सावन 2026 की शुरुआत 30 जुलाई से हो रही है. इस पवित्र महीने में भगवान शिव की पूजा, जलाभिषेक और सोमवार व्रत का विशेष महत्व माना जाता है. लेकिन सिर्फ व्रत रखने से ही नहीं, बल्कि सही नियमों का पालन करने से भी महादेव प्रसन्न होते हैं. ज्योतिषाचार्य पंडित कौशल पांडेय ने बताया कि सावन में की गई छोटी-छोटी गलतियां भी पूजा के फल को प्रभावित कर सकती हैं. इसलिए व्रत और शिवलिंग पूजन के नियम जानना बेहद जरूरी है.
30 जुलाई से शुरू होगा सावन 2026
ज्योतिषाचार्य पंडित कौशल पांडेय के अनुसार, पंचांग में श्रावण कृष्ण पक्ष की प्रतिपदा तिथि 29 जुलाई की रात 8:05 बजे शुरू होगी और 30 जुलाई की रात 9:30 बजे समाप्त होगी. उदया तिथि के आधार पर 30 जुलाई (गुरुवार) से सावन माह का शुभारंभ माना जाएगा.
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सावन व्रत के जरूरी नियम
पंडित कौशल पांडेय बताते हैं कि सावन में ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान करें, साफ वस्त्र पहनें और भगवान शिव का गंगाजल, जल, दूध, बेलपत्र, धतूरा और भांग से अभिषेक करें. पूरे दिन सात्विक भोजन करें, मांस-मदिरा और तामसिक भोजन से दूर रहें. इसके अलावा, "ॐ नमः शिवाय" मंत्र का जाप करना भी शुभ माना जाता है.
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शिवलिंग पूजन में भूलकर भी न करें ये गलतियां
पंडित कौशल पांडेय ने बताया कि शिवलिंग पर कुमकुम, रोली या सिंदूर नहीं चढ़ाना चाहिए. खंडित अक्षत अर्पित करने से भी बचें. मांस या मदिरा का सेवन करने के बाद शिव पूजा करना वर्जित माना गया है. शिवलिंग पर तुलसी के पत्ते नहीं चढ़ाए जाते और शंख से जलाभिषेक भी नहीं करना चाहिए. धार्मिक मान्यता है कि शंखचूड़ की कथा के कारण भगवान शिव को शंख से जल अर्पित नहीं किया जाता.
क्या कहते हैं पंडित कौशल पांडेय
ज्योतिषाचार्य पंडित कौशल पांडेय ने बताया कि सावन में श्रद्धा, संयम और शास्त्रों में बताए गए नियमों के साथ की गई पूजा भगवान शिव को शीघ्र प्रसन्न करती है. इससे सुख-समृद्धि, मनोकामना पूर्ति और परिवार में सकारात्मक ऊर्जा का वास होता है.
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