केंद्र सरकार परिसीमन बिल को पारित कराने की तैयारी में जुटी है. अब यह करीब-करीब तय हो गया है कि सरकार 17, 18 और 19 अगस्त को संसद का विशेष सत्र बुला सकती है. इसी सत्र में परिसीमन बिल को पारित कराया जा सकता है. इसी सिलसिले में संसदीय कार्यमंत्री किरेन रिजिजू ने लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी से मुलाकात की थी. इस मुलाकात में रिजिजू ने राहुल से सरकार के एजेंडा के बारे में जानकारी दी थी.
राहुल की दो शर्तें
राहुल गांधी ने संसदीय कार्यमंत्री को साफ कर दिया है पहले विपक्ष की जो दो मांगें हैं सरकार उस पर पहले अमल करे. राहुल ने रिजिजू से कहा कि सबसे पहले केंद्रीय गृह मंत्री जंतर-मंतर पर प्रदर्शनकारियों पर जो पेलेट गन और लाठीचार्ज हुआ उस पर सदन में बयान दें. दूसरा अयोध्या में राम मंदिर में चंदा चोरी पर सदन में बहस होनी चाहिए.
DMK का समर्थन पक्का!
जहां तक सरकार के परिसीमन बिल के लाने की बात है विपक्ष के नेता ने कहा कि वो अपनी बैठक में अन्य दलों से बात करने के बाद ही कुछ कह सकते हैं. सबसे महत्वपूर्ण बात ये है कि इस बिल का विरोध करने वाली डीएमके अब सरकार के साथ है और उनकी मांग है कि सरकार एक संशोधन के जरिए यह पक्का करे कि तमिलनाडु में भी सीटों की संख्या में 50 फीसदी की बढ़ोतरी हो. सरकार इसे यदि बिल का हिस्सा बना दे तो डीएमके को कोई आपत्ति नहीं है. सरकार इसके लिए राजी हो गई है.अब यह कहा जा रहा है डीएमके सरकार के पक्ष में वोट करेगी.
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शरद पवार का भी मिलेगा साथ
कुछ इसी तरह का आश्वासन एनसीपी शरद पवार की तरफ से सरकार को मिला है. उनकी भी मांग है कि 50 फीसदी सीटें बढ़ाने की बात बिल का हिस्सा हो यानी एनसीपी शरद पवार गुट के 8 सांसदों का भी समर्थन सरकार को मिलेगा. इंडिया गठबंधन ने भले ही एकजुट हो कर इस पर आधिकारिक रूप से अपनी कोई राय नहीं बनाई है मगर वो अभी इसका विरोध कर रहे हैं. समाजवादी पार्टी की सांसद डिंपल यादव ने एनडीटीवी से कहा कि परिसीमन बिल पर हमारा जो रूख पहले था वही अभी भी है यानी हम इसके खिलाफ हैं.
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क्या समाजवादी पार्टी देगी साथ?
मगर ऑफ कैमरा या निजी बातचीत में समाजवादी पार्टी के कई सांसद ये भी कहते हैं कि यूपी की सीट बढ़ने से तो हमें फायदा ही है. उन्होंने कहा कि हम तो डीएमके की वजह से पिछली बार इसका विरोध किए थे. कांग्रेस के भी कई सांसदों का कहना है कि परिसीमन जनसंख्या के आधार पर ना हो बल्कि हर राज्य की सीट 50 फीसदी बढ़ जाए तो उन्हें इस बिल पर कोई आपत्ति नहीं दिखती. अगर सरकार इस बिल में संशोधन लाती है और सभी राज्यों की सीटें 50 फीसदी समान रूप से बढ़े तो इसी आसानी से पास कराया जा सकता है. वैसे सरकार ने कुछ छोटी पार्टियों से भी बात कर रखी है कि ऐन मौके पर उनके सांसदों को वोटिंग के समय अनुपस्थित करा दिया जाए.
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