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रविवार को सूर्यदेव को जल अर्पित करना क्यों होता है शुभ? पंडित जी ने बताया किस मंत्र का करें जाप

सूर्यदेव को प्रसन्न करने के लिए जल अर्पित करना बेहद लाभकारी माना जाता है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार सूर्यदेव की पूजा करने से व्यक्ति को जीवन में तेज, आरोग्य और मान-सम्मान की प्राप्ति होती है.

रविवार को सूर्यदेव को जल अर्पित करना क्यों होता है शुभ? पंडित जी ने बताया किस मंत्र का करें जाप
सूर्यदेव को जल अर्पित करने से क्या होता है?
Photo Credit: सोशल मीडिया

हिन्दू धर्म में सप्ताह के सातों दिन किसी न किसी देवी-देवता को समर्पित होते हैं. इसी तरह रविवार का दिन सूर्यदेव को समर्पित माना जाता है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस दिन सूर्यदेव की पूजा करने से व्यक्ति को तेज, आरोग्य और मान-सम्मान की प्राप्ति होती है. साथ ही जिस व्यक्ति की कुंडली में सूर्य मजबूत होता है, उसका आत्मविश्वास बढ़ता है और करियर में भी अपार सफलताएं हासिल होती हैं. सूर्यदेव को प्रसन्न करने के लिए रविवार को जल अर्पित करना शुभ माना जाता है. इसी कड़ी में आज हम आपको बताने जा रहे हैं कि सूर्यदेव को जल अर्पित करने से क्या होता है और कौन से मंत्र का जाप करना चाहिए. इसकी जानकारी आचार्य मदनमोहन ने NDTV से बातचीत के दौरान दी है.

सूर्यदेव को जल अर्पित करने से क्या होता है?

आचार्य मदनमोहन बताते हैं कि रविवार का दिन भगवान सूर्य को समर्पित माना जाता है. हमारे प्राचीन शास्त्रों में बताया गया है कि सूर्य भगवान की कृपा से ही हमें प्रकाश मिलता है और पूरा संसार चलता है. अगर सूर्य भगवान दर्शन न दें, तो सुबह ही नहीं हो सकती. उनकी किरणों से हमारे शरीर को ऊर्जा मिलती है और हमारे चेहरे पर जो चमक होती है, वह भी उन्हीं की कृपा से होती है. जब सूर्य भगवान हमें इतना सब कुछ देते हैं, तो हमें भी उनका आभार जताना चाहिए. उनकी महिमा बहुत बड़ी है, जिसे पूरी तरह बताया नहीं जा सकता. सूर्य भगवान हर दिन समय पर बिना बुलाए आकर हमें लाभ देते हैं, इसलिए हमें प्रतिदिन सुबह उन्हें जल अर्पित करना चाहिए. ऐसा करने से आंखों की रोशनी बढ़ती है, मन और जीवन में शांति मिलती है और सुख-समृद्धि आती है. 

जल अर्पित करते समय करें इस मंत्र का जाप

आचार्य मदनमोहन बताते हैं कि रविवार समेत सभी सातों दिन ‘ॐ घृणि सूर्याय नमः' मंत्र के साथ सूर्य भगवान को जल जरूर अर्पित करना चाहिए.

रविवार को करें सूर्य देव की आरती

ॐ जय सूर्य भगवान, जय हो दिनकर भगवान।
जगत् के नेत्रस्वरूपा, तुम हो त्रिगुण स्वरूपा।
धरत सब ही तव ध्यान, ॐ जय सूर्य भगवान।।
।।ॐ जय सूर्य भगवान..।।

सारथी अरुण हैं प्रभु तुम, श्वेत कमलधारी। तुम चार भुजाधारी।।
अश्व हैं सात तुम्हारे, कोटि किरण पसारे। तुम हो देव महान।।
।।ॐ जय सूर्य भगवान..।।

ऊषाकाल में जब तुम, उदयाचल आते। सब तब दर्शन पाते।।
फैलाते उजियारा, जागता तब जग सारा। करे सब तब गुणगान।।
।।ॐ जय सूर्य भगवान..।।

संध्या में भुवनेश्वर अस्ताचल जाते। गोधन तब घर आते।।
गोधूलि बेला में, हर घर हर आंगन में। हो तव महिमा गान।।
।।ॐ जय सूर्य भगवान..।।

देव-दनुज नर-नारी, ऋषि-मुनिवर भजते। आदित्य हृदय जपते।।
स्तोत्र ये मंगलकारी, इसकी है रचना न्यारी। दे नव जीवनदान।।
।।ॐ जय सूर्य भगवान..।।

तुम हो त्रिकाल रचयिता, तुम जग के आधार। महिमा तब अपरम्पार।।
प्राणों का सिंचन करके भक्तों को अपने देते। बल, बुद्धि और ज्ञान।।
।।ॐ जय सूर्य भगवान..।।

भूचर जलचर खेचर, सबके हों प्राण तुम्हीं। सब जीवों के प्राण तुम्हीं।।
वेद-पुराण बखाने, धर्म सभी तुम्हें माने। तुम ही सर्वशक्तिमान।।
।।ॐ जय सूर्य भगवान..।।

पूजन करतीं दिशाएं, पूजे दश दिक्पाल। तुम भुवनों के प्रतिपाल।।
ऋतुएं तुम्हारी दासी, तुम शाश्वत अविनाशी। शुभकारी अंशुमान।।
।।ॐ जय सूर्य भगवान..।।

ॐ जय सूर्य भगवान, जय हो दिनकर भगवान।
जगत् के नेत्रस्वरूपा, तुम हो त्रिगुण स्वरूपा।स्वरूपा।।
धरत सब ही तव ध्यान,
।।ॐ जय सूर्य भगवान।।

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