ईशा फाउंडेशन के फाउंडर सद्गुरु ने एक नई फोटोबुक 'डिसअपियरिंग फेसेस (Disappearing Faces)' लॉन्च की है. यह किताब उन लोगों और समुदायों की झलक दिखाती है जिनसे वे हिमालय की अपनी दशकों से चली आ रही यात्राओं के दौरान मिले थे. साथ ही इस किताब हिमालय में रहने वाले लोगों के जीवन, संस्कृति और उनकी अनोखी पहचान को दर्शाती है. पुस्तक के लॉन्च कार्यक्रम में केंद्रीय मंत्री मनसुख मांडविया भी मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए.

हिमालयी क्षेत्रों में रहने वाले लोगों की अनोखी तस्वीरें
पेंगुइन इंडिया द्वारा प्रकाशित इस किताब में नेपाल और तिब्बत के हिमालयी क्षेत्रों में रहने वाले लोगों की अनोखी तस्वीरें हैं, जो उनके जीवन, संस्कृति और भावनाओं की झलक पेश करती हैं. पुस्तक के लॉन्च के बाद सद्गुरु और कमेंटेटर आनंद रंगनाथन के बीच बातचीत भी हुई. इस दौरान उन्होंने किताब में शामिल तस्वीरों के पीछे की कहानियों और अपने एक्सपीरिएंस साझा किए.

प्रकृति से जुड़ा जीवन
सद्गुरु ने बताया कि ये चेहरे एक ऐसे दौर को रिप्रेजेंट करते हैं, जो धीरे-धीरे खत्म होता जा रहा है. ये ऐसे लोग हैं जिनकी जिंदगी प्रकृति और अपने एक्सपीरिएंस से जुड़ी हुई है. उनका जीवन रोशनी और अंधेरे, गर्मी और ठंड, मौसम और प्रकृति के बीच बीता है. उन्होंने आगे कहा कि ये चेहरे भले ही साधारण नजर आते हों, लेकिन इनके जीवन में जमीन, हवा, पानी और लोगों से जुड़े गहरे अनुभव हैं. सद्गुरु के अनुसार, पिछले 50 सालों में हिमालय की लगातार यात्राओं के दौरान वहां की खूबसूरत वादियों से ज्यादा इन लोगों के चेहरों और उनकी कहानियों ने उन्हें आकर्षित किया और हिमालय को गहराई से समझने में मदद की.
कहां-कहां उपलब्ध है किताब?
पेंगुइन इंडिया द्वारा प्रकाशित 'डिसअपीयरिंग फेसेस' हार्डकवर और पेपरबैक एडिशन में उपलब्ध है. साथ ही इस बुक को अमेजन, क्रॉसवर्ड, सपनाऑनलाइन और द अटलांटिक की आधिकारिक वेबसाइटों से आसानी से खरीदा जा सकता है.
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