सुबह उठते ही सबसे पहले जिसकी याद आती है, वो है एक कप चाय. एक अच्छी चाय के लिए जरूरी है सही तरीके से उबला हुआ दूध. हममें से ज्यादातर लोग बिना सोचे-समझे घर में जो बर्तन सामने आया, उसी में दूध गैस पर रख देते हैं. कभी कुकर, कभी एल्युमिनियम का पतीला या फिर कोई पुरानी कढ़ाई. पर क्या आप जानते हैं कि दूध उबालने का भी एक सही तरीका होता है और गलत बर्तन चुनने से दूध न सिर्फ फट सकता है, बल्कि उसकी सेहत से जुड़ी खूबियां भी कम हो सकती हैं?
किस बर्तन में उबालें दूध?
स्टील के बर्तन:
आजकल ज्यादातर घरों में स्टेनलेस स्टील के भगोने इस्तेमाल होते हैं. यह दूध उबालने के लिए सबसे सेफ और बढ़िया माने जाते हैं. स्टील में कोई ऐसा हानिकारक केमिकल नहीं होता जो गर्म दूध के साथ मिलकर पेट में जाए. बस इस बात का ध्यान रखें कि स्टील का बर्तन नीचे से मोटा होना चाहिए, वरना हल्का स्टील होने पर दूध फिर से चिपक जाएगा.
मिट्टी के बर्तन:
अगर आपको असली मिट्टी की खुशबू और पारंपरिक स्वाद पसंद है, तो मिट्टी के बर्तन से बेहतर कुछ नहीं है. मिट्टी के बर्तन में दूध धीमी आंच पर पकता है जिससे उसका पानी धीरे-धीरे कम होता है और दूध गाढ़ा व मलाईदार बनता है. इसमें कैल्शियम और मैग्नीशियम जैसे पोषक तत्व भी बने रहते हैं. हालांकि, इनकी देखभाल थोड़ी मुश्किल होती है और इन्हें तेज आंच पर सीधे नहीं रख सकते.
पीतल और कांसा:
पुराने जमाने में हमारे बुजुर्ग पीतल या कांसे के बर्तनों का ही इस्तेमाल करते थे. पीतल के बर्तन में दूध उबालना सेहत के लिए बहुत फायदेमंद माना जाता है, लेकिन एक जरूरी नियम यह है कि पीतल के बर्तन अंदर से कलई किए हुए होने चाहिए, वरना खट्टापन या दूध की तासीर से रिएक्शन हो सकता है. आजकल ये बर्तन आम रसोई से गायब हो गए हैं, लेकिन सेहत के लिहाज से यह आज भी बेहतरीन हैं.
किन बर्तनों में दूध बिल्कुल न उबालें?
एल्युमिनियम बहुत नरम धातु है और लगातार गर्म होने पर इसके तत्व दूध में घुल सकते हैं जो सेहत को नुकसान पहुंचाते हैं. वहीं, नॉन-स्टिक बर्तनों की कोटिंग तेज आंच और लगातार दूध उबालने से खराब होने लगती है, जो शरीर के लिए बिल्कुल ठीक नहीं है.
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