आज यानी 7 जुलाई को कालाष्टमी का व्रत रखा जा रहा है. वैदिक पंचांग के अनुसार हर माह के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को कालाष्टमी का व्रत रखा जाता है. इस दिन भगवान शिव के रौद्र और उग्र अवतार काल भैरव की पूजा की जाती है. इसके साथ ही इस दिन भगवान शिव और माता पार्वती की भी आराधना की जाती है. इस दिन काल भैरव के साथ उनके वाहन काले कुत्ते को भोजन कराना अत्यंत शुभ माना जाता है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार काल भैरव की पूजा करने से व्यक्ति जीवन के कष्ट दूर होते हैं और हर क्षेत्र में सफलता प्राप्त होती है. इसी कड़ी में आज हम आपको कालाष्टमी की तिथि, पूजा विधि और महत्व बताने जा रहे हैं.
कालाष्टमी की तिथि
वैदिक पंचांग के अनुसार आषाढ़ मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि की शुरुआत 7 जुलाई 2026 को 1 बजकर 24 मिनट पर होगा. वहीं, इसका समापन 8 जुलाई 2026 को 12 बजकर 21 मिनट पर होगा. ऐसे में कालाष्टमी का व्रत 7 जुलाई, दिन मंगलवार को ही रखा जाएगा.
कालाष्टमी की पूजा विधि
- कालाष्टमी पर सूर्योदय से पहले उठें और स्नान कर स्वच्छ कपड़े पहनें.
- इसके बाद कालाष्टमी की पूजा और व्रत को विधि-विधान से करने का संकल्प लें.
- फिर अपने पूजा घर में या फिर किसी भैरव मंदिर में जाकर भगवान भैरव का दर्शन करें.
- इसके बाद भगवान भैरव के चित्र या मूर्ति पर शुद्ध जल छिड़कें.
- उन्हें पुष्प, चंदन, धूप, दीप, सरसों का तेल, इमरती का भोग अर्पित करें.
- भगवान भैरव की पूजा में पावन कथा पाठ और सबसे अंत में आरती अवश्य करना चाहिए.
कालाष्टमी का महत्व
इस दिन काल भैरव की पूजा करने से मनोकामनाएं पूरी होती हैं. भगवान भैरव भक्तों के जीवन से डर, चिंता और नकारात्मकता दूर करते हैं. माना जाता है कि उनकी पूजा से संकट और बाधाएं दूर होती हैं. काल भैरव को समय के रक्षक भी कहा जाता है, उनकी पूजा से सुरक्षा और स्थिरता मिलती है.
Disclaimer: यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. एनडीटीवी इसकी पुष्टि नहीं करता है.
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