विज्ञापन

Ravi Pradosh Vrat 2026: जुलाई में कब है दूसरा रवि प्रदोष व्रत? जानें सही तारीख और पूजा का मुहूर्त

प्रदोष व्रत पर भगवान शिव की पूजा करने का विधान है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार प्रदोष व्रत पर भोलेनाथ की पूजा करने से घर में सुख-शांति बनी रहती है और मनोकामनाओं की पूर्ति होती है.

Ravi Pradosh Vrat 2026: जुलाई में कब है दूसरा रवि प्रदोष व्रत? जानें सही तारीख और पूजा का मुहूर्त
रवि प्रदोष व्रत 2026
Photo Credit: NDTV

हिन्दू धर्म में हर महीने के कृष्ण और शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि को प्रदोष व्रत रखा जाता है. इस दिन भगवान शिव की पूजा करने का विधान है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस दिन भगवान शिव की पूजा करने से घर में सुख-शांति बनी रहती है और मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं. जुलाई और आषाढ़ माह का पहला प्रदोष बीत चुका है और सभी शिव भक्त अब दूसरे प्रदोष व्रत का इंतजार कर रहे हैं. इसी कड़ी में आज हम आपको बताने जा रहे हैं कि जुलाई का दूसरा प्रदोष व्रत कब रखा जाएगा और पूजा का शुभ मुहू्र्त क्या होगा. आइए जानते हैं...

कब है जुलाई का दूसरा प्रदोष व्रत?

वैदिक पंचांग के अनुसार, आषाढ़ महीने के शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि की शुरुआत दोपहर को 01 बजकर 57 मिनट पर होगी. वहीं, इस तिथि का समापन 27 जुलाई को शाम 04 बजकर 14 मिनट पर होगा. ऐसे में प्रदोष काल को देखते हुए आषाढ़ और जुलाई का दूसरा प्रदोष व्रत 26 जुलाई को रखा जाएगा. रविवार के दिन पड़ने के कारण यह प्रदोष व्रत भी रवि प्रदोष व्रत कहलाएगा.

क्या है पूजा का शुभ मुहूर्त?

प्रदोष व्रत पर प्रदोष काल में पूजा करना शुभ माना जाता है. पंचांग के अनुसार 26 जुलाई को प्रदोष काल शाम 07 बजकर 16 मिनट से रात 09 बजकर 21 मिनट तक रहेगा. ऐसे में सभी भक्त इस 02 घंटे 05 मिनट की अवधि में पूजा कर सकते हैं.

रवि प्रदोष व्रत पूजा विधि

  • सबसे पहले सुबह जल्दी उठकर स्नान करें. 
  • इसके बाद भगवान शिव का ध्यान करते हुए व्रत का संकल्प लें. 
  • भगवान शिव का दूध, दही, घी, शहद और गंगाजल से अभिषेक करें. 
  • इसके बाद 11 या 21 बेलपत्र, धतूरा, आक के फूल, फल, सुपारी, लौंग, इलायची, फूल, धूप, दीप, गंध, चावल आदि नौवेघ अर्पित करें. 
  • पूजा के समय शक्कर और घी से बने मिष्ठान का भोग लगाया जाता है.
  • इसके बाद शिव के मंत्र और शिव चालीसा का पाठ करें. 
  • प्रदोष व्रत की कथा पढ़ें और अंत में घी के दीपक से भगवान शिव की आरती करें.
  • दिनभर उपवास रखते हुए मन में शिव का स्मरण करें. 
  • शाम के समय फिर स्नान करें और प्रदोष काल में भगवान शिव की विधि-विधान से पूजा करें. 

Disclaimer: यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. एनडीटीवी इसकी पुष्टि नहीं करता है.

यह भी पढ़ें: श्री गुंडिचा मंदिर पहुंचे महाप्रभु जगन्नाथ और उनके भाई-बहनों के रथ, जानिए कब शुरू होगी बहुदा यात्रा

यह भी पढ़ें: 30 जुलाई से देवघर में शुरू होने जा रहा विश्वप्रसिद्ध श्रावणी मेला, श्रद्धालुओं के लिए किए जा रहे ये खास इंतजाम

पूरी स्टोरी पढ़ें

NDTV.in पर ताज़ातरीन ख़बरों को ट्रैक करें, व देश के कोने-कोने से और दुनियाभर से न्यूज़ अपडेट पाएं

फॉलो करे:
Ravi Pradosh Vrat 2026, Faith News
Listen to the latest songs, only on JioSaavn.com