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Sawan Somwar: सावन के तीसरे सोमवार पर बनेंगे 9 शुभ संयोग, जानिए भगवान शिव को क्या अर्पित करना माना जाता है शुभ

17 अगस्त को सावन का तीसरा सोमवार मनाया जाएगा. इस दिन कई शुभ योग, रवि योग, नाग पंचमी, सिंह संक्रांति, स्कंद षष्ठी, मलयालम नववर्ष, कर्क राशि में त्रिग्रही योग, हंसराज योग और बुधादित्य योग जैसे कई महत्वपूर्ण संयोग बन रहे हैं.

Sawan Somwar: सावन के तीसरे सोमवार पर बनेंगे 9 शुभ संयोग, जानिए भगवान शिव को क्या अर्पित करना माना जाता है शुभ
सावन सोमवार पर शुभ संयोग
file photo

Sawan Somwar: भारत में साल 2026 में सावन का पवित्र महीना 30 जुलाई से शुरू होकर 28 अगस्त 2026 को समाप्त होगा. यह पूरा मास भगवान शिव की आराधना और व्रतों के लिए समर्पित है. सावन का तीसरा सोमवार 17 अगस्त 2026 को मनाया जाएगा. सावन के सोमवार में व्रत रखना बहुत शुभ माना जाता है. सावन का तीसरा सोमवार धार्मिक और ज्योतिषीय दृष्टि से विशेष संयोगों के कारण बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है. तीसरे सोमवार को व्रत रखने और भगवान शिव की विधि-विधान से पूजा करने से मनोकामनाओं की पूर्ति की कामना की जा सकती है. मान्यता है कि इस दौरान भगवान शिव की आराधना से सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं. ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार, इस दिन एक साथ कई शुभ संयोग बन रहे हैं.

17 अगस्त को सावन का तीसरा सोमवार मनाया जाएगा. इस दिन कई शुभ योग, रवि योग, नाग पंचमी, सिंह संक्रांति, स्कंद षष्ठी, मलयालम नववर्ष, कर्क राशि में त्रिग्रही योग, हंसराज योग और बुधादित्य योग जैसे कई महत्वपूर्ण संयोग बन रहे हैं. चलिए आपको बताते हैं सावन का तीसरा सोमवार क्यों खास है.

9 दुर्लभ शुभ संयोग

रवि योग और शुभ योग- पूजा-पाठ और अनिष्ट दोषों के नाश के लिए मंगलकारी.

नाग पंचमी- शिवजी के गले के हार नाग देवता की आराधना का संयोग.

सिंह संक्रांति- सूर्य का सिंह राशि में प्रवेश और पुण्य काल.

स्कंद षष्ठी- प्रदोष काल में शिव पुत्र कार्तिकेय की पूजा.

बुधादित्य व त्रिग्रही योग- सूर्य, बुध और गुरु की स्थिति से विशेष प्रभाव.

हंसराज योग- गुरु की उच्च राशि में उपस्थिति.

मलयालम नववर्ष- नए वर्ष का शुभारंभ.

भगवान शिव को अर्पित करने योग्य शुभ सामग्री

  • बेलपत्र और धतूरा- भोलेनाथ को अत्यंत प्रिय साबुत बेलपत्र
  • दूध और गंगाजल- शिवलिंग का पवित्र जलाभिषेक व दुग्धाभिषेक
  • लावा और दूध- नाग पंचमी के उपलक्ष्य में नाग देवता व शिवजी को अर्पण
  • सफेद फूल और अक्षत- शांति और शुद्धि के प्रतीक

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