ट्रंप प्रशासन ने अमेरिका के लिए नए आहार दिशा-निर्देश यानी डायटरी गाइडलाइंस जारी की है. इन्हें मेडिकल एसोसिएशन, किसान समूहों और स्वास्थ्य के प्रति जागरुकता रखने वाले लोगों ने सकारात्मक रूप से स्वीकार किया है. सभी ने इस बात की सराहना की है कि इन दिशा-निर्देशों में असली और प्राकृतिक भोजन पर ज़ोर दिया गया है और बहुत ज्यादा प्रोसेस्ड खाद्य पदार्थों से दूरी बनाने की सलाह दी गई है.
नए दिशा-निर्देशों में “असली खाने” को पोषण नीति के केंद्र में रखा गया है. इसमें साबुत और कम प्रोसेस्ड भोजन को प्राथमिकता दी गई है. साथ ही अतिरिक्त शुगर, रिफाइंड कार्बोहाइड्रेट और बहुत अधिक प्रोसेस्ड उत्पादों को सीमित करने की बात कही गई है. समर्थकों का कहना है कि यह पोषण नीति में बड़ा बदलाव है, जिसका उद्देश्य लंबे समय से चल रही बीमारियों को कम करना और लोगों के स्वास्थ्य को बेहतर बनाना है.
कई बड़े चिकित्सा संगठनों ने कहा है कि ये नए दिशा-निर्देश वैज्ञानिक प्रमाणों पर आधारित हैं. अमेरिकन मेडिकल एसोसिएशन ने कहा कि ये दिशा-निर्देश सीधे तौर पर खान-पान से जुड़ी बीमारियों को संबोधित करते हैं. संगठन के अध्यक्ष बॉबी मुक्कामाला ने कहा कि इसमें अत्यधिक प्रोसेस्ड भोजन, मीठे पेय और ज्यादा नमक के सेवन पर रोशनी डाली गई है, जो हृदय रोग, मधुमेह, मोटापा और अन्य पुरानी बीमारियों का कारण बनते हैं. उन्होंने यह भी कहा कि इससे यह संदेश मिलता है कि भोजन ही दवा है.
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बता दें कि बॉबी मुक्कामाला इस पद पर पहुंचने वाले पहले भारतीय मूल के अमेरिकी हैं.
अमेरिकन एकेडमी ऑफ पीडियाट्रिक्स के अध्यक्ष एंड्रयू रैसीन ने कहा कि इन दिशा-निर्देशों में बच्चों के पोषण पर साफ़ फोकस किया गया है. इसमें बच्चों के लिए स्वस्थ भोजन की आदतों को बढ़ावा दिया गया है. उन्होंने कहा कि बाल रोग विशेषज्ञ "स्तनपान, ठोस खाद्य पदार्थों की शुरुआत, कैफीन से बचने और अतिरिक्त शर्करा पर सीमा से संबंधित अकादमी की साक्ष्य-आधारित नीति को शामिल करने की सराहना करते हैं."
अमेरिकन कॉलेज ऑफ कार्डियोलॉजी ने भी इन बदलावों का स्वागत किया. संगठन के अध्यक्ष क्रिस्टोफर क्रेमर ने कहा कि नए दिशा-निर्देशों में फल, सब्जियां, साबुत अनाज खाने और अतिरिक्त चीनी, ज़्यादा प्रोसेस्ड भोजन, सैचुरेटेड फैट और मीठे पेय कम करने की सिफारिश की गई है. साथ ही मांस, मछली, अंडे, मेवे, बीज, जैतून और एवोकाडो जैसे संपूर्ण खाद्य स्रोतों से स्वस्थ वसा लेने की बात कही गई है.
सार्वजनिक स्वास्थ्य और अस्पतालों से जुड़े समूहों ने भी इसी तरह की राय रखी. अमेरिकन हार्ट एसोसिएशन ने कहा कि फल, सब्जियों और साबुत अनाज पर ज़ोर देना और प्रोसेस्ड खाद्य पदार्थों को सीमित करना पहले से चली आ रही स्वास्थ्य सलाह के अनुरूप है. अमेरिकन हॉस्पिटल एसोसिएशन की उपाध्यक्ष स्टेसी ह्यूज ने कहा कि ये दिशा-निर्देश हमारे खाने को लेकर जरूरी चर्चा को आगे बढ़ाते हैं और बीमारी से बचाव में पोषण की अहम भूमिका को दिखाते हैं.
विभिन्न क्षेत्रों के किसानों और खाद्य उत्पादकों ने भी समर्थन व्यक्त किया. अमेरिकन फार्म ब्यूरो फेडरेशन के प्रेसिडेंट जिप्पी डुवैल ने कहा कि ये गाइडलाइंस "अमेरिका के किसानों और पशुपालकों के महत्व को पहचानती हैं जो सुरक्षित और पौष्टिक भोजन उगाते हैं," और उन्होंने "उच्च-गुणवत्ता वाले प्रोटीन, डेयरी, और ताज़े फल और सब्जियों" पर फोकस का स्वागत किया. मांस, पोल्ट्री और डेयरी से जुड़े संगठनों ने भी कहा कि प्रोटीन और संपूर्ण दूध उत्पादों की अहमियत को मान्यता मिलना सही दिशा में कदम है.
अल्ट्रा-प्रोसेस्ड भोजन को लेकर चिंता जताने वाले समूहों का कहना है कि ये दिशा-निर्देश सही रास्ता दिखाते हैं. एनवायरनमेंटल वर्किंग ग्रुप की सीनियर डायरेक्टर सारा रेनहार्ड्ट ने कहा, "हम पहले से ही जानते हैं कि रिफाइंड अनाज और अतिरिक्त चीनी वाले अल्ट्रा-प्रोसेस्ड फूड्स पुरानी बीमारियों में योगदान दे रहे हैं."
टफ्ट्स यूनिवर्सिटी के ‘फूड इज मेडिसिन' संस्थान के निदेशक दारियुश मोज़ाफ़ेरियन ने कहा कि अत्यधिक प्रोसेस्ड भोजन कम खाने की सलाह देना जनस्वास्थ्य के लिए एक बहुत सकारात्मक कदम है.
कई विशेष स्वास्थ्य और उपभोक्ता समूहों ने बच्चों के भोजन, एलर्जी कम करने के लिए शुरुआती आहार और शराब के सीमित सेवन जैसी बातों को शामिल करने की भी सराहना की. फल, सब्जी, दाल और अंडा उत्पादकों ने भी पोषक तत्वों से भरपूर भोजन पर जोर देने का स्वागत किया.
प्रशासन से जुड़े राजनीतिक नेताओं ने भी इस बदलाव की तारीफ की. अर्कांसस की गवर्नर सारा हकाबी सैंडर्स ने कहा कि अब अमेरिकी लोगों के स्वास्थ्य को नजरअंदाज नहीं किया जाएगा, जबकि ओक्लाहोमा के गवर्नर केविन स्टिट ने कहा कि फूड पिरामिड में मांस और दुग्ध उत्पादों को अहम स्थान मिलना सकारात्मक है.
अमेरिकियों के लिए आहार संबंधी दिशानिर्देश अमेरिकी स्वास्थ्य और मानव सेवा विभाग और कृषि विभाग द्वारा संयुक्त रूप से जारी किए जाते हैं और हर पांच साल में अपडेट किए जाते हैं. ये दिशा-निर्देश देश भर में सरकारी पोषण योजनाओं, स्कूलों के भोजन और स्वास्थ्य से जुड़े संदेशों की दिशा तय करते हैं.
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(अस्वीकरण: सलाह सहित यह सामग्री केवल सामान्य जानकारी प्रदान करती है. यह किसी भी तरह से योग्य चिकित्सा राय का विकल्प नहीं है. अधिक जानकारी के लिए हमेशा किसी विशेषज्ञ या अपने चिकित्सक से परामर्श करें. एनडीटीवी इस जानकारी के लिए ज़िम्मेदारी का दावा नहीं करता है.)
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