विज्ञापन
This Article is From Jan 26, 2022

जानिए मांगलिक कार्य समेत पूजा पाठ में क्यों चढ़ाई जाती है सुपारी

शास्त्रों में सुपारी को देवताओं का प्रतीक माना जाता है, इसी वजह से पूजा के दौरान देवताओं की प्रतिमा मौजूद ना होने पर सुपारी का इस्तेमाल किया जाता है. मान्यता है कि पूजा में सुपारी का इस्तेमाल करने से जीवन की सारी कठिनाइयां समाप्त होने लगती है. आइए जानते हैं कि पूजा में सुपारी का क्या महत्व है और पूजा के बाद इस सुपारी का क्या करना चाहिए.

जानिए मांगलिक कार्य समेत पूजा पाठ में क्यों चढ़ाई जाती है सुपारी
आखिर क्यों पूजा के लिए महत्वपूर्ण मानी जाती है सुपारी
प्रतीकात्मक चित्र
नई दिल्ली:

सनातन धर्म में पूजा-पाठ का विशेष महत्व है. हिंदू धर्म (Hinduism) में देवी-देवताओं की पूजा के लिए अलग-अलग पूजन सामग्री निर्धारित की गई है, जिनका अपना-अपना महत्व है. धार्मिक कार्यों के दौरान सुपारी का इस्तेमाल विशेष तौर पर किया जाता है. पूजा-पाठ हो, अनुष्ठान हो या फिर कोई भी मांगलिक कार्य सभी में सुपारी का प्रयोग महत्वपूर्ण माना जाता है. मान्यताओं के अनुसार, पूजा में इस्तेमाल कि जाने वाली छोटी सी सुपारी को पूजा विधान में देवी-देवताओं के आहवान और यज्ञ में स्थापना पूजन के लिए प्रयोग किया जाता है, जिसे बेहद शुभ माना जाता है. शास्त्रों में सुपारी को देवताओं का प्रतीक माना जाता है. मान्यता है कि पूजा में सुपारी का इस्तेमाल करने से जीवन की सारी कठिनाइयां समाप्त होने लगती है. आइए जानते हैं कि पूजा में सुपारी का क्या महत्व है और पूजा के बाद इस सुपारी का क्या करना चाहिए.

nhj046t

पूजा में सुपारी का महत्व

हिंदू धर्म में पूजा की सुपारी (Betel Nut) का इतना महत्व है कि इसके बिना पूजा आरंभ नहीं होती. सुपारी के संदर्भ में कहा जाता है कि इसे जीवंत देवता का स्थान प्राप्त है. कहा जाता है कि सुपारी में देवताओं का वास होता है, इसीलिए जब पूजा के समय देवताओं का आह्वान किया जाता है, तो सुपारी को देवताओं का प्रतीक मानकर पूजा में रखा जाता है. कहते हैं कि पूजा में रखी गई सुपारी को पूजा के बाद इधर-उधर न रखकर, पूजा स्थान या फिर लाल कपड़े में अक्षत के साथ बांधकर तिजोरी में रखें. इसके अलावा पूजा में उपयोग की गई सुपारी को जल में प्रवाहित किया जाता है. सुपारी को कई ग्रहों का प्रतिनिधि भी माना जाता है, कहते हैं इसे पूजने से केतु, सूर्य, मंगल ग्रहों की शांति होती है.

ofsd3n1g

पूजा की सुपारी क्या करें

गौर करने वाली बात है कि पूजा की सुपारी (Puja Ki Supari) खाने की सुपारी से पूर्णता अलग होती है. खाने की सुपारी बड़ी और गोल होती है, लेकिन पूजा में इस्तेमाल की जाने वाली सुपारी छोटी और थोड़ी लंबी होती है. इसके साथ ही पूजा की सुपारी का तल एकदम सपाट होता है, जिससे यह स्थापना कार्य को सरल बनाती है. शास्त्रों में निहित है कि पूजा की सुपारी का सेवन नहीं करना चाहिए. पूजा संपन्न होने के बाद सुपारी को ब्राह्मण को दान कर देना चाहिए या जलधारा में प्रवाहित कर देना चाहिए.

5p1uukvo

क्यों चढ़ाई जाती है सुपारी

शास्त्रों में सुपारी को देवताओं का प्रतीक माना जाता है. सरल शब्दों में कहें तो सुपारी में देवताओं का वास होता है. कोई भी पूजा पाठ या अनुष्ठान शुरू करने के पहले पूजा की सुपारी को पान के ऊपर विराजमान किया जाता है. जब पूजा के समय देवताओं का आह्वान किया जाता है, तो सुपारी को देवताओं का प्रतीक मानकर पूजा संपन्न कि जाती है. इस दौरान सुपारी में मंत्रों उच्चारण कर देवताओं को स्थापित किया जाता है. ऐसी मान्यता है कि पूजा में सुपारी के उपयोग से ब्रह्मा, यमदेव, वरूण देव और इंद्रदेव की उपस्थिति होती है.

(Disclaimer: यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. एनडीटीवी इसकी पुष्टि नहीं करता है.)

पूरी स्टोरी पढ़ें

NDTV.in पर ताज़ातरीन ख़बरों को ट्रैक करें, व देश के कोने-कोने से और दुनियाभर से न्यूज़ अपडेट पाएं

फॉलो करे:
Why Use Betel Nut In Puja, Supari In Puja, Betel Leaf, Betel Nut Benefits
Listen to the latest songs, only on JioSaavn.com