सनातन धर्म में नवरात्रि के पर्व का खास महत्व है. नवरात्रि के 9 दिन मां दुर्गा के 9 स्वरूपों की साधना के लिए समर्पित माने जाते हैं. साल में चार बार नवरात्रि आती हैं- आश्विन मास (अक्टूबर) में शारदीय नवरात्रि, माघ मास (जनवरी-फरवरी) में माघी नवरात्रि, वासंतिक (अप्रैल) में चैत्र नवरात्रि और आषाढ़ मास (जुलाई) में ग्रीष्म-गुप्त नवरात्रि. इनमें चैत्र और शारदीय नवरात्रि सार्वजनिक रूप से अधिक प्रसिद्ध हैं, जबकि आषाढ़ और माघ की नवरात्रि को गुप्त साधना के लिए विशेष माना जाता है.
पंडित कौशल पाण्डेय बताते हैं, आषाढ़ मास की गुप्त नवरात्रि शक्ति उपासना, तंत्र साधना और मां आदिशक्ति की आराधना का विशेष पर्व माना जाता है. इन नौ दिनों में सामान्य रूप से मां दुर्गा के नौ स्वरूपों के साथ-साथ दस महाविद्याओं की साधना का भी विशेष महत्व बताया गया है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, गुप्त नवरात्रि के दौरान की गई श्रद्धापूर्वक पूजा, मंत्र जाप, दुर्गा सप्तशती का पाठ और देवी साधना से साधक को विशेष आध्यात्मिक फल प्राप्त होता है.
आषाढ़ गुप्त नवरात्रि 2026 कब से शुरू होगी?
पंडित कौशल पाण्डेय बताते हैं, वर्ष 2026 में आषाढ़ गुप्त नवरात्रि 15 जुलाई (बुधवार) से प्रारंभ होगी और 23 जुलाई (गुरुवार) को नवमी के साथ इसका समापन होगा.
आषाढ़ गुप्त नवरात्रि 2026 की प्रमुख तिथियां- 15 जुलाई (बुधवार) प्रतिपदा, घटस्थापना और नवरात्रि आरंभ
- 16 जुलाई (गुरुवार)- द्वितीया
- 17 जुलाई (शुक्रवार)- तृतीया
- 18 जुलाई (शनिवार)- चतुर्थी
- 19 जुलाई (रविवार)- पंचमी
- 20 जुलाई (सोमवार)- षष्ठी
- 21 जुलाई (मंगलवार)- सप्तमी
- 22 जुलाई (बुधवार)- अष्टमी
- 23 जुलाई (गुरुवार)- नवमी, कन्या पूजन और व्रत समापन
देवी भागवत और अन्य धार्मिक ग्रंथों के अनुसार, गुप्त नवरात्रि शक्ति साधना का विशेष काल माना गया है. मान्यता है कि इन दिनों साधना करने से मानसिक शक्ति, आध्यात्मिक उन्नति, बाधाओं से मुक्ति और देवी कृपा की प्राप्ति होती है.
गुप्त नवरात्रि में होती है दस महाविद्याओं की पूजापंडितजी आगे बताते हैं, सामान्य नवरात्रि में जहां मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की पूजा की जाती है, वहीं गुप्त नवरात्रि में दस महाविद्याओंकी साधना का विशेष महत्व बताया गया है.
ये दस महाविद्याएं हैं-
- मां काली
- मां तारा
- मां त्रिपुर सुंदरी (षोडशी)
- मां भुवनेश्वरी
- मां छिन्नमस्ता
- मां त्रिपुर भैरवी
- मां धूमावती
- मां बगलामुखी
- मां मातंगी
- मां कमला
मां काली
दस महाविद्याओं में प्रथम स्वरूप. कलियुग में इनकी उपासना शीघ्र फलदायी मानी जाती है.
मां तारामोक्ष प्रदान करने वाली देवी मानी जाती हैं. आर्थिक उन्नति, बाधा निवारण, वाणी दोष दूर करने और शत्रुओं पर विजय के लिए इनकी साधना की जाती है.
मां त्रिपुर सुंदरी (षोडशी)इन्हें ललिता और राजराजेश्वरी भी कहा जाता है. इनकी उपासना से सौभाग्य, वैभव, भक्ति और मोक्ष की प्राप्ति होने की मान्यता है. श्री यंत्र की पूजा भी इन्हीं से जुड़ी मानी जाती है.
मां भुवनेश्वरीआदिशक्ति का स्वरूप मानी जाती हैं. सुख, समृद्धि, वाणी की सिद्धि और जीवन में स्थिरता प्रदान करने वाली देवी मानी गई हैं.
मां छिन्नमस्ताइनका स्वरूप अत्यंत रहस्यमय माना जाता है. मान्यता है कि इनकी साधना से ज्ञान, साहस और आध्यात्मिक शक्ति प्राप्त होती है.
मां त्रिपुर भैरवीशत्रु बाधा, तांत्रिक कष्टों के निवारण और आत्मबल बढ़ाने के लिए इनकी साधना विशेष मानी जाती है.
मां धूमावतीविपत्ति, रोग, संकट और शत्रु बाधा से रक्षा करने वाली देवी मानी जाती हैं.
मां बगलामुखीशत्रु स्तंभन, मुकदमों में सफलता और विरोधियों पर विजय के लिए इनकी साधना का विशेष महत्व बताया गया है.
मां मातंगीसुखी गृहस्थ जीवन, प्रभावशाली वाणी, कला, ज्ञान और आकर्षण प्रदान करने वाली देवी मानी जाती हैं.
मां कमलामहालक्ष्मी का स्वरूप मानी जाने वाली मां कमला की पूजा से धन, समृद्धि, सुख और ऐश्वर्य की प्राप्ति होने की मान्यता है.
गुप्त नवरात्रि की पूजा विधि- प्रतिपदा तिथि पर शुभ मुहूर्त में घटस्थापना करें.
- नौ दिनों के व्रत का संकल्प लें.
- प्रतिदिन सुबह और शाम मां दुर्गा एवं आदिशक्ति की पूजा करें.
- दीपक जलाकर देवी मंत्रों का जाप करें.
- सात्विक भोजन ग्रहण करें और संयम का पालन करें.
- अष्टमी या नवमी पर कन्या पूजनकर व्रत का समापन करें.
पंडितजी बताते हैं, नवरात्रि के दौरान श्रद्धानुसार इन ग्रंथों और स्तोत्रों का पाठ किया जा सकता है-
- दुर्गा सप्तशती
- दुर्गा कवच
- दुर्गा शतनाम स्तोत्र
- इष्ट देवी के बीज मंत्र
- सिद्ध कुंजिका स्तोत्र
यदि कोई श्रद्धालु पूरी दुर्गा सप्तशती का पाठ न कर सके तो चौथे, पांचवें और ग्यारहवें अध्यायका पाठ भी शुभ माना गया है.
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