ओडिशा के पुरी में विश्व प्रसिद्ध जगन्नाथ रथ यात्रा से पहले आज यानी बुधवार को गुंडिचा मंदिर में 'गुंडिचा मार्जन' रस्म निभाई गई. इस दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालु यहां आए और उन्होंने पूरे मंदिर परिसर की साफ-सफाई की.
क्या होती है गुंडिचा मार्जन की रस्म?
गुंडिचा मार्जन रस्म में भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और देवी सुभद्रा के आगमन से पहले उनके अस्थायी निवास 'गुंडिचा मंदिर' की साफ-सफाई की जाती है. भगवान की 'मौसी का घर' कहे जाने वाले इस गुंडिचा मंदिर का स्वरूप प्रसिद्ध रथ यात्रा उत्सव के दौरान दिव्य ऊर्जा के केंद्र में बदल जाता है, जब स्वयं भगवान जगन्नाथ 7 दिनों के लिए यहां विराजमान होते हैं.
इस दौरान हरियाणा के रोहतक से पुरी पहुंची एक महिला श्रद्धालु ने न्यूज एजेंसी IANS से कहा, 'भगवान जगन्नाथ ने मुझे गुंडिचा मार्जन रस्म में शामिल होने का अवसर दिया है. मैं अपने आप को बहुत सौभाग्यशाली मानती हूं.'
पहली बार पुरी की रथ यात्रा का हिस्सा बनने पहुंची एक महिला श्रद्धालु ने कहा, 'बहुत अच्छा लग रहा है. ऐसा लग रहा है जैसे भगवान के साक्षात दर्शन हो रहे हैं. यहां का नजारा बेहद अद्भुत है. यहां की व्यवस्था भी अच्छी है.'
कोलकाता से आए एक श्रद्धालु ने कहा, 'मैं हर साल जगन्नाथ रथ यात्रा के समय पुरी आता हूं. गुरुवार को रथ यात्रा निकलनी है. यहां प्रभु के दर्शन के लिए लाखों लोग आए हुए हैं.'
कब से शुरू होगी जगन्नाथ रथ यात्रा?ओडिशा के पुरी में विश्व प्रसिद्ध जगन्नाथ रथ यात्रा गुरुवार को शुरू होगी. रथ यात्रा हर साल आषाढ़ महीने के शुक्ल पक्ष की द्वितीया तिथि को निकाली जाती है. इस बार द्वितीया तिथि गुरुवार, 16 जुलाई पर पड़ रही है. इसके बाद 20 जुलाई को हेरा पंचमी, 23 जुलाई को संध्या दर्शन, 24 जुलाई को बहुदा यात्रा, 25 जुलाई को सुना बेष, 26 जुलाई को अधर पना और 27 जुलाई को नीलाद्री बीजे के साथ रथ यात्रा का समापन होगा.
(Disclaimer: यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. एनडीटीवी इसकी पुष्टि नहीं करता है.)
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