भगवान श्रीकृष्ण को बचपन से ही माखन बेहद प्रिय बताया गया है. यही वजह है कि गोकुल में उनकी माखन चोरी की लीलाएं आज भी बड़े चाव से सुनाई जाती हैं. लेकिन क्या कृष्ण का माखन चुराना सिर्फ बाल शरारत थी. वीडियो में बताया गया है कि कृष्ण की माखन लीला के पीछे भक्ति और निर्मल मन से जुड़ा गहरा प्रतीकात्मक संदेश भी माना जाता है.
माखन को माना गया है निर्मल हृदय का प्रतीक
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, जिस तरह दूध को जमाकर दही बनाया जाता है और फिर उसे मथने पर माखन निकलता है. उसी तरह जीवन के अनुभव मनुष्य के मन को मथते हैं. वीडियो में बताया गया है कि प्रेम, भक्ति और अच्छे संस्कारों से मन को मथने पर उसमें से निर्मल भाव सामने आते हैं. इसी निर्मलता को माखन से जोड़ा जाता है.
गोपियों के प्रेम से जुड़ा था माखन
कृष्ण के लिए गोकुल की गोपियों का बनाया माखन सिर्फ भोजन नहीं माना जाता था. भक्ति परंपरा में इसे उनके प्रेम और स्नेह से जोड़कर देखा जाताा है. यही कारण है कि कान्हा माखन चुराकर खुद भी खााते और अपने सखाओं तथा बंदरों को भी खिलाते थे.
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कृष्ण इसलिए कहलाए 'माखन चोर' और 'चितचोर'
कृष्ण की माखन चोरी को भक्ति में प्रतीकात्मक अर्थ भी दिया गया है. ऐसी मान्यता है कि कान्हा केवल मटकी का मााखन नहीं चुराते, बल्कि अपने भक्तों का मन भी जीत लेते हैं. इसी वजह से उन्हें 'चितचोर' भी कहा जाता है.
मटकी में छिपा है खास संदेश
वीडियो में बताया गया है कि मटकी के अंदर छिपा माखन इस बात का प्रतीक माना जाता है कि इंसान के बाहरी रूप के पीछे उसके वास्तविक भाव छिपे होते हैं. भगवान बाहरी दिखावे से ज्यादा मन की सच्चाई और प्रेम को महत्व देते हैं. यही वजह है कि जन्माष्टमी पर कृष्ण की माखन लीला को केवल बााल शरारत के तौर पर नहीं, बल्कि प्रेम, भक्ति और निर्मल हृदय का संदेश देने वाली लीला के रूप में भी देखा जाताा है.
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