उत्तराखंड की पहाड़ियों के बीच बसे कैंची धाम में एक बार फिर लाखों श्रद्धालु बाबा नीम करौली महाराज के दर्शनों के लिए पहुंचने वाले हैं. 15 जून को धाम का स्थापना दिवस मनाया जाएगा. जाहिर है कि इस अवसर पर दुनिया भर से लोग श्रद्धा और आस्था लेकर कैंची धाम पहुंचेंगे. इस कार्यक्रम के लिए बड़े पैमाने पर तैयारियां आखिरी दौर में पहुंच चुकी हैं. हर साल यहां बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं, लेकिन इस बार भीड़ और ज्यादा रहने की उम्मीद जताई जा रही है. देश ही नहीं, विदेशों से भी बड़ी संख्या में लोग बाबा के दर्शन के लिए पहुंचने वाले हैं. यही वजह है कि मंदिर समिति से लेकर जिला प्रशासन तक हर व्यवस्था को दुरुस्त करने में जुटा हुआ है. श्रद्धालुओं के बीच भी स्थापना दिवस को लेकर खास उत्साह देखने को मिल रहा है.
इस बार टूट सकते हैं पुराने रिकॉर्ड
कैंची धाम पिछले कई सालों से दुनिया भर में लाखों लोगों के लिए आस्था और आध्यात्मिकता का केंद्र बना है. बाबा नीम करौली महाराज के प्रति लोगों की बढ़ती आस्था का असर यहां पहुंचने वाली भीड़ पर भी दिखाई देता है. मंदिर समिति का अनुमान है कि स्थापना दिवस के मौके पर एक लाख से ज्यादा श्रद्धालु धाम पहुंच सकते हैं. ऐसे में इस बार भीड़ के कई पुराने रिकॉर्ड टूटने की संभावना जताई जा रही है.
जंगल के रास्ते बाबा के दरबार तक
इस बार यहां पहुंचने वाले श्रद्धालुओं को कुछ अलग अनुभव से गुजरना होगा. प्रशासन और वन विभाग की मदद से जंगलों के बीच से गुजरने वाला एक विशेष पैदल रास्ता तैयार किया जा रहा है. इस रास्ते से होकर जाने वाले श्रद्धालुओं को पहाड़, हरियाली और शांत माहौल के बीच यात्रा करने का मौका मिलेगा. इसके लिए सफाई और जरूरी मरम्मत का काम भी कराया जा रहा है ताकि लोगों को किसी तरह की परेशानी का सामना न करना पड़े.
भारी भीड़ को देखते हुए प्रशासन ने विशेष ट्रैफिक प्लान बनाया है. 14 और 15 जून को कैंची धाम के आसपास वाहनों के प्रवेश पर रोक रहेगी. श्रद्धालुओं के लिए अलग पार्किंग, शटल सेवा और पैदल पहुंचने की व्यवस्था की जा रही है. प्रशासन का कहना है कि इसका मकसद भीड़ को संभालना और लोगों की यात्रा को आसान बनाना है.

क्यों खास है कैंची धाम?
बाबा नीम करौली महाराज के भक्त दुनिया के कई देशों में मौजूद हैं. एप्पल के संस्थापक स्टीव जॉब्स और मेटा के संस्थापक मार्क जुकरबर्ग का नाम भी अक्सर कैंची धाम से जुड़ी चर्चाओं में लिया जाता है. यही वजह है कि यह धाम अब सिर्फ उत्तराखंड का धार्मिक स्थल नहीं, बल्कि दुनिया भर के श्रद्धालुओं के लिए आस्था का बड़ा केंद्र बन चुका है. यही वजह है कि हर साल स्थापना दिवस पर यहां पहुंचने वाले श्रद्धालुओं की संख्या बढ़ती जा रही है और इस बार भी रिकॉर्ड भीड़ की उम्मीद जताई जा रही है.
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