विज्ञापन

सियासत करती श्री राम और महादेव में बंटवारा, सनातक में दोनों का रिश्ता सम्मान भरा-रामेश्वरम की कहानी गवाह

Lord Rama and Shiva: भगवान राम और शिव की भक्ति को सनातन परंपरा में परस्पर जुड़ा माना गया है. दिल्ली निवासी ज्योतिषाचार्य मदन मोहन ने रामेश्वरम की कथा के जरिए दोनों आराध्यों के गहरे संबंध को समझाया.

सियासत करती श्री राम और महादेव में बंटवारा, सनातक में दोनों का रिश्ता सम्मान भरा-रामेश्वरम की कहानी गवाह
भगवान राम और भगवान शिव एक-दूसरे के आराध्य
ndtv

भगवान राम और भगवान शिव की भक्ति को लेकर तेलंगाना के मुख्यमंत्री ए. रेवंत रेड्डी के बयान के बाद धार्मिक परंपरा और दोनों आराध्यों के संबंध पर चर्चा शुरू हो गई है. रेड्डी ने राम और शिव की भक्ति को उत्तर-दक्षिण की धार्मिक परंपराओं से जोड़ते हुए 'जय श्री राम' और 'हर हर महादेव' का जिक्र किया. इस मुद्दे पर जब दिल्ली निवासी ज्योतिषाचार्य मदन मोहन से बात की गई तो उन्होंने बताया कि सनातन परंपरा में भगवान राम और भगवान शिव के बीच गहरा आध्यात्मिक संबंध माना गया है. दोनों की भक्ति को अलग-अलग खेमों में बांटने के बजाय धार्मिक कथाओं में एक-दूसरे के प्रति श्रद्धा और सम्मान का भाव मिलता है. रामेश्वरम से जुड़ी मान्यता के अनुसार, लंका जाने से पहले भगवान राम ने शिव की आराधना की थी. वहीं, रामचरितमानस की भक्ति परंपरा में भगवान शिव को राम का भक्त और राम को शिव के प्रति श्रद्धा रखने वाला बताया गया है. उन्होंने कहा कि राम और शिव एक-दूसरे के हृदय में बसते हैं. सनातन परंपरा में दोनों आराध्य हैं और उनकी भक्ति में विरोध नहीं, बल्कि परस्पर सम्मान का भाव दिखाई देता है. सनातन परंपरा में भगवान राम और भगवान शिव को लेकर कई ऐसी धार्मिक कथाएं मिलती हैं, जिनमें दोनों के बीच गहरी श्रद्धा और भक्ति का भाव दिखाई देता है. रामेश्वरम से जुड़ी पुराणिक परंपरा में भगवान राम द्वारा शिवलिंग की स्थापना और पूजा का उल्लेख मिलता है. स्कंद पुराण के सेतु-माहात्म्य में राम द्वारा स्थापित रामनाथ यानी रामेश्वर लिंग का वर्णन मिलता है.

रामेश्वरम की कथा में शिव आराधना का उल्लेख

दिल्ली निवासी ज्योतिषाचार्य मदन मोहन ने बताया कि धार्मिक परंपरा के अनुसार लंका विजय से पहले भगवान राम ने शिव की आराधना की थी. स्कंद पुराण में भी राम द्वारा शिवलिंग स्थापित कर उसकी पूजा किए जाने का उल्लेख मिलता है. इसी परंपरा से रामेश्वरम ज्योतिर्लिंग की धार्मिक मान्यता जुड़ी है. उन्होंने कहा कि भगवान राम और महादेव दोनों एक-दूसरे के प्रति श्रद्धा रखने वाले आराध्य हैं. रामेश्वरम की कथा में राम द्वारा शिव की पूजा इसी भाव को सामने रखती है. उनके मुताबिक, सनातन परंपरा में अलग-अलग देव स्वरूपों की उपासना को विरोध के रूप में देखने के बजाय उनके आपसी संबंध और आध्यात्मिक भाव को समझना चाहिए.

हनुमान को भी रुद्र का स्वरूप माना गया

राम और शिव के संबंध की चर्चा में आचार्य हनुमानजी का उदाहरण भी देते हैं. धार्मिक परंपरा में हनुमान को रुद्र के अंश या रुद्रावतार के रूप में माना जाता है. इसी वजह से रामभक्ति और शिव तत्व का संबंध हनुमानजी की कथा में भी दिखाई देता है.

ये भी पढ़ें- अपनी नजर खुद कैसे उतारें? एस्ट्रोलॉजर से जानें आसान विधि, नजर उतारने का सही समय और दिन

भस्मासुर की कथा में विष्णु की लीला

आचार्य ने भस्मासुर की कथा का भी उल्लेख किया. पुराणिक कथा के अनुसार, भस्मासुर ने तपस्या से शिव को प्रसन्न कर वरदान प्राप्त किया था. बाद में उसके दुरुपयोग से संकट पैदा हुआ. भगवान विष्णु ने मोहिनी रूप धारण कर उसे नृत्य में उलझाया और उसके हाथ को उसके ही सिर तक पहुंचवा दिया. श्रीमद्भागवत में मोहिनी रूप से जुड़ी यह लीला वर्णित है. विष्णु जी ने मोहिनी का रूप धारण कर शिव की भस्मासुर से रक्षा की थी.

राम-शिव संबंध को समझने का संदेश

आचार्य मदन मोहन कहते हैं कि राम और शिव की कथाओं में भक्ति, सम्मान और परस्पर स्मरण का भाव मिलता है. उनके अनुसार, सनातन परंपरा का संदेश यही है कि आराध्य देवों को अलग-अलग खांचों में बांटने के बजाय उनके बीच मौजूद आध्यात्मिक संबंध को समझा जाए.

ये भी पढ़ें- मैंने तेरे ही भरोसे हनुमान सागर में नैया डार दई... मंगलवार को गाएं हनुमान जी का ये सुंदर भजन

पूरी स्टोरी पढ़ें

NDTV.in पर ताज़ातरीन ख़बरों को ट्रैक करें, व देश के कोने-कोने से और दुनियाभर से न्यूज़ अपडेट पाएं

फॉलो करे:
Lord Rama, Lord Shiva, Revanth Reddy
Listen to the latest songs, only on JioSaavn.com