Gupt Navratri 2026 Devi puja Vidhi: सनातन परंपरा में शक्ति की साधना का बहुत ज्यादा महत्व माना गया है. जिस शक्ति के बगैर देवता भी अधूरे माने जाते हैं, उससे जुड़ा गुप्त नवरात्रि का महापर्व आज आषाढ़ मास के शुक्लपक्ष की प्रतिपदा को प्रारंभ हो रहा है. हिंदू धर्म शक्ति साधना से जुड़े चार नवरात्रि में आषाढ़ गुप्त नवरात्रि का अत्यंत ही धार्मिक एवं आध्यात्मिक महत्व माना गया है, यही कारण है कि देवी के साधक इन पावन 9 दिनों का पूरे साल इंतजार करते हैं. आइए देवी दुर्गा की साधना-आराधना के लिए जिस गुप्त नवरात्रि को सबसे उत्तम माना गया है, उसकी पूजा करने से पहले इससे जुड़ी 9 महत्वपूर्ण बातों को विस्तार से जानते हैं.

1. सनातन परंपरा में जिस शक्ति की साधना नवरात्रि के पर्व पर की जाती है, उसके बगैर त्रिदेव भी अधूरे माने जाते हैं. हिंदू मान्यता के अनुसार ब्रह्मा जी के साथ महासरस्वती, विष्णु जी के साथ महालक्ष्मी और रुद्र के साथ महाकाली का जुड़ाव है.
2. चैत्र और आश्विन मास की नवरात्रि में जहां देवी दुर्गा के विभिन्न स्वरूपों की साधना प्रत्यक्ष रूप से धूमधाम से की जाती है, वहीं गुप्त नवरात्रि में 10 महाविद्या की साधना जितनी गुप्त रूप से की जाती है, वह उतनी ही सफल होती है.
3. हरिवंश पुराण के अनुसार गुप्त नवरात्रि में जिस देवी दुर्गा की हम साधना-आराधना करते हैं, उसमें सभी देवताओं की शक्ति निहित है. मान्यता है कि देवी दुर्गा का मुख भगवान शिव के तेज से, उनके केश यम देवता के तेज से, भुजाएं भगवान विष्णु के तेज से, पैर ब्रह्मा जी के तेज से और वक्षस्थल चंद्रमा के तेज से और कटिप्रदेश देवराज इंद्र के तेज से बना.

4. गुप्त नवरात्रि के 9 दिनों दस महाविद्याओं की पूजा की जाती है. इसके पहले दिन मां काली, दूसरे दिन मां तारा, तीसरे दिन मां त्रिपुरसुंदरी (षोडशी), चौथे दिन मां भुवनेश्वरी, पांचवें दिन मां छिन्नमस्ता, छठे दिन मां त्रिपुर भैरवी, सातवें दिन मां धूमावती, आठवें दिन मां बगलामुखी और नौवें दिन देवी मातंगी और मां कमला की विधि-विधान से साधना-आराधना की जाती है.
5. हिंदू मान्यता के अनुसार गुप्त नवरात्रि का महापर्व तंत्र और मंत्र की सिद्धि के लिए अत्यंत ही शुभ और फलदायी माना गया है. यही कारण है कि माघ और आषाढ़ मास की गुप्त नवरात्रि में देवी के साधक तमाम तरह की साधना करते हुए देवी को प्रसन्न करके गुप्त सिद्धियों को अर्जित करने का प्रयास करते हैं.

6. गुप्त नवरात्रि की साधना और व्रत को सफल बनाने के लिए साधक को प्रतिदिन एक निश्चित समय पर ही देवी दुर्गा की साधना करनी चाहिए. यदि आप तंत्र और मंत्र के जरिए यह साधना कर रहे हैं तो इसे किसी के अहित की बजाय स्वयं के कल्याण की कामना लिए करना चाहिए.
7. यदि आप गुप्त नवरात्रि की पूजा के लिए अपने घर में कलश की स्थापना करते हुए 9 दिनों तक विधि-विधान से देवी की पूजा करने का संकल्प ले रहे हैं तो आपको कभी भूलकर देवी स्थान या फिर कहें अपने घर में ताला लगाकर बाहर नहीं जाना चाहिए. कहने का तात्पर्य यह है कि देवी पूजा के स्थान को अकेला नहीं छोड़ना चाहिए और वहां पर हमेशा अखंड दीप जलते रहना चाहिए.
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8. गुप्त नवरात्रि में देवी दुर्गा को शीघ्र ही प्रसन्न करके आशीर्वाद पाना चाहते हैं तो आपको प्रतिदिन देवी के स्वरूप के अनुसार ही भोग लगाना चाहिए और इन 9 दिनों में काले रंग के कपड़ों से बचते हुए स्वच्छ और उजले रंग वाले कपड़ों को पहनना चाहिए.
9. हिंदू मान्यता के अनुसार गुप्त नवरात्रि में की गई देवी दुर्गा की साधना से साधक को चारों पुरुषार्थ यानि धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष की प्राप्ति होती है, लेकिन इसे प्राप्त करने के लिए आपको पूरे 9 दिनों तक तन और मन से पवित्र रहते हुए तामसिक चीजों से दूर रहना चाहिए.
(Disclaimer: यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. एनडीटीवी इसकी पुष्टि नहीं करता है.)
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