ब्राजील में आयोजित ब्राजील की विश्व चीज़ चैंपियनशिप 2026 में इस बार भारत ने ऐसा स्वाद पेश किया कि दुनिया को रुककर ध्यान देना पड़ा. इस प्रतियोगिता में चीज़ और डेयरी प्रोडक्ट्स को उनके स्वाद, टेक्सचर, खुशबू और क्वालिटी के आधार पर परखा जाता है. पहली ही बार इस प्रतियोगिता में उतरे भारतीय चीज़ मेकर्स ने सीधे 4 मेडल जीतकर सबको चौंका दिया. आमतौर पर यूरोपियन देशों का दबदबा रहने वाले इस मंच पर भारत के चीज़ ने पहली ही बार में जो दमखम दिखाया है, वो उम्मीद से भी बेहतर माना जा रहा है. सुपर गोल्ड से लेकर गोल्ड और सिल्वर तक, हर कैटेगरी में भारतीय प्रोडक्ट्स की मौजूदगी ने साफ कर दिया कि देश का पारंपरिक घरेलू डेयरी सेक्टर अब तेजी से ग्लोबल स्टैंडर्ड तक पहुंच रहा है और दुनिया भी इसे गंभीरता से लेने लगी है.
देसी चीज़ ने दी यूरोपीय बादशाहत को चुनौती
इस शानदार प्रदर्शन में ‘एलेफ़्थेरिया गुलमर्ग (Brie Style) सबसे आगे रहा, जिसने सुपर गोल्ड हासिल कर टॉप पोजिशन पर कब्जा जमा लिया. कश्मीर के गुलमर्ग नाम से प्रेरित यह चीज फ्रेंच ब्री स्टाइल में तैयार किया गया है और इसकी क्रीमी टेक्सचर व माइल्ड, बटर जैसा स्वाद जजेस को खूब पसंद आया.
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इसके अलावा 'याक चुरपी - सॉफ्ट' (Nordic Farm, Leh, Ladakh) ने गोल्ड मेडल जीता. यह लद्दाख में याक के दूध से बनने वाला खास चीज है, जो अपनी नेचुरल, हल्की खटास और यूनिक टेक्सचर के लिए जाना जाता है. वहीं एलेफ़्थेरिया ब्रूनोस्ट (Whey Cheese) ने भी गोल्ड हासिल किया. यह नॉर्वेजियन स्टाइल का व्हे चीज़ है, जिसका स्वाद हल्का मीठा, कैरामेल जैसा होता है और यह अपनी अलग फ्लेवर प्रोफाइल के कारण खास माना जाता है.
‘एलेफ्थेरिया काली मिरी (Belper Knolle Style)' को सिल्वर मेडल मिला. यह ब्लैक पेपर (काली मिर्च) से कोटेड चीज है, जो अपने स्ट्रॉन्ग, मसालेदार फ्लेवर और ग्रेनी टेक्सचर के लिए जाना जाता है.
कुल मिलाकर 1 सुपर गोल्ड, 2 गोल्ड और 1 सिल्वर के साथ इन भारतीय चीज़ ने न सिर्फ मेडल जीते, बल्कि अपने यूनिक स्वाद, लोकल इनग्रेडिएंट्स और इंटरनेशनल स्टाइल के कॉम्बिनेशन से यूरोपीय चीज़ की बादशाहत को सीधी चुनौती दे दी.
बड़े ब्रांड नहीं लोकल प्रोडक्ट्स ने किया कमाल
दिलचस्प यह है कि यह जीत सिर्फ बड़े शहरों या स्थापित ब्रांड्स की कहानी नहीं है. लद्दाख जैसे दूरदराज इलाके से आने वाला ‘Yak Churpi-Soft' इसका सबसे बड़ा उदाहरण है, जिसने दिखाया कि सीमित संसाधनों के बावजूद वर्ल्ड-क्लास क्वालिटी हासिल की जा सकती है. यही वह बदलाव है जो भारत के आर्टिजनल डेयरी सेक्टर को अलग पहचान दे रहा है.
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प्रधानमंत्री ने पीठ थपथपाई
इस कामयाबी को देशभर में और बड़ी चर्चा तब मिली, जब प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने खुद इस पर प्रतिक्रिया दी. अपने पोस्ट में उन्होंने विजेताओं को बधाई देते हुए कहा कि भारत का चीज़ अब वैश्विक मंच पर अपनी छाप छोड़ रहा है. उन्होंने खास तौर पर मौसम नारंग और थेनले नुरबू के प्रयासों की सराहना की, जिनकी मेहनत इस सफलता के पीछे रही. भारत में डेयरी सेक्टर अब तेजी से वैल्यू एडिशन की तरफ बढ़ रहा है.
लोकल मिल्क, पारंपरिक तकनीक और इंटरनेशनल स्टाइल का जो मिश्रण तैयार हो रहा है, वही भारतीय चीज़ को अलग पहचान दे रहा है. कुल मिलाकर, ब्राज़ील से आई यह सफलता एक नए दौर की शुरुआत जैसी है. अगर यही रफ्तार बनी रही, तो आने वाले समय में मेड इन इंडिया चीज़ न सिर्फ विदेशी बाजारों में जगह बनाएगा, बल्कि ग्लोबल टेस्ट को भी नया ट्विस्ट देगा.
कैसे बनता है चीज़?
चीज को दूध से तैयार किया जाता है. दूध में खास तरह का एक बैक्टीरिया और एंजाइम मिलाए जाते हैं. जिससे दूध जम जाता है और पानी इससे अलग हो जाता है. सबसे पहले दूध को गर्म करें. इसके बाद इसमें रेनेट (Rennet) या कोई एसिड मिलाया जाता है जिससे दूध फटकर गाढ़ा हो जाता है. इसके बाद उस ठोस हिस्से से पानी यानी व्हे अलग कर दिया जाता है. बचे हुए ठोस पार्ट को दबाकर और प्रोसेस कर के चीज को तैयार किया जाता है. बता दें कि दुनियाभर में कई तरह की चीज मिलती हैं चेडर, मोजरेला, पार्मेजन जैसी सैकड़ों चीज मार्केट में मिलती हैं.
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(अस्वीकरण: सलाह सहित यह सामग्री केवल सामान्य जानकारी प्रदान करती है. यह किसी भी तरह से योग्य चिकित्सा राय का विकल्प नहीं है. अधिक जानकारी के लिए हमेशा किसी विशेषज्ञ या अपने चिकित्सक से परामर्श करें. एनडीटीवी इस जानकारी के लिए ज़िम्मेदारी का दावा नहीं करता है.)
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