Shami and belpatra for Shiva Puja: सनातन परंपरा में भगवान शिव की साधना के लिए श्रावण मास का बहुत ज्यादा धार्मिक महत्व माना गया है. मान्यता है कि इस पावन मास में किया जाने वाला जप, तप साधक का सभी प्रकार से कल्याण करते हुए सभी मनोकामनाओं को पूरा करता है. हिंदू मान्यता के अनुसार श्रावण मास में शिव जिन दो चीजों से शीघ्र प्रसन्न होते हैं, उनमें पवित्र जल और पत्र शामिल हैं. आइए जानते हैं कि भगवान भगवान शिव को शमीपत्र और बेलपत्र चढ़ाने की सही विधि और लाभ क्या हैं.
शिव पूजा में बेलपत्र का क्या महत्व है?

हिंदू धर्म में बेल की तीन पत्तियों का समूह महादेव के त्रिनेत्र और त्रिगुणात्मक ऊर्जा का प्रतीक माना जाता है. मान्यता है कि महादेव को अत्यंत ही प्रिय माने जाने वाले इस पवित्र पत्र को शिव पूजा में चढ़ाने पर साधक के सभी पाप एवं त्रिदोष (वात, पित्त और कफ से संबंधी कष्ट) दूर हो जाते हैं और उसे सुख-सौभाग्य के साथ दीर्घायु प्राप्त होती है. मान्यता है कि जो साधक पूरे सावन महीने में भगवान शिव को बेलपत्र अर्पित करता है, उस पर पूरे साल शिव कृपा बनी रहती है. उसे करियर-कारोबार में मनचाही प्रगति और मान-सम्मान मिलता है.
शिव पूजा में शमीपत्र का क्या महत्व है?
हिंदू मान्यता के अनुसार शिव पूजा में बेलपत्र की तरह शमीपत्र को अर्पित किए जाने का बहुत ज्यादा महत्व माना गया हैं मान्यता है कि शमी की पत्तियां श्रद्धापूर्वक चढ़ाने पर भगवान शंकर शीघ्र ही प्रसन्न होकर अपनी कृप बरसाते हैं. शमीपत्र से किया गया शिव पूजन सभी कष्टों को दूर करके कामनाओं को पूरा करने वाला माना गया है. जो साधक श्रावण मास में प्रतिदिन शिवलिंग पर शमीपत्र चढ़ाकर पूजा करते हैं उनके जीवन में हमेशा शिव कृपा बरसती रहती है.
शिव पूजा में शमी पत्र का महत्व

- शिव पूजा में शमीपत्र और बेलपत्र चढ़ाने के नियम
- शिव पूजा में कभी भी खंडित शमीपत्र या बेलपत्र न चढ़ाएं.
- यदि संभव हो तो शिवलिंग पर हमेशा ताजे शमीपत्र और बेलपत्र चढ़ाएं.
- शमीपत्र और बेलपत्र को चढ़ाने से पहले उसका दंठल तोड़ दें.
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- शिव पूजा में हमेशा बेलपत्र और शमीपत्र का चिकना वाला हिस्सा उपर और रुखा वाला हिस्सा नीचे रखें.
- शमीपत्र और बेलपत्र हमेशा तन और मन से पवित्र होने के बाद ही शिवलिंग पर चढ़ाना चाहिए.
- शिवलिंग पर शमीपत्र या बेलपत्र अर्पित करते समय अपने मन में ॐ नमः शिवाय मंत्र का जप करते रहें.
(Disclaimer: यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. एनडीटीवी इसकी पुष्टि नहीं करता है.)
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