Parliament Monsoon Session 2026: संसद के मानसून सत्र के लिए सरकार और विपक्ष ने अपनी अपनी रणनीति पर काम करना शुरू कर दिया है. मानसून सत्र के लिए सरकार दोनों एक ही रणनीति पर काम कर रही है दोनों का मकसद है कि अपनी संख्या को कैसे बढ़ाया जाए. सरकार इस प्रयास में लगी है कि उसके पास लोकसभा और राज्यसभा में दो तिहाई का आंकड़ा आ जाए जिससे कि वो उन बिलों को पारित करा सकें जो पिछली बार नहीं करवा पाए थे. फिलहाल सरकार के तरफ से मानसून सत्र का जो ऐजेंडा आया है उसमें बहुचर्चित परिसीमन बिल और 30 दिनों तक जेल जाने पर मुख्यमंत्री और मंत्री की कुर्सी जाने का बिल है.
एनडीए मैजिक नंबर से दूर
इसका मतलब ये है कि सरकार अभी तक दो तिहाई बहुमत को लेकर आश्वस्त नहीं है. हालांकि तृणमूल कांग्रेस और उद्धव ठाकरे में टूट के बाद एनडीए की संख्या में इजाफा हुआ है मगर अभी भी वो दो तिहाई के मैजिक नंबर से दूर है. वहीं शरद पवार वाली एनसीपी ने भी अपनी भूमिका स्पष्ट नहीं की है. हालांकि सुप्रिया सुले ने कहा है कि वो परिसीमन बिल देखने के बाद ही फैसला करेंगी मगर यह बिल सरकार के ऐजेंडा में नहीं है.

इन बिल में सरकार बैकफुट पर
दूसरा बिल जिस पर सरकार ने अपने कदम वापस खींचे हैं वो है 30 दिनों तक यदि कोई मुख्यमंत्री या मंत्री जेल जाते हैं तो उनको अपना पद छोड़ना पड़ेगा. हुआ ये कि इस पर बनाई गई जेपीसी या संयुक्त संसदीय समिति में जब अंतिम रिपोर्ट तैयार करने की बात हुई तो सुप्रिया सुले और ओवैसी ने इस पर असहमति जताई और उसे रिकार्ड पर लाने की बात कही, उनके इस निर्णय के बाद सरकार ने जेपीसी में इस मामले को आगे के लिए टाल दिया. इसका मतलब ये है कि अब ये बिल संसद के मानसून सत्र में शायद ही आए.
यानि जितने भी विवादित या कहें वैसे बिल जिसको पारित कराने के लिए सरकार को दो तिहाई बहुमत चाहिए उसे सरकार ने टाल दिया है.
दो-तिहाई बहुमत के गणित में फंसी राजनीति; DMK पर टिकी निगाहें
सरकार को खासकर लोकसभा में इन बिलों को पारित कराने के लिए जो दो तिहाई बहुमत चाहिए वह बिना डीएमके के पूरे नहीं हो सकते. दूसरी ओर डीएमके की दिक्कत ये है कि परिसीमन बिल का वो पहले विरोध कर चुके हैं और डीएमके नेता एम के स्टालिन इस बिल की कॉपी को मीडिया के सामने आग लगा चुके हैं.
दूसरी तरफ डीएमके को अपने पाले में रखने के कांग्रेस की तरफ से भी कोशिशें तेज हैं और इसका जिम्मा खुद राहुल गांधी ने लिया है.

राहुल गांधी की नई रणनीति, DMK को INDIA खेमे के करीब रखने की कोशिश
तमिलनाडु चुनाव के बाद जिस तरह कांग्रेस ने डीएमके से नाता तोड़ा है उससे उनके संबंधों में काफी खटास आ गई है मगर राहुल गांधी के जन्मदिन पर स्टालिन की बधाई संदेश के बाद दोनों के रिश्ते के बीच की बर्फ थोड़ी पिघली है.
कहने का मतलब है कि कांग्रेस केरल में वामदलों और पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस के खिलाफ चुनाव लड़ती है मगर दिल्ली में बीजेपी के खिलाफ साथ रहती है. डीएमके का यह कहना कि परिसीमन बिल का वो विरोध करते हैं से कांग्रेस ने राहत की सांस ली है मगर अब देखना होगा कि राहुल गांधी स्टालिन से कब बात करते हैं और क्या वो उन्हें मनाने में कामयाब हो पाते हैं. वैसे अब ज्यादा वक्त नहीं बचा है संसद के सत्र के दौरान राज्यसभा के नेता प्रतिपक्ष मल्लिकार्जुन खरगे के दफ्तर में रोजाना की बैठक में यदि सोमवार को डीएमके शामिल होती है या नहीं इसी से पता चल जाएगा कि आने वाले दिनों में उसका रुख क्या होगा?
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