भगवान शिव की पूजा के लिए सोमवार को सबसे शुभ दिन माना जाता है. इस दिन लाखों श्रद्धालु शिवलिंग पर जल और बेलपत्र चढ़ाते हैं, व्रत रखते हैं और भोलेनाथ का आशीर्वाद मांगते हैं. लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि हफ्ते के सात दिनों में सिर्फ सोमवार ही भगवान शिव को क्यों समर्पित है. इसके पीछे एक रोचक पौराणिक कथा बताई जाती है. आइए ज्योतिषाचार्य पंडित कौशल पांडेय से जानते हैं पौराणिक रहस्य...
क्या है सोमवार का पौराणिक रहस्य?
ज्योतिषाचार्य पंडित कौशल पांडेय के अनुसार, पौराणिक मान्यताओं में चंद्रदेव ने राजा दक्ष की 27 बेटियों से विवाह किया था. लेकिन विवाह के बाद वे रोहिणी से अधिक प्रेम करने लगे और बाकी पत्नियों की उपेक्षा करने लगे. इससे दुखी होकर उनकी बहनों ने अपने पिता राजा दक्ष से शिकायत कर दी.
राजा दक्ष ने दिया था शाप
पंडित कौशल पांडेय ने आगे बताया कि जब राजा दक्ष ने चंद्रदेव को समझाने की कोशिश की और वे नहीं माने, तो उन्होंने उन्हें शाप दे दिया. इस शाप के कारण चंद्रदेव का तेज और उनका आकार धीरे-धीरे कम होने लगा. वे चिंता में पड़ गए और समाधान की तलाश करने लगे.
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भगवान शिव ने दूर किया संकट
पंडित ने बताया कि ऐसी मान्यता है कि ब्रह्माजी की सलाह पर चंद्रदेव ने भगवान शिव की कठोर तपस्या की. उनकी भक्ति से प्रसन्न होकर शिवजी ने चंद्रदेव को फिर से तेज प्रदान किया. हालांकि शाप पूरी तरह समाप्त नहीं हुआ, इसलिए चंद्रमा आज भी घटता और बढ़ता है.
इसलिए सोमवार को होती है शिव पूजा
उन्होंने बताया कि कहा जाता है कि चंद्रदेव, जिन्हें 'सोम' भी कहा जाता है वह भगवान शिव की कृपा से संकट से उबरे थे. इसी कारण शिवजी को 'सोमनाथ' और 'सोमेश्वर' जैसे नाम मिले और सोमवार का दिन उनकी पूजा के लिए विशेष माना जाने लगा. धार्मिक मान्यता है कि इस दिन श्रद्धा से शिव आराधना करने से मनोकामनाएं पूरी होती हैं और ग्रह दोषों का प्रभाव कम हो सकता है.
(Disclaimer: यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. एनडीटीवी इसकी पुष्टि नहीं करता है.)
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