नवरात्रि, हिंदुओं का एक प्रमुख पर्व है. नवरात्र एक संस्कृत शब्द है, जिसका अर्थ होता है 'नौ रातों का समय'. इन नौ रातों और दस दिनों के दौरान देवी की पूजा की जाती है. साल में चार बार नवरात्र आते हैं. इनमें दो प्रत्यक्ष चैत्र और शारदीय होते हैं, जिन्हें व्यापक रूप से मनाया जाता है, जबकि दो गुप्त नवरात्रि माघ और आषाढ़ होते हैं. आषाढ़ गुप्त नवरात्रि हिंदू धर्म में एक अत्यंत महत्वपूर्ण और आध्यात्मिक अवधि है. आषाढ़ शुक्ल प्रतिपदा से शुरू होने वाले इन नौ दिनों में मां दुर्गा की दस महाविद्याओं की गुप्त साधना की जाती है. चैत्र और शारदीय नवरात्रि के विपरीत, इसे गुप्त रखा जाता है और तांत्रिक सिद्धि व मनोकामना पूर्ति के लिए पूजा रात के समय की जाती है.
आषाढ़ गुप्त नवरात्रि कब हैं?
- प्रतिपदा (घटस्थापना)- 15 जुलाई
- नवरात्रि पारण (समापन)- 23 जुलाई
- घटस्थापना मुहूर्त- 15 जुलाई को सुबह 05:33 बजे से 10:09 बजे तक
आषाढ़ गुप्त नवरात्रि का महत्व
दस महाविद्याओं की साधना- गुप्त नवरात्रि के दौरान तांत्रिक, अघोरी और साधक दस महाविद्याओं जैसे - मां काली, तारा, त्रिपुर सुंदरी, भुवनेश्वरी, छिन्नमस्ता, आदि की गुप्त रूप से साधना करते हैं.
गुप्त मनोकामनाएं- जैसा कि नाम से स्पष्ट है, इसमें पूजा और अनुष्ठान गुप्त रखे जाते हैं. मान्यता है कि जितनी गोपनीयता से पूजा की जाती है, मनोकामनाएं उतनी ही जल्दी पूरी होती हैं.
बाधा निवारण- शत्रुओं पर विजय प्राप्त करने, तंत्र-मंत्र के प्रभाव को नष्ट करने और जीवन की बड़ी बाधाओं को दूर करने के लिए यह समय सर्वश्रेष्ठ माना जाता है.
गुप्त नवरात्रि के नियम
गोपनीयता- साधना और पूजा को किसी के साथ साझा नहीं किया जाता है और अनुष्ठानों को गुप्त रखा जाता है.
सात्विकता- इन नौ दिनों तक लहसुन, प्याज और मांस-मदिरा का सेवन वर्जित है.
पूजा का समय- सुबह या शाम के समय उत्तर या पूर्व दिशा की ओर मुख करके पूजा करनी चाहिए.
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