सावन का महीना आते ही हर तरफ शिव भक्ति का माहौल छा जाता है. यह पवित्र महीना भगवान भोलेनाथ को बेहद प्रिय है, इसलिए श्रद्धालु पूरे मन से उनकी आराधना करते हैं. खासकर सावन के सोमवार का महत्व और भी अधिक माना जाता है. इस दिन भक्त व्रत रखकर शिवलिंग का जलाभिषेक करते हैं, बेलपत्र अर्पित करते हैं और भोलेनाथ से सुख, समृद्धि तथा मनचाहे फल की कामना करते हैं. कहा जाता है कि सच्चे मन से की गई शिव पूजा और सावन सोमवार का व्रत भक्तों की सभी मनोकामनाएं पूरी कर सकता है और जीवन में सकारात्मक एनर्जी का संचार करता है. कल यानी 10 अगस्त को सावन का दूसरा सोमवार है. ऐसे में जानिए जलाभिषेक की विधि और पूजा का शुभ मुहूर्त.
सावन सोमवार शुभ मुहूर्त
ब्रह्म मुहूर्त- प्रात: 04:22 से 05:05 बजे तक
अमृत-सर्वोत्तम मुहूर्त- सुबह 05:47 से 07:27 बजे तक
शुभ-उत्तम मुहूर्त- सुबह 09:07 से 10:47 बजे तक
अभिजीत मुहूर्त- दोपहर 12:00 से 12:53 बजे तक
जलाभिषेक और पूजा विधि
- स्नान करके साफ कपड़े पहनें और मंदिर में शिवजी का स्मरण करें.
- साफ लोटे के जल में गंगाजल मिलाएं.
- जल में दूध, दही, शहद, घी, शक्कर और गन्ने का रस मिलाएं.
- इस मिश्रण को पतली धारा से शिवलिंग पर अर्पित करें.
- इसके बाद फिर से शुद्ध जल व गंगाजल चढ़ाएं.
- काले तिल, चावल, बेलपत्र, धतूरा और सफेद फूल चढ़ाएं.
- 'ॐ नमः शिवाय' या महामृत्युंजय मंत्र का जाप करें.
- आटे का दीपक जलाकर आरती करें.
जलाभिषेक करने की विधि
शिवलिंग पर जलाभिषेक करने के लिए तांबे या पीतल के लोटे में शुद्ध जल व गंगाजल लें. उत्तर दिशा की ओर मुख करके जलाधारी के दाईं ओर श्रीगणेश, बाईं ओर कार्तिकेय और मध्य में अशोक सुंदरी का स्मरण कर जल चढ़ाएं. अंत में 'ॐ नमः शिवाय' मंत्र का जाप करते हुए धीमी व एकसमान धारा से शिवलिंग पर जल अर्पित करें.
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