Sadhguru on Success: दुनिया के अनुसार, सफलता का अर्थ है कि आप अपने बगल वाले व्यक्ति से थोड़ा तेज़ दौड़ रहे हैं. थोड़े समय के लिए प्रतिस्पर्धा ठीक है. यदि आप किसी दौड़ में भाग लेना चाहते हैं तो यह ठीक है, लेकिन जीवन कोई दौड़ नहीं है. आपके माता-पिता या आपका कॉर्पोरेट जगत आपको इसलिए उकसा सकता है क्योंकि उनकी रुचि किसी कार्य को कुशलता से करने में नहीं है, बल्कि वे केवल 'नंबर वन' बनने में रुचि रखते हैं. उन्हें इसमें कोई दिलचस्पी नहीं है कि आप सौ मीटर की दौड़ सात सेकंड में पूरी कर पाएं - अभी तक किसी ने भी इसे सात सेकंड में पूरा नहीं किया है. उनकी रुचि केवल इस बात में है कि आप बाकी लोगों की भीड़ से एक इंच आगे रहें.
सफलता के बाद भी खुशी क्यों नहीं मिलती?
जिस क्षण यह तुलना और प्रतिस्पर्धा शुरू होती है, जीवन का सारा बोध समाप्त हो जाएगा, क्योंकि अब आपका पूरा जीवन किसी दूसरे से थोड़ा बेहतर दिखने में लग जाता है. यह मूर्खता आपमें इसलिए आई है क्योंकि आप हमेशा व्यक्ति को आँकने की कोशिश कर रहे हैं, "क्या मैं उससे बड़ा हूँ? क्या मैं उससे छोटा हूँ?" - क्योंकि आपका पूरा प्रयास किसी न किसी तरह उस अम्बार के शीर्ष पर बैठने का होता है.
यह समस्या इसलिए पैदा होती है क्योंकि आपके भीतर स्वयं को लेकर असुरक्षा की एक गहरी भावना है. आप चाहे सफल हों या न हों, आप दुखी ही रहेंगे, क्योंकि निरंतर किसी से आगे रहने की कोशिश करना जीने का एक दुखदायी तरीका है. यह असुरक्षा कि कोई आपको नीचे खींच सकता है और आपसे आगे निकल सकता है, जीवन जीने का भयावह तरीका है. यदि आप दूसरों की तुलना में तेज़ चल रहे हैं और आपका बोध अच्छा नहीं है, तो आप स्वाभाविक रूप से किसी दूसरे व्यक्ति की तुलना में अधिक तनावग्रस्त होंगे क्योंकि आप हर चीज़ से भिड़ते रहेंगे.

सबसे मौलिक चीज जो आपको करने की आवश्यकता है, वह है जीवन को अनुभव करने के अपने तरीके को ठीक करना. यदि आप अपनी प्रकृति से ही आनंदमय हैं, तो आप चाहे जो भी करें, आप अपने भीतर जीवन की इस अस्वस्थ अवस्था में प्रवेश नहीं करेंगे.
कब मिलती है सफलता?
सफलता आपको इसलिए नहीं मिलती क्योंकि आप उसकी इच्छा करते हैं, बल्कि इसलिए मिलती है क्योंकि आप उसे अर्जित करते हैं. वह तभी आती है जब आप उसके योग्य होते हैं. सफलता की तलाश न करें, बस योग्यता को खोजें - कि स्वयं को एक उच्च स्तर तक कैसे उन्नत किया जाए. यदि आप अत्यंत सक्षम बन जाते हैं, तो सफलता आपके जीवन का लक्ष्य भी नहीं रह जाती. यह ऐसी चीज है जो आप जहाँ भी जाते हैं, आपका अनुसरण करती है.
खुद को बेहतर बनाइए, सफलता अपने आप मिल जाएगी
मेरे लिए सफलता का अर्थ है, "क्या मैं स्वयं का पूर्ण रूप से उपयोग कर पा रहा हूँ? क्या मैं अपनी क्षमताओं को उनकी सर्वोच्च संभावना तक टटोलने में सक्षम हूँ?" एक जीवन के रूप में, आप अपने सर्वोच्च पर होना चाहते हैं और आपको ऐसा होने का अधिकार है. यदि आप स्वयं का सर्वोत्तम संभव तरीके से पोषण करते हैं, तो यह बीज स्वाभाविक रूप से अपनी परम संभावना को प्राप्त करेगा.
अंततः, समस्त जीवन का उद्देश्य अपनी पूर्ण क्षमता तक खिलना है. आपको एक मनोवैज्ञानिक समस्या के रूप में - विचारों, भावनाओं, मतों और पूर्वाग्रहों के एक पुलिंदे के रूप में - नहीं मरना चाहिए. मनुष्य होने का अर्थ केवल कार्यकुशलता नहीं है; मनुष्य का अर्थ मौलिकता है, मनुष्य का अर्थ रचनात्मकता है, मनुष्य एक ऐसी संभावना है जो ऐसी चीज कर सकता है जिसे आज तक कभी नहीं किया गया. पूर्ण रूप से विकसित मनुष्य एक अद्भुत घटना है.
सद्गुरु एक योगी, रहस्यवादी, दूरदर्शी, और एक प्रमुख आध्यात्मिक गुरु हैं. एक लेखक, कवि और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ख्याति प्राप्त वक्ता के रूप में, सद्गुरु की हाजिरजवाबी और उनका पैना तर्क, जीवन के हमारे बोध को उकसाता है और व्यापक बनाता है.
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