कुकर चढ़ाते ही जब दाल का पानी सीटी के साथ बाहर छिटकने लगता है, तो गुस्सा आना लाजमी है. ढक्कन तो गंदा होता ही है, साथ ही पूरा गैस बर्नर भी भर जाता है. फिर खाना बनाने से ज्यादा समय तो स्लैब और कुकर को रगड़-रगड़कर साफ करने में निकल जाता है. अक्सर हम सोचते हैं कि पानी ज्यादा डाल दिया होगा या आंच तेज होगी, पर हर बार बात सिर्फ पानी की नहीं होती.
दाल का पानी बार-बार बाहर क्यों आता है?
जब दाल उबलती है, तो उसमें मौजूद प्रोटीन और स्टार्च पानी के साथ मिलकर एक झाग बना लेते हैं. जैसे-जैसे अंदर भाप का प्रेशर बनता है, यह झाग सीटी वाले छेद की तरफ भागता है. प्रेशर इतना ज्यादा होता है कि यह झाग ढक्कन के किनारों और सीटी से बाहर फेंक दिया जाता है.
इस झंझट से बचने का देसी जुगाड़
अगर आप चाहते हैं कि कुकर के आसपास एक बूंद भी पानी न गिरे, तो दाल चढ़ाते समय यह छोटी सी ट्रिक आजमाकर देखें,
स्टील की कटोरी:
दाल, पानी और हल्दी-नमक डालने के बाद कुकर के ठीक बीचों-बीच एक छोटी साफ स्टील की कटोरी रख दें. जब दाल उबलकर ऊपर उठेगी, तो झाग सीधा सीटी तक जाने के बजाय पहले इस कटोरी से टकराएगा. टकराते ही झाग का प्रेशर टूट जाएगा और पानी वापस नीचे बैठ जाएगा. कटोरी डालने के बाद कुकर का ढक्कन आराम से बंद कर दें और जैसे पकाते हैं, वैसे ही पकने दें.
एक चम्मच तेल या घी:
दाल उबलने के लिए रखते समय उसमें आधा चम्मच सरसों का तेल या देसी घी डाल दें. तेल पानी की ऊपरी सतह पर एक पतली लेयर बना देता है, जिससे झाग बनता ही नहीं है.
झाग पहले ही निकाल लें:
अगर थोड़ा टाइम हो, तो कुकर बंद करने से पहले दाल को बिना ढक्कन के एक उबाल आने दें. ऊपर जो सफेद झाग जमा हो, उसे चम्मच से निकालकर फेंक दें, फिर ढक्कन लगाएं, सेहत के लिहाज से भी यह बहुत बढ़िया रहता है.
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