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Santoshi Mata Vrat: शुक्रवार को आखिर क्यों रखा जाता है संतोषी माता का व्रत? जानें विधि, नियम और धार्मिक महत्व

Santoshi Mata Vrat: हिंदू धर्म में प्रत्येक दिन किसी न किसी देवी या देवता की पूजा के लिए समर्पित है. शुक्रवार का दिन शुक्र ग्रह के साथ संतोषी माता की पूजा एवं व्रत आदि के लिए अत्यंत ही शुभ और फलदायी माना गया है. शुक्रवार के दिन संतोषी माता का व्रत और पूजन कैसे करना चाहिए, विधि और धार्मिक महत्व को जानने के लिए पढ़ें ये लेख.

Santoshi Mata Vrat: शुक्रवार को आखिर क्यों रखा जाता है संतोषी माता का व्रत? जानें विधि, नियम और धार्मिक महत्व
Santoshi Mata Vrat: शुक्रवार के दिन संतोषी माता का व्रत कैसे रखा जाता है?
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Santoshi Mata Vrat Ki katha aur Puja vidhi: सनातन परंपरा में शुक्रवार का दिन शक्ति की साधना के लिए जाना जाता है. शुक्रवार के दिन शक्ति के विभिन्न स्वरूप जैसे देवी दुर्गा, मां लक्ष्मी आदि के साथ संतोषी माता की पूजा एवं व्रत आदि का विधान है. हिंदू मान्यता के अनुसार संतोषी माता की पूजा जीवन के सभी कष्टों को दूर करके सुख-सौभाग्य दिलाने वाली मानी गई है. अपने भक्तों की पूजा से शीघ्र प्रसन्न होने वाली मां संतोषी आखिर कौन हैं? कैसे हुआ उनका प्राकट्य? आइए मां संतोषी से जुड़ी कथा और उनकी कृपा बरसाने वाली पूजा एवं व्रत की विधि और उससे मिलने वाले फल के बारे में आइए विस्तार से जानते हैं. 

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संतोषी माता व्रत की विधि 

हिंदू मान्यता के अनुसार संतोषी माता का करने के लिए साधक को शुक्रवार के दिन तन और मन से पवित्र होने के बाद ईशान कोण में एक चौकी पर लाल कपड़ा बिछाकर माता संतोषी की प्रतिमा या चित्र रखना चाहिए. हिंदू मान्यता के अनुसार संतोषी माता की पूजा प्रारंभ करने से पहले उनके पिता प्रथम पूजनीय भगवान श्री गणेश और माता ऋद्धि-सिद्धि की पूजा करनी चाहिए. उसके बाद उन पर शुद्ध जल छिड़कना चाहिए. इसके बाद रोली, चंदन,फल-फूल, धूप-दीप आदि अर्पित करने के बाद संतोषी माता की कथा का पाठ करना या फिर उसे सुनना चाहिए. संतोषी माता के व्रत वाले दिन पूजा में विशेष रूप से चना, गुड़ और केला जरूर चढ़ाना चाहिए.  

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संतोषी माता व्रत के नियम 

  • संतोषी माता के व्रत को 16 सोमवार तक रखा जाता है. 
  • शुक्रवार के दिन रखे जाने वाले इस व्रत में खट्टी चीजों का सेवन नहीं किया जाता है. 
  • संतोषी माता की पूजा करने के बाद उनकी आरती जरूर करना चाहिए. 
  • 16 शुक्रवार पूर्ण होने पर संतोषी माता के व्रत का उद्यापन करके कम से कम 8 बच्चों को शुक्रवार के दिन भोजन कराया जाता है.
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संतोषी माता की कथा 

हिंदू मान्यता के अनुसार भगवान गणेश जी एक बार रक्षाबंधन पर अपनी बहन से रक्षासूत्र बंधवा रहे थे तभी उनके पुत्र ने इस परंपरा के बारे में उनसे पूंछा. तब गणेश ने उन्हें बताया कि यह बहन के द्वारा बांधा गया पवित्र रक्षा सूत्र है जो भाई और बहन के स्नेह का प्रतीक है. ऐसा सुनते ही उन्होंने गणपति से एक बहन की मांग कर दी ताकि वे भी रक्षासूत्र बंधवा सकें. मान्यता है कि तब गणपति ने एक पावन ज्योति प्रकट किया और उसे अपनी पत्नी रिद्धि और सिद्धि की आत्मशक्ति से जोड़ दिया. जिसके बाद मां संतोषी का प्राकट्य हुआ. चूंकि संतोषी माता का प्राकट्य शुक्रवार के दिन हुआ था, इसलिए उनका व्रत और पूजन शुक्रवार के दिन किया जाता है. 

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संतोषी माता व्रत का धार्मिक महत्व

संतोषी माता का व्रत सभी कामनाओं को पूरा करने वाला माना गया है. मान्यता है कि संतोषी माता का 16 शुक्रवार व्रत करने से मनचाहे जीवनसाथी की मनोकामना पूरी होती है. संतान की उन्नति और दीर्घायु प्राप्त होती है. शुक्रवार के दिन रखे जाने वाले इस व्रत से घर-परिवर में सुख, समृद्धि और सौभाग्य हमेशा कायम रहता है.  

(Disclaimer: यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. एनडीटीवी इसकी पुष्टि नहीं करता है.)

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