Sankranti Food Mistakes: मकर संक्रांति भारत के उन त्योहारों में से एक है, जो सिर्फ धार्मिक महत्व ही नहीं रखता, बल्कि सेहत के लिहाज से भी बेहद खास माना जाता है. यह पर्व सर्दियों के आखिरी चरण में आता है, जब सूर्य उत्तरायण होता है और शरीर धीरे-धीरे मौसम के बदलाव की ओर बढ़ता है. हमारे पूर्वजों ने इस समय खाने-पीने के नियम बहुत सोच-समझकर बनाए थे, ताकि शरीर ठंड से निकलकर गर्मी के मौसम के लिए खुद को तैयार कर सके.
लेकिन, आज की तेज रफ्तार जिंदगी और मॉडर्न फूड हैबिट्स के चलते नई पीढ़ी कई ऐसे फूड कॉम्बिनेशन अपना रही है, जो दिखने में तो स्वादिष्ट लगते हैं, लेकिन सेहत के लिए नुकसानदायक हो सकते हैं. मकर संक्रांति जैसे पर्व पर अगर पारंपरिक भोजन को गलत तरीके से खाया जाए, तो पेट की समस्या, गैस, एसिडिटी और सुस्ती जैसी दिक्कतें हो सकती हैं.
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आइए जानते हैं मकर संक्रांति पर खाए जाने वाले 3 ऐसे फूड कॉम्बिनेशन, जिन्हें आज की पीढ़ी अक्सर गलत तरीके से खा रही है:
1. तिल-गुड़ के साथ ठंडा दूध या कोल्ड ड्रिंक
मकर संक्रांति पर तिल और गुड़ का सेवन बेहद शुभ और फायदेमंद माना जाता है. तिल की तासीर बहुत गर्म होती है और गुड़ उसे संतुलित करता है. लेकिन, आजकल कई लोग तिल-गुड़ के लड्डू या चक्की खाने के तुरंत बाद ठंडा दूध, आइसक्रीम या कोल्ड ड्रिंक ले लेते हैं.
यह कॉम्बिनेशन शरीर के तापमान को अचानक बदल देता है. इससे पाचन कमजोर हो सकता है, गले में खराश, पेट दर्द या सर्दी-जुकाम की समस्या बढ़ सकती है. सही तरीका यह है कि तिल-गुड़ खाने के बाद गुनगुना पानी या हल्की हर्बल चाय ली जाए.
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2. खिचड़ी के साथ दही या ठंडी छाछ
मकर संक्रांति पर खिचड़ी खाने की परंपरा खासतौर पर उत्तर भारत में बहुत पुरानी है. दाल और चावल से बनी खिचड़ी शरीर को एनर्जी देती है और पचाने में आसान होती है. लेकिन, आज की पीढ़ी इसमें नया ट्विस्ट लाते हुए खिचड़ी के साथ दही या ठंडी छाछ लेना शुरू कर देती है.
सर्दियों के मौसम में यह कॉम्बिनेशन पाचन के लिए सही नहीं माना जाता. खिचड़ी गर्म तासीर वाला भोजन है, जबकि दही ठंडी तासीर का होता है. दोनों साथ लेने से गैस, ब्लोटिंग और अपच की समस्या हो सकती है. बेहतर है कि खिचड़ी के साथ घी, हल्की सब्ज़ी या ताजा अदरक का अचार लिया जाए.

Photo Credit: iStock
3. तिल की मिठाइयों के साथ ज्यादा तली-भुनी चीजें
मकर संक्रांति पर घर-घर में तिल के लड्डू, रेवड़ी और चक्की बनती हैं. लेकिन, आजकल लोग इन्हें खाने के साथ ही पकौड़े, समोसे, भुजिया जैसे तले हुए स्नैक्स भी जोड़ लेते हैं.
यह कॉम्बिनेशन शरीर पर बहुत ज़्यादा भारी पड़ सकता है. तिल में पहले से ही फैट और गर्माहट होती है और तली चीजें इसे और बढ़ा देती हैं. इससे लिवर पर दबाव पड़ता है, सुस्ती आती है और पाचन बिगड़ सकता है. सही तरीका यह है कि तिल की मिठाइयों को सीमित मात्रा में खाया जाए और साथ में हल्का, सादा भोजन रखा जाए.
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परंपरा के पीछे छिपा है सेहत का विज्ञान:
हमारे त्योहारों की सबसे बड़ी खूबी यही है कि वे मौसम और शरीर की जरूरतों के अनुसार बनाए गए हैं. मकर संक्रांति पर तिल, गुड़, घी और दाल-चावल का सेवन इसलिए बताया गया, ताकि शरीर को गर्माहट, एनर्जी और संतुलन मिल सके. लेकिन, जब इन्हें गलत फूड कॉम्बिनेशन के साथ खाया जाता है, तो फायदा नुकसान में बदल सकता है.
क्या करें, क्या न करें?
- तिल-गुड़ हमेशा गुनगुने या सामान्य तापमान वाले फूड के साथ लें.
- बहुत ज्यादा तला-भुना खाने से बचें.
- ठंडे और गर्म फूड को एक साथ लेने से बचें.
- मात्रा और समय का ध्यान रखें.
मकर संक्रांति सिर्फ पतंग उड़ाने और मिठाई खाने का त्योहार नहीं है, बल्कि यह हमें शरीर के साथ तालमेल बिठाकर खाने की सीख देता है.
(अस्वीकरण: सलाह सहित यह सामग्री केवल सामान्य जानकारी प्रदान करती है. यह किसी भी तरह से योग्य चिकित्सा राय का विकल्प नहीं है. अधिक जानकारी के लिए हमेशा किसी विशेषज्ञ या अपने चिकित्सक से परामर्श करें. एनडीटीवी इस जानकारी के लिए ज़िम्मेदारी का दावा नहीं करता है.)
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