Major Om Nagarjun Dowry Case: मध्य प्रदेश में भोपाल की एक्ट्रेस ट्विशा शर्मा की संदिग्ध मौत का मामला अभी पूरी तरह शांत भी नहीं हुआ था कि बिल्कुल वैसा ही एक और गंभीर मामला जबलपुर में सामने आया है. चेन्नई के रहने वाले कारोबारी पी. दक्षिणामूर्ति अपनी 27 वर्षीय एडवोकेट बेटी कविता नागार्जुन की संदिग्ध मौत को हत्या बताते हुए इंसाफ के लिए दर-दर भटक रहे हैं. पुलिस द्वारा एक साल से एफआईआर दर्ज न किए जाने से परेशान होकर पीड़ित पिता ने अब जबलपुर की एडीजे कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है, जहां 3 जून 2026 यानि आज इस मामले पर अहम सुनवाई होनी है. पिता का सीधा आरोप है कि सेना में मेजर और डॉक्टर दामाद ने 2 करोड़ रुपये का दहेज न मिलने पर उनकी बेटी की जान ले ली.
करोड़ों के उपहारों के बाद भी दो करोड़ की अतिरिक्त मांग
पीड़ित पिता पी. दक्षिणामूर्ति ने अदालत में दायर याचिका में बताया है कि उन्होंने 2 मार्च 2025 को अपनी इकलौती बेटी कविता का विवाह तमिलनाडु के रहने वाले डॉ. ओम नागार्जुन से किया था. ओम वर्तमान में जबलपुर के जेकेआरआरसी में मेजर पद पर तैनात हैं.
इसके बावजूद शादी के तुरंत बाद से ही कविता को प्रताड़ित किया जाने लगा. आरोप है कि मेजर दामाद अपना नया अस्पताल बनवाने के लिए कविता पर मायके से 2 करोड़ रुपये और लाने का लगातार दबाव बना रहा था, और जब कविता ने इससे साफ इनकार कर दिया तो संदिग्ध परिस्थितियों में उसकी मौत हो गई.

Major Om Nagarjun Dowry Case: चेन्नई के रहने वाले कारोबारी पी. दक्षिणामूर्ति के वकील का कहना है कि ये मामला पूरी तरह से संदेहास्पद है. कविता को कई जगह चोटें भी लगी थीं
Photo Credit: संजीव चौधरी
इंदौर की महिला मित्र से 100 घंटे की बातचीत
इस हाई-प्रोफाइल मामले में प्रताड़ना के कई और गंभीर आरोप भी सामने आए हैं. पिता का आरोप है कि तमिलनाडु में रहने वाले मेजर के माता-पिता ने कविता को मानसिक रूप से परेशान करने के लिए घर की कामवाली (मेड) को हटा दिया था, जिसके बाद पूरी तरह से घर का सारा काम कविता से कराया जाने लगा.पिता का दावा है कि महज तीन महीने के शादीशुदा जीवन में मेजर ओम नागार्जुन ने अपनी पत्नी कविता से बहुत कम बात की. उनका अधिकांश समय इंदौर की एक महिला मित्र से फोन पर बातचीत में बीतता था. कॉल रिकॉर्ड्स के हवाले से आरोप लगाया गया है कि दामाद ने उस महिला मित्र से 100 घंटे से भी अधिक समय तक बात की थी.
अस्पताल महज 5 मिनट की दूरी पर, पहुंचने में लगे 3 घंटे
कविता की मौत 10 जून 2025 की सुबह हुई थी, लेकिन उसके ठीक एक रात पहले की टाइमलाइन पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं. याचिका के अनुसार, 9 जून 2025 की रात करीब 12:30 बजे मेजर ओम नागार्जुन अपनी पत्नी कविता को बेहद गंभीर और बेहोशी की हालत में जबलपुर के मिलिट्री अस्पताल लेकर पहुंचे थे. डॉक्टर के बंगले पर तैनात चौकीदार के बयान के मुताबिक, मेजर रात करीब 10 बजे ही घायल पत्नी को कार में लेकर घर से निकले थे, जबकि वे अस्पताल रात 1 बजे के आसपास पहुंचे.दक्षिणामूर्ति के एडवोकेट मनीष वर्मा ने इस पर बड़ा सवाल उठाया है कि जब घर से मिलिट्री अस्पताल की दूरी महज 5 मिनट की है, तो गंभीर रूप से घायल कविता को लेकर मेजर करीब तीन घंटे तक कहां घूमते रहे और अस्पताल पहुंचने में इतनी देरी क्यों हुई?

Major Om Nagarjun Dowry Case: चेन्नई के रहने वाले कारोबारी पी. दक्षिणामूर्ति का आरोप है कि उन्होंने दहेज में 3 करोड़ रुपये की कीमत के सामान दिए लेकिन मेजर उनकी बेटी से 2 करोड़ रुपये और लाने की बात कहते थे.
बीमारी की झूठी कहानी का आरोप
अस्पताल पहुंचने के बाद मेजर दामाद पर डॉक्टरों को गुमराह करने का भी आरोप है. कहा जा रहा है कि ओम नागार्जुन ने मिलिट्री अस्पताल के डॉक्टरों को बताया कि कविता के परिवार में पहले से ही दिल की बीमारी और डायबिटीज का इतिहास रहा है. इस जानकारी के आधार पर डॉक्टरों ने उसे कार्डियक अरेस्ट मानकर इलाज शुरू किया और कुछ ही देर में कविता कोमा में चली गई, जिसके बाद अगली सुबह उसकी मौत हो गई. सूचना मिलने पर गोराबाजार थाना पुलिस ने केवल मर्ग कायम कर शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजा. आरोप है कि वहां भी मेजर ने अपने डॉक्टर और सैन्य रसूख का इस्तेमाल कर डॉक्टरों को कार्डियक अरेस्ट की बात कही, जिसके आधार पर शुरुआती पोस्टमार्टम रिपोर्ट तैयार हुई.
इंसाफ के लिए कानूनी लड़ाई
पीड़ित पिता का कहना है कि वे पिछले एक साल से जबलपुर पुलिस से मामले की उच्च स्तरीय जांच और हत्या का मुकदमा दर्ज करने की गुहार लगा रहे हैं, लेकिन रसूख के कारण पुलिस ने कोई ठोस कार्रवाई नहीं की. इससे पहले उन्होंने प्रथम श्रेणी न्यायिक दंडाधिकारी (जेएमएफसी) की अदालत में परिवाद दाखिल किया था, लेकिन वहां से राहत नहीं मिलने के बाद अब उन्होंने जिला अदालत में रिवीजन याचिका दायर की है.
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