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Mangalnath Mandir: मंगलनाथ का महाधाम, जहां दर्शन मात्र से दूर होता है मांगलिक दोष

Mangal Devta ka Mandir: ज्योतिष में जिस मंगल ग्रह को ऊर्जा, साहस और भूमि का कारक माना जाता है, उसका इकलौता पावन धाम पृथ्वी पर कहां है? भूमिपुत्र कहलाने वाले मंगलनाथ के के जिस मंदिर में दर्शन मात्र से ही कर्ज से मुक्ति और मांगलिक दोष दूर हो जाता है, उसके बारे में जानने के लिए पढ़ें ये लेख.

Mangalnath Mandir: मंगलनाथ का महाधाम, जहां दर्शन मात्र से दूर होता है मांगलिक दोष
Mangalnath Temple: मंगल देवता का मंदिर कहां है? 
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Mangal Devta Ka Mandir Kaha Hai: सनातन परंपरा में मंगल ग्रह को सभी अमंगल को दूर करके शुभ फल देने वाला देवता माना गया है. मान्यता है कि जिस किसी भी जातक पर मंगलदेव की कृपा बरसती है, उसके भीतर हमेशा सकारात्मक ऊर्जा और साहस बना रहता है. मान्यता है कि जिस व्यक्ति पर मंगल देवता की कृपा बरसती है, वह जीवन के सभी क्षेत्र में सफलता को प्राप्त करता हुआ भूमि, भवन और सुख-संपत्ति प्राप्त करता है. वहीं जिन लोगों की कुंडली में मंगल से जुड़ा दोष होता है, उसे कर्ज, रक्त संबंधी मर्ज, प्रापर्टी से जुड़ी समस्याएं, आत्मविश्वास और साहस में कमी जैसी परेशानियों से जूझना पड़ता है. 

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Photo Credit: Facebook@mangalnathmandirujjain

हिंदू मान्यता के अनुसार मंगल दोष से मुक्ति पाने के लिए पृथ्वी पर सिर्फ एक ही धाम है, जिसे लोग मंगलनाथ मंदिर के नाम से जानते हैं. आइए ज्योतिष में जिस ग्रह को सेनापति का दर्जा दिया गया है और जिसकी पूजा से करने पर जीवन में सब मंगल ही मंगल होता है, उस मंगलनाथ के महाधाम के दर्शन और पूजन का महत्व विस्तार से जानते हैं. 

मंगल देवता का मंदिर कहां पर है?

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सनातन परंपरा में जिस मंगल देवता को भूमिपुत्र कहा जाता है, उनका एक मात्र मंदिर काल के भी काल कहे जाने वाले महाकाल की नगरी यानि उज्जैन में स्थित है. शिप्रा नदी के तट पर स्थित इस मंदिर के बारे में मान्यता है कि यहां पर दर्शन करने मात्र से कुंडली का मंगल दोष दूर हो जाता है. 

शिवलिंग के रूप में पूजे जाते हैं मंगल देव

पौराणिक मान्यता के अनुसार उज्जैन में स्थित मंगलनाथ मंदिर को नवग्रहों के सेनापति कहलाने वाले मंगल का जन्म स्थान माना जाता है. मंगल देवता को यहां पर भगवान शिव का स्वरूप माना जाता है. मंदिर के भीतर भी भगवान मंगलनाथ शिवलिंग के रूप में ही विराजमान हैं. मान्यता है कि एक बार भगवान शिव जब अंधकासुर नाम के दैत्य से युद्ध कर रहे थे तो उनके शरीर से निकली पसीने की बूंद उज्जैन की धरती पर गिरी थी, जिससे मंगल ग्रह का जन्म हुआ था. 

मंगल देवता की भात पूजा 

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मंगल दोष से मुक्ति पाने के लिए भगवान मंगलनाथ के इस महाधाम पर देश-विदेश से लोग हर मंगलवार को यहां पर पहुंचते हैं. मंगलनाथ मंदिर में मंगल देवता की 'भात पूजा' (चावल से श्रृंगार) का बहुत ज्यादा महत्व माना गया है. मान्यता है कि भात पूजा से भगवान मंगलनाथ शीघ्र ही प्रसन्न होकर सभी कष्टों से मुक्ति और कामनाओं को पूरा करते हैं. मंगल ग्रह के दोषों से मुक्ति पाने के लिए इसे महाउपाय माना जाता है.

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यही कारण है कि यहां पर सुखी दांपत्य जीवन की मंगलकामना लिए हुए बड़ी संख्या में नवविवाहित पहुंचते हैं. पौराणिक मान्यता के अनुसार मंगल देवता के इस मंदिर में विधि-विधान से पूजा एवं मंत्र जप करने से व्यक्ति बड़े से बड़े कर्ज से मुक्त हो जाता है. मंगल देवता के दर्शन और पूजन से व्यक्ति के भीतर आत्मविश्वास बढ़ता है. 

(Disclaimer: यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. एनडीटीवी इसकी पुष्टि नहीं करता है.)

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