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टाइम नहीं है रेडी टू ईट खाना खा लेती हूं? क्या आप भी ऐसा ही करते हैं...तो ना करें ये गलती

Ready To Eat Food: अगर आप भी कम समय होने की वजह से या फिर आलस में या फिर स्वाद की वजह से रेडी टू ईट या फिर पैकेट वाले खाने पर डिपेंड रहते हैं तो जान लीजिए कि आप अपनी सेहत के साथ खिलवाड़ कर रहे हैं. थोड़ी से मेहनत और आलस की वजह से आप अपने शरीर को बीमारियों की चपेट में ले जा रहे हैं.

टाइम नहीं है रेडी टू ईट खाना खा लेती हूं? क्या आप भी ऐसा ही करते हैं...तो ना करें ये गलती
Ready To Eat Food: ये खबर पढ़ने के बाद आप भी नहीं खाएंगे पैकेट वाला खाना.

Ready to Eat Food: आज की तेज रफ्तार जिंदगी में हर किसी के पास समय की कमी है. ऑफिस, पढ़ाई, ट्रैफिक और रोजमर्रा की भागदौड़ के बीच खाना बनाना कई बार बोझ जैसा लगने लगता है. ऐसे में रेडी-टू-ईट और पैकेज्ड फूड हमारे सबसे आसान साथी बन जाते हैं. बस पैकेट खोलो, गर्म करो और खाना तैयार, लेकिन ये सुविधा हमारे शरीर को धीरे-धीरे कमजोर कर रही हैं. 

रेडी टू ईट खाने की असलियत

फ्लेवर दही, इंस्टेंट ओट्स, नूडल्स, फ्रोजन सब्जियां सब कुछ हेल्दी और टेस्टी होने का दावा करते हैं. पैकेट पर लो फैट, हाई फाइबर या 100 प्रतिशत नेचुरल जैसे शब्द लिखे होते हैं, जो हमें भरोसा दिलाते हैं कि हम सही चुनाव कर रहे हैं, लेकिन असलियत थोड़ी अलग होती है. दरअसल, इन पैकेज्ड फूड्स को लंबे समय तक सुरक्षित रखने के लिए इनमें प्रिजर्वेटिव्स, ज्यादा नमक, शुगर और आर्टिफिशियल फ्लेवर मिलाए जाते हैं. ये चीजें स्वाद तो बढ़ा देती हैं, लेकिन शरीर पर धीरे-धीरे बुरा असर डालती हैं. जैसे ज्यादा नमक से ब्लड प्रेशर बढ़ सकता है, ज्यादा शुगर से वजन और डायबिटीज का खतरा बढ़ता है.

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पोषण की कमी

इनमें पोषण की भी कमी होती है. ताजे खाने में जो विटामिन्स और मिनरल्स होते हैं, वो प्रोसेसिंग के दौरान काफी हद तक खत्म हो जाते हैं. इस वजह से इससे पेट तो भर जाता है, लेकिन शरीर को असली पोषण नहीं मिल पाता.

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आदत

एक बार जब हम इन आसान विकल्पों के आदी हो जाते हैं, तो धीरे-धीरे घर का बना खाना हमें फीका लगने लगता है. यही सबसे बड़ा खतरा है. हम सुविधा के चक्कर में अपनी खाने की आदतें ही बदल देते हैं और यही आदतें आगे चलकर सेहत पर असर डालती हैं.

इसका मतलब ये नहीं कि आपको पूरी तरह से पैकेज्ड फूड से दूरी बना लेनी चाहिए. कभी-कभार इन्हें खाना ठीक है, लेकिन इन्हें रोजमर्रा की आदत बनाना सही नहीं है. कोशिश करें कि ज्यादा से ज्यादा ताजा और घर का बना खाना खाएं. अगर पैकेज्ड फूड लेना भी पड़े, तो उसके लेबल को ध्यान से पढ़ें क्योंकि उसमें क्या-क्या मिला है, ये जानना जरूरी है.

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(अस्वीकरण: सलाह सहित यह सामग्री केवल सामान्य जानकारी प्रदान करती है. यह किसी भी तरह से योग्य चिकित्सा राय का विकल्प नहीं है. अधिक जानकारी के लिए हमेशा किसी विशेषज्ञ या अपने चिकित्सक से परामर्श करें. एनडीटीवी इस जानकारी के लिए ज़िम्मेदारी का दावा नहीं करता है.)

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