Kalashtami Vrat Ke Niyam: सनातन परंपरा में भगवान भगवान काल भैरव एक ऐसे देवता हैं, जिनकी साधना से सभी भय शीघ्र ही दूर होते हैं. कलयुग में जिस काल भैरव की पूजा करने से सभी कष्ट दूर और शत्रुओं का नाश होता है, आज 07 जुलाई 2026, मंगलवार के दिन उन्हीं के लिए कालाष्टमी का व्रत रखा जा रहा है. हिंदू मान्यता के अनुसार कालाष्टमी के व्रत को विधि-विधान से करने पर मनुष्य का कल्याण होता है और उसके जीवन से भूत-प्रेत से जुड़ी बाधा और नकारात्मक ऊर्जा दूर होती है.
1. सनातन परंपरा में जिस काल भैरव को कलयुग का जाग्रत देवता माना गया है और जिनका नियंत्रण काल पर भी रहता है, उनकी साधना-आराधना और व्रत आदि के लिए हिंदू धर्म में कुछेक नियम बताए गये हैं. आइए भगवान शिव के रुद्रावतार काल भैरव की पूजा से जुड़े उन नियमों के बारे में विस्तार से जानते हैं, जिसका पालन किए बगैर किसी भी साधक की भैरव साधना का सफल होना नामुमिकन माना जाता है.

2. भगवान भैरव का आशीर्वाद दिलाने वाले कालाष्टमी व्रत को करने के लिए साधक को सुबह जल्दी उठकर स्नान-ध्यान करने के बाद इस व्रत को विधि-विधान से करने का संकल्प लेना चाहिए.
3. कालाष्टमी व्रत की विशेष साधना-आराधना के लिए अर्धरात्रि का समय सबसे उत्तम माना गया है. हालांकि प्रात:काल आप किसी भी भैरव मंदिर में जाकर या फिर अपने घर के पूजा स्थान पर उनकी साधना अपनी सुविधा के अनुसार कर सकते हैं.
4. हिंदू मान्यता के अनुसार यदि किसी देवी या देवता को उनकी प्रिय चीजें अर्पित की जाएं तो वे शीघ्र ही प्रसन्न होकर अपनी कृपा बरसाते हैं. ऐसे में आज कालाष्टमी व्रत वाले दिन भगवान भैरव की पूजा में विशेष रूप से सरसों का तेल, काला तिल, उड़द की दाल और नीले रंग के पुष्प जरूर अर्पित करें.

5. हिंदू मान्यता के अनुसार कालाष्टमी व्रत वाले दिन भगवान भैरव को यदि उनकी प्रिय चीजों का भोग लगाया जाए तो वे शीघ्र ही प्रसन्न होकर अपने साधकों पर कृपा बरसाते हैं. ऐसे में आज काल भैरव की पूजा मे विशेष रूप से जलेबी, इमरती अथवा मीठी रोटियों का भोग लगाएं और उसे प्रसाद के रूप में अधिक से अधिक लोगों को बांटने के साथ स्वयं भी ग्रहण करें.
6. सनातन परंपरा में मंत्र जप का बहुत ज्यादा महत्व माना गया है. ऐसे में आज कालाष्टमी व्रत करने वाले साधक को भगवान भैरव की पूजा में 'ॐ कालभैरवाय नमः' मंत्र का विशेष रूप से जाप करना चाहिए. इसी प्रकार भगवान भैरव के गुणों का गुणगान करने वाले कालभैरवाष्टकं का पाठ भी श्रद्धा और विश्वास के साथ करना चाहिए.
7. काल भैरव की साधना करने वाले साधक को न सिर्फ तन बल्कि मन से भी पवित्र रहना चाहिए और अपने मन में भूलकर भी गलत विचार नहीं लाना चाहिए. काल भैरव का व्रत करने वाले साधक को स्त्री प्रसंग से दूर रहना चाहिए.

8. काल भैरव का व्रत और पूजा करने वाले साधक को भूलकर भी क्रोध नहीं करना चाहिए और वाणी की पवित्रता बनाए रखना चाहिए.
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9. भगवान काल भैरव की पूजा में सिर्फ तेल के दीपक जलाएं और दक्षिण मुंह करके साधना करें. कालाष्टमी व्रत करने वाले साधक को भूलकर भी तामसिक चीजों का सेवन नहीं करना चाहिए.
10. भगवान काल भैरव की पूजा करने वाले साधक को भूलकर भी कुत्तों को नहीं सताना चाहिए बल्कि उन्हें कालाष्टमी वाले दिन विशेष रूप से मीठी रोटी खिलाना चाहिए.
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