मुंबई:
लेखक-गीतकार प्रसून जोशी का मानना है कि बच्चे अगर पर्यावरण को बचाने के लिए आगे आएं, तो वे बड़ा परिवर्तन ला सकते हैं।
विश्व पर्यावरण दिवस पर मंगलवार को एक विशेष गीत 'हमको है आशा' जारी होने के मौके पर 40 वर्षीय प्रसून ने कहा, "वयस्क इसे नहीं सुनेंगे, वे नहीं समझेंगे कि पृथ्वी को भी परवरिश की जरूरत है और हमें इसकी देखभाल करनी चाहिए। इसलिए यह संदेश बच्चों के माध्यम से भेजा जा सकता है। असल में यह गीत ग्रीन पीस संस्था के लिए बनाया गया है।"
गीत में बच्चों से धरती मां के प्रति उनकी जिम्मेदारी के बारे में पूछा गया है। "गीत का संदेश बहुत अच्छा हैं, बच्चे कह रहे हैं कि अगर आप इस दुनिया को नहीं सम्भाल सकते, तो इसे हमें दे दो।"
शंकर-एहसान-लॉय की संगीतकार तिकड़ी में से शंकर महादेवन ने इसका संगीत तैयार किया है। शंकर को उम्मीद है कि उनके प्रयास संदेश को फैलाने में मदद करेंगे।
"संगीत एक शक्तिशाली माध्यम है और काफी सारी भावनाओं को व्यक्त करता है, इसलिए हमने इसका उपयोग किया।"
विश्व पर्यावरण दिवस पर मंगलवार को एक विशेष गीत 'हमको है आशा' जारी होने के मौके पर 40 वर्षीय प्रसून ने कहा, "वयस्क इसे नहीं सुनेंगे, वे नहीं समझेंगे कि पृथ्वी को भी परवरिश की जरूरत है और हमें इसकी देखभाल करनी चाहिए। इसलिए यह संदेश बच्चों के माध्यम से भेजा जा सकता है। असल में यह गीत ग्रीन पीस संस्था के लिए बनाया गया है।"
गीत में बच्चों से धरती मां के प्रति उनकी जिम्मेदारी के बारे में पूछा गया है। "गीत का संदेश बहुत अच्छा हैं, बच्चे कह रहे हैं कि अगर आप इस दुनिया को नहीं सम्भाल सकते, तो इसे हमें दे दो।"
शंकर-एहसान-लॉय की संगीतकार तिकड़ी में से शंकर महादेवन ने इसका संगीत तैयार किया है। शंकर को उम्मीद है कि उनके प्रयास संदेश को फैलाने में मदद करेंगे।
"संगीत एक शक्तिशाली माध्यम है और काफी सारी भावनाओं को व्यक्त करता है, इसलिए हमने इसका उपयोग किया।"
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