सावन की शुरुआत के साथ आज से कांवड़ यात्रा भी शुरू हो गई है. देशभर से लाखों शिवभक्त हरिद्वार समेत विभिन्न तीर्थों से गंगाजल लेकर अपने क्षेत्र के शिव मंदिरों में जलाभिषेक करने निकलते हैं. धार्मिक मान्यता है कि नियमों का पालन करते हुए की गई कांवड़ यात्रा से भगवान शिव प्रसन्न होते हैं और भक्तों को विशेष कृपा प्राप्त होती है. अगर आप इस बार पहली बार कांवड़ यात्रा पर जा रहे हैं, तो आइए कुछ जरूरी नियम पहले पंडित आचार्य मदन मोहन से जान लेना बेहद जरूरी है.
कांवड़ यात्रा के होते हैं चार प्रकार
पंडित आचार्य मदन मोहन के अनुसार सावन में सामान्य कांवड़, डाक कांवड़, खड़ी कांवड़ और दांडी कांवड़ निकाली जाती है. सामान्य कांवड़ में श्रद्धालु बीच-बीच में विश्राम कर सकते हैं. डाक कांवड़ में बिना रुके लगातार यात्रा पूरी करनी होती है. खड़ी कांवड़ में साथी कांवड़ को संभालता रहता है, जबकि दांडी कांवड़ सबसे कठिन मानी जाती है. जिसमें श्रद्धालु दंडवत करते हुए शिवालय तक पहुंचते हैं.
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पहली बार जा रहे हैं तो इन नियमों का रखें ध्यान
कांवड़ यात्रा शुरू करने से पहले और पूरे सावन में मांस, मदिरा और तामसिक भोजन से दूरी रखें. यात्रा के दौरान साफ-सफाई का विशेष ध्यान दें और बिना स्नान किए कांवड़ को स्पर्श न करें. गंगाजल से भरी कांवड़ को जमीन पर न रखें, जरूरत पड़ने पर उसे किसी ऊंचे स्थान पर रखें.
भूलकर भी न करें ये गलतियां
कांवड़ को पेड़ के नीचे रखना या सिर के ऊपर से ले जाना शुभ नहीं माना जाता है. यात्रा के दौरान किसी के प्रति अपशब्द न बोलें, क्रोध से बचें और पूरे रास्ते श्रद्धा व भक्ति के साथ 'बोल बम' का जयघोष करते रहें. पंडित आचार्य मदन मोहन का कहना है कि कांवड़ यात्रा केवल पैदल चलने का नाम नहीं, बल्कि संयम, अनुशासन और श्रद्धा की परीक्षा भी है. जो श्रद्धालु पूरे नियमों के साथ यात्रा पूरी करता है, उसे भगवान शिव का विशेष आशीर्वाद मिलने की मान्यता है.
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