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सद्दाम खान 250 किमी पैदल चलकर लाया 101 लीटर गंगाजल, सावन के पहले सोमवार पर भगवान श‍िव का क‍िया जलाभ‍िषेक

सद्दाम खान श‍िव भक्‍त हैं. उन्होंने बताया क‍ि भगवान श‍िव पर उनकी व‍िशेष आस्‍था है. कांवड़‍ियों के साथ 250 क‍िलोमीटर पैदल यात्रा की. 

सद्दाम खान 250 किमी पैदल चलकर लाया 101 लीटर गंगाजल, सावन के पहले सोमवार पर भगवान श‍िव का क‍िया जलाभ‍िषेक
सद्दाम खान ने कांवड़ियों के साथ गंगाजल लाकर भगवान शिव का जलाभिषेक किया.
NDTV Reporter

सावन महीने के पहले सोमवार को धौलपुर के सैपऊ स्थित ऐतिहासिक महादेव मंदिर में सांप्रदायिक सौहार्द, आपसी भाईचारे और गंगा-जमुनी तहजीब की अनूठी मिसाल देखने को मिली. कूंकरा गांव के मुस्लिम युवक सद्दाम खान ने हिंदू युवकों के साथ कंधे पर 101 लीटर गंगाजल की कांवड़ उठाकर भगवान भोलेनाथ का जलाभिषेक किया. इस पहल की क्षेत्रभर में सराहना हो रही है.

250 किलोमीटर दूर से लाया कांवड़  

छह युवकों का दल पांच दिन पहले उत्तर प्रदेश के सोरों धाम से गंगाजल लेने के लिए रवाना हुआ था. सभी युवकों ने लगभग 250 किलोमीटर की पैदल यात्रा कर गंगाजल सैपऊ के ऐतिहासिक महादेव मंदिर तक पहुंचाया, और विधि-विधान से भगवान शिव का जलाभिषेक किया. यात्रा के दौरान विभिन्न स्थानों पर श्रद्धालुओं ने कांवड़ यात्रियों का स्वागत कर उनका उत्साहवर्धन किया.

सद्दाम खान खुद आया सामने 

सद्दाम खान के साथ कांवड़ यात्रा में शामिल युवक मनीष कुमार ने बताया कि इस यात्रा का प्रस्ताव स्वयं सद्दाम खान ने रखा था. सभी साथियों ने बिना किसी भेदभाव के एक साथ यात्रा की और पूरे रास्ते आपसी भाईचारे का संदेश दिया. उन्होंने कहा कि यात्रा के दौरान लोगों ने इस पहल की सराहना करते हुए जगह-जगह कांवड़ियों का स्वागत किया.

भाईचारे का संदेश दिया 

सद्दाम खान ने बताया कि उनकी इस कांवड़ यात्रा का उद्देश्य केवल धार्मिक आस्था तक सीमित नहीं था, बल्कि समाज को प्रेम, सद्भाव और आपसी सम्मान का संदेश देना भी था. उन्होंने कहा कि भारत की पहचान उसकी साझा संस्कृति और गंगा-जमुनी तहजीब है, जहां सभी धर्मों और समुदायों के लोग मिल-जुलकर रहते आए हैं. समाज में बढ़ती कट्टरता और वैमनस्य के बीच सभी को एक-दूसरे की भावनाओं का सम्मान करते हुए भाईचारे के साथ रहने की आवश्यकता है. 

स्थानीय लोग कर रहे प्रशंसा 

सावन के पहले सोमवार पर सद्दाम खान और उनके साथियों की यह पहल क्षेत्र में चर्चा का विषय बनी रही. स्थानीय लोगों ने इसे सामाजिक समरसता, राष्ट्रीय एकता और सांप्रदायिक सौहार्द का प्रेरणादायी उदाहरण बताते हुए कहा कि ऐसे प्रयास समाज में प्रेम, विश्वास और सद्भाव को मजबूत करने का कार्य करते हैं.

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