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Anxiety is not reality: चिंता वास्तविकता नहीं तो आखिर क्या है? जानें इसे दूर करने का उपाय

Chinta Kyon Hoti Hai: चिंता क्या होती है? इससे जीवन में क्या बदलाव आते हैं? जिस चिंता को चिता के समान माना जाता है, उसके दुष्परिणाम से बचने के लिए मनुष्य को आखिर क्या करना चाहिए, विस्तार से बता रहे हैं जाने-माने आध्यात्मिक गुरु, योगी, लेखक और विचारक सद्गुरु.

Anxiety is not reality: चिंता वास्तविकता नहीं तो आखिर क्या है? जानें इसे दूर करने का उपाय
Anxiety: चिंता से बचने का उपाय क्या है?
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How to overcome worry: जिसे आप "चिंता" कहते हैं, वह बस इतना है कि आप किसी चीज़ के नतीजे को लेकर चिंतित है. किसी चीज़ का नतीजा आपकी इच्छाओं से तय नहीं होता, बल्कि आपके काम से तय होता है. आप अभी जो काम कर रहे हैं, उसके लिए आप जितने कम तैयार होंगे, आपको उतनी ही ज्यादा चिंता होगी. मान लीजिए कि आपको मोटरसाइकिल चलानी नहीं आती, फिर भी आप उस पर बैठकर चल दिए. तब हर पल आप चिंता से भरे रहेंगे. लेकिन अगर आप उसे चलाना जानते हैं, तो यह एक शानदार अनुभव होगा. 

ऐसे में चिंता की वजह मोटरसाइकिल नहीं है, बल्कि उसे न चला पाना चिंता की वजह है. तो, चिंता को संभालने की कोशिश न करें. चिंता वास्तविकता नहीं है, यह बस आपकी किसी क्षमता की कमी का नतीजा है. अगर हम कुछ करना चाहते हैं, तो नतीजे के बजाय, हमें अपनी क्षमता को बढ़ाने पर काम करना चाहिए. सफलता सिर्फ इसलिए नहीं मिलती कि आप उसे चाहते हैं. यह आपको तब मिलती है जब आप उसके काबिल होते हैं. 

इस दुनिया में किसी भी काम में सफल होने के लिए दो बुनियादी चीजें होती हैं - अपने शरीर और अपने मन का उनकी पूरी क्षमता के साथ इस्तेमाल कर पाना. अगर ऐसा होना है, तो आपको अपनी प्रकृति से ही प्रसन्न होना चाहिए. इसका मतलब है कि आप खुद अपने जीवन में कोई ‘मुद्दा' न हों. अगर आप खुद कोई मुद्दा नहीं हैं, तो आप बाहरी समस्याओं को पूरी आज़ादी के साथ संभाल सकते हैं. लेकिन अगर आप खुद ही एक मुद्दा हैं, तो हर चीज समस्या होती है.

यही वजह है कि इस धरती पर रहने के हजारों साल के अनुभव के बाद भी, मानवता आज एक बड़ा झमेला बनी हुई है, क्योंकि लोग खुद अपने आप में बड़ा मुद्दा हैं. अगर वे कुछ सँभालने की कोशिश करते हैं, तो वे और ज्यादा मुद्दे पैदा कर देंगे; वे कुछ भी सुलझा नहीं पाएंगे. अगर वे एक समस्या हल करते हैं, तो उससे जुड़ी सौ और समस्याएँ खड़ी कर देते हैं. क्या आप हर जगह ऐसा होता हुआ नहीं देख रहे हैं - अंतर्राष्ट्रीय स्थिति में, स्थानीय स्थिति में, परिवार में और खुद के अंदर? जब आप खुद एक मुद्दा होते हैं, तो आप जिस भी चीज को छुएंगे, वह और ज्यादा बड़ा मुद्दा बन जाएगी.

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सबसे पहली और सबसे ज़रूरी चीज है कि आपको अपने अंदर स्थिर होना चाहिए. अगर आप खुद में स्थिर हैं, तो हम दुनिया के लिए जो भी सबसे अच्छा कर सकते हैं, वह करेंगे. बाहर चाहे जो भी हो रहा हो, आप आतंरिक रूप से स्थिर रहेंगे. यह एक ऐसी चीज़ है जिसका हर इंसान हकदार है और उसे स्वयं के लिए इसे करना चाहिए. आप देश के नेता बनते हैं या कोई बहुत बड़े खिलाड़ी, वह मुख्य बात नहीं है. अगर ऐसा होता है तो अच्छी बात है, लेकिन सबसे महत्वपूर्ण चीज यह है कि कम से कम आप अपने जीवन से सुखद तरीके से गुजरें. इसका हर कोई हकदार है. 

भारत के पचास सर्वाधिक प्रभावशाली व्यक्तियों में गिने जाने वाले सद्गुरु एक योगी, रहस्यवादी, दूरदर्शी और 'न्यूयार्क टाइम्स' के बेस्टसेलिंग लेखक हैं. असाधारण और विशिष्ट सेवा के लिए भारत सरकार द्वारा उन्हें वर्ष 2017 में 'पद्म विभूषण' से अलंकृत किया गया था, जो कि सर्वोच्च वार्षिक नागरिक पुरस्कार है. वह विश्व के सबसे बड़े जन-अभियान, 'कॉन्शियस प्लैनेट – मिट्टी बचाओ' (Conscious Planet – Save Soil) के संस्थापक भी हैं, जिसने 4 अरब से अधिक लोगों के जीवन को स्पर्श किया है. 

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