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जून में कब है कालाष्टमी व्रत? जानिए तिथि, पूजा का शुभ मुहूर्त और महत्व

कालाष्टमी भगवान काल भैरव की पूजा का विशेष दिन माना जाता है. इस पावन दिन भक्त सूर्योदय से सूर्यास्त तक व्रत रखते हैं और पूरी श्रद्धा व विश्वास के साथ भगवान काल भैरव की पूजा करते हैं.

जून में कब है कालाष्टमी व्रत? जानिए तिथि, पूजा का शुभ मुहूर्त और महत्व
कालाष्टमी व्रत
file photo

कालाष्टमी हिंदू धर्म का एक बहुत महत्वपूर्ण दिन माना जाता है. यह दिन पूरी तरह से भगवान काल भैरव को समर्पित होता है, जो भगवान शिव का अति उग्र रूप हैं. इस पावन दिन श्रद्धालु सुबह से शाम तक व्रत रखते हैं और सच्चे मन से भगवान काल भैरव की पूजा करते हैं. कालाष्टमी के दिन भक्त भगवान को प्रसन्न करने के लिए पूजा‑पाठ, मंत्र जाप और अन्य धार्मिक‑आध्यात्मिक कार्य करते हैं. कालाष्टमी हर महीने कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को मनाई जाती है.

जून कालाष्टमी व्रत 2026

  • अष्टमी तिथि की शुरू- 8 जून, सोमवार को सुबह 3 बजकर 24 मिनट पर
  • समापन- 9 जून, मंगलवार को सुबह 3 बजकर 23 मिनट पर
  • कालाष्टमी का व्रत 8 जून को रखा जाएगा

कालाष्टमी 2026 का महत्व

कालाष्टमी भगवान काल भैरव की पूजा का विशेष दिन माना जाता है. यह व्रत हर महीने कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को आता है. इस पावन दिन भक्त सूर्योदय से सूर्यास्त तक व्रत रखते हैं और पूरी श्रद्धा व विश्वास के साथ भगवान काल भैरव की पूजा करते हैं. धार्मिक ग्रंथों के अनुसार, जो लोग सच्चे मन से भगवान काल भैरव की आराधना करते हैं, उनकी मनोकामनाएं पूरी होती हैं. भगवान काल भैरव अपने भक्तों के जीवन से नकारात्मक ऊर्जा, डर और चिंता, बाधाएं और परेशानियां दूर करते हैं. काल भैरव को काल के रक्षक माना गया है. ऐसी मान्यता है कि उनकी पूजा से भक्तों को अकाल मृत्यु से रक्षा मिलती है और जीवन में सुरक्षा व स्थिरता बनी रहती है.

कालाष्टमी पूजा विधि

  • सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और काल भैरव के सामने व्रत का संकल्प लें.
  • शाम को या रात में घर के मंदिर में या मंदिर जाकर भगवान भैरव की फोटो/मूर्ति को स्थापित करें.
  • उन्हें गंगाजल, दूध, दही, शहद और घी से अभिषेक कराएं.
  • कुंकुम, चंदन, काले तिल, फूल, और इमरती या जलेबी का भोग लगाएं.
  • सरसों के तेल का दीपक जलाएं.
  • भैरव चालीसा का पाठ करें और अंत में आरती उतारें

काल भैरव मंत्र

ॐ कालकालाय विद्महे, तन्नो काल भैरवः प्रचोदयात्॥
ॐ ह्रीं बटुकाय आपदुद्धारणाय कुरु कुरु बटुकाय ह्रीं॥
ॐ ह्रीं ह्रीं ह्रीं ह्रीं ह्रीं क्षेम् क्षेत्रपालाय कालभैरवाय नमः॥

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