीका, इनके पोषक तत्व, शरीर पर इनका असर और रसोई में इस्तेमाल करने की जगह एकदम जुदा होती है. आइए बड़े ही आसान शब्दों में समझते हैं कि इन दोनों में असली अंतर क्या है और हमारे शरीर के लिए कौन सा नमक किस वक्त ज्यादा काम आता है.
सेंधा नमक क्या है और यह कैसे बनता है
सेंधा नमक को अंग्रेजी में रॉक साल्ट या हिमालयन पिंक साल्ट भी कहा जाता है. इसे हमारे देश में सबसे शुद्ध नमक माना जाता है, यही वजह है कि नवरात्र या किसी भी उपवास में केवल इसी नमक का सेवन किया जाता है.
- यह नमक समुद्र के पानी को सुखाकर नहीं बनाया जाता, बल्कि यह जमीन के नीचे मौजूद प्राचीन नमक की चट्टानों और खानों से खोदकर निकाला जाता है.
- इसमें किसी तरह की केमिकल प्रोसेसिंग नहीं होती, यानी इसे फैक्ट्रियों में ब्लीच नहीं किया जाता.
- इसका रंग हल्का गुलाबी, सफेद या बादामी होता है, जो इसमें मौजूद प्राकृतिक खनिजों की वजह से दिखता है.
- सेंधा नमक में कैल्शियम, पोटेशियम, मैग्नीशियम और आयरन जैसे कई खनिज पाए जाते हैं. हालांकि इनकी मात्रा अपेक्षाकृत कम होती है.
काला नमक क्या है और इसकी खासियत क्या है
काला नमक यानी ब्लैक साल्ट भी खनिज नमक ही होता है, लेकिन इसे तैयार करने की प्रक्रिया बहुत अनोखी और पारंपरिक होती है. अगर आप इसकी डली देखें तो यह गहरे जामुनी या काले रंग की दिखती है, लेकिन जब इसे बारीक पीसा जाता है तो इसका रंग हल्का गुलाबी या बैगनी सा हो जाता है.
- इसे प्राकृतिक नमक की चट्टानों को खास जड़ी-बूटियों जैसे हरड़, बहेड़ा, आंवला और बबूल की छाल के साथ मिलाकर भट्टी में 24 घंटे तक पकाया जाता है.
- इस खास प्रक्रिया की वजह से इसमें गंधक यानी सल्फर की मात्रा आ जाती है, जिससे इसकी महक काफी तेज और तीखी हो जाती है.
- चाट, रायता, जलजीरा और फलों की चाट में जो चटपटा स्वाद और खास खूशबू आती है, वो इसी काले नमक की देन होती है.
- इसमें भी आयरन और सल्फर भरपूर मात्रा में होते हैं, जो पाचन तंत्र के लिए रामबाण का काम करते हैं.
यहां देखें कैसे बनता है काला नमक | Video
दोनों के बीच मुख्य अंतर
अगर हम दोनों की तुलना करें, तो कुछ बहुत साफ फर्क नजर आते हैं जिन्हें हर आम इंसान को जान लेना चाहिए.
स्वाद और महक: सेंधा नमक का स्वाद बिल्कुल सादे सफेद नमक जैसा ही सौम्य होता है, इसमें कोई खास गंध नहीं होती. वहीं काले नमक में सल्फर के कारण उबले अंडे जैसी तीखी गंध और एकदम चटपटा स्वाद होता है.
तासीर का अंतर: आयुर्वेद के मुताबिक सेंधा नमक की तासीर ठंडी मानी जाती है और यह शरीर में पित्त दोष को शांत करता है. इसके उलट काला नमक तासीर में हल्का गर्म होता है और यह कफ व वात की समस्या में ज्यादा असरदार होता है.
पकाने में इस्तेमाल: सेंधा नमक को आप रोज की दाल-सब्जी पकाने में मुख्य नमक की तरह इस्तेमाल कर सकते हैं. लेकिन काले नमक से रोजमर्रा की सब्जी नहीं पकाई जाती, इसे ऊपर से छिड़क कर खाया जाता है.
व्रत और उपवास: पूजा-पाठ और व्रत में सिर्फ सेंधा नमक चलता है, क्योंकि इसे पूरी तरह अपरिष्कृत और प्राकृतिक माना जाता है. काला नमक भट्टी में पकाने और प्रोसेस होने के कारण व्रत में वर्जित होता है.
सेहत के लिहाज से कौन किस काम आता है
दोनों ही नमक हमारे शरीर को अलग-अलग तरीकों से फायदा पहुंचाते हैं, बस हमें यह पता होना चाहिए कि कब किसका सेवन करना है.
- पेट की गैस और अपच में: अगर पेट में भारीपन, गैस, एसिडिटी या कब्ज की शिकायत रहती है, तो काला नमक सबसे बेहतरीन उपाय है. गुनगुने पानी में चुटकी भर काला नमक और हींग डालकर पीने से तुरंत डकार आती है और पेट हल्का हो जाता है.
- हाई ब्लड प्रेशर के मरीजों के लिए: जिन लोगों को उच्च रक्तचाप यानी बीपी की समस्या है, उनके लिए सेंधा नमक बहुत मुफीद माना जाता है. सादे सफेद नमक के मुकाबले इसमें सोडियम की मात्रा कम होती है और पोटेशियम ज्यादा होता है, जो दिल की सेहत को दुरुस्त रखने में मदद करता है.
- मांसपेशियों में ऐंठन और तनाव: रात में सोते समय पैरों की नसों में खिंचाव या मांसपेशियों में ऐंठन की दिक्कत हो, तो सेंधा नमक शरीर में इलेक्ट्रोलाइट बैलेंस को बनाए रखने का काम करता है.
- भूख बढ़ाने में मददगार: जिन लोगों को खुलकर भूख नहीं लगती या मुंह का स्वाद कड़वा रहता है, उनके लिए काले नमक का इस्तेमाल भूख खोलने का काम करता है.
रोजमर्रा की जिंदगी में कैसे करें सही इस्तेमाल
एक आम इंसान को अपनी रसोई में दोनों ही नमकों को जगह देनी चाहिए, लेकिन समझदारी के साथ.
अगर आप अपने पूरे परिवार को सेहतमंद रखना चाहते हैं, तो रोज के खाना पकाने में सादे सफेद रिफाइंड नमक की जगह पिसा हुआ सेंधा नमक इस्तेमाल करना शुरू कर दें. यह बिना किसी साइड इफेक्ट के खाने का स्वाद भी बनाए रखेगा और शरीर को जरूरी खनिज भी देगा.
वहीं दूसरी तरफ, काले नमक को एक औषधीय और स्वाद बढ़ाने वाले मसाले के रूप में रखें. जब भी आप दही का रायता बनाएं, सलाद काटें, फ्रूट चाट बनाएं या गर्मियों में शिकंजी और छाछ तैयार करें, तो उसमें सादे नमक के साथ चुटकी भर काला नमक जरूर मिलाएं. इससे खाना न केवल स्वादिष्ट बनेगा बल्कि आसानी से हजम भी हो जाएगा.
आखिर में सबसे जरूरी बात यह ध्यान रखें कि कोई भी नमक कितना भी गुणकारी क्यों न हो, उसका अत्यधिक सेवन सेहत को नुकसान ही पहुंचाता है. इसलिए अपने शरीर की जरूरत के हिसाब से सही नमक चुनें और सीमित मात्रा में ही इसका आनंद लें.
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