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This Article is From Nov 24, 2016

सर्दियों के मौसम में इस तरह बच्चे को निमोनिया से बचाएं

सर्दियों के मौसम में इस तरह बच्चे को निमोनिया से बचाएं
  • देश में करीब 4.30 करोड़ लोग निमोनिया से पीड़ित हैं
  • आम फ्लू, छाती के संक्रमण और लागातार खासी इसके लक्षण हैं।
  • बच्चों को स्वस्थ रखें और समय पर टीका लगवाएं।
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नई दिल्ली: बदलता मौसम कई लोगों को बीमारियों की चपेट में ले लेता है। इसमें से एक है निमोनिया, जो अकसर लोगों को हो जाता है। क्या आप जानते हैं कि देश में करीब 4.30 करोड़ लोग निमोनिया से पीड़ित हैं, जिसकी रोकथाम और जांच के बारे में ख़ासकर सर्दियों में जागरूकता फैलाना बेहद आवश्यक है। इसका एक कारण यह भी है कि आम फ्लू, छाती के संक्रमण और लागातार खासी के लक्षण इससे मेल खाते हैं।

आईएमए के नवनिर्वाचित अध्यक्ष एवं एचसीएफआई के अध्यक्ष डॉ. के. के. अग्रवाल का कहना है कि “छोटे बच्चे, नवजातों और प्रीमेच्योर बच्चे, जिनकी उम्र 24 से 59 महीने है और फेफड़े पूरी तरह विकसित नहीं हैं, हवा नली तंग है, कमजोर पौष्टिकता और रोगप्रतिरोधक प्रणाली वाले बच्चों को निमोनिया होने का ज़्यादा ख़तरा होता है। अस्वस्थ व गंदा वातावरण, कुपोषण और स्तनपान की कमी की वज़ह से निमोनिया से पीड़ित बच्चों की मौत हो सकती है। इस बारे में लोगों को जागरूक करना बेहद आवश्यक है। कई बच्चों की जान बचाई जा सकती है और यह चिकित्सकों का फर्ज है कि वे नई माओं को अपने बच्चों को स्वस्थ रखने एवं सही समय पर टीके लगवाने के प्रति शिक्षित करें”।

अग्रवाल ने कहा कि “निमोनिया कई तरीकों से फैल सकता है। वायरस और बैक्टीरिया अकसर बच्चों के नाक या गले में पाए जाते हैं और अगर वे सांस से अंदर चले जाएं तो फेफड़ों में जा सकते हैं। वह खांसी या छींक की बूंदों से हवा नली के जरिए भी फैल सकते हैं। इसके साथ ही जन्म के समय या उसके तुरंत बाद रक्त के जरिए भी यह फैल सकता है”। उन्होंने कहा कि उचित पौष्टिक आहार और पर्यावरण की स्वच्छता के जरिए निमोनिया को रोका जा सकता है। निमोनिया के बैक्टीरिया का इलाज एंटीबायटिक से हो सकता है, लेकिन केवल एक-तिहाई बच्चों को ही एंटीबायोटिक्स मिल पा रहे हैं। इसलिए ज़रूरी है कि सर्दियों में बच्चों को गर्म रखा जाए, धूप लगवाई जाए और खुले हवादार कमरों में रखा जाए।

डब्ल्यूएचओ की हालिया रपट के मुताबिक, स्ट्रेप्टोकोक्स निमोनिया पांच साल से छोटी उम्र के बच्चों के अस्पताल में भर्ती होने व मृत्यु होने का प्रमुख कारण है। डब्लयूएचओ के आंकड़ों के मुताबिक पांच साल से छोटी उम्र के 1,20,000 बच्चों की मौत निमोनिया की वज़ह से होती है और भारत में हर एक मिनट पर एक बच्चे की निमोनिया की वज़ह से मौत हो जाती है।

(इस खबर को एनडीटीवी टीम ने संपादित नहीं किया है. यह सिंडीकेट फीड से सीधे प्रकाशित की गई है।)

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