- महाभारत में है रक्षा बंधन की कथा का जिक्र.
- रक्षा बंधन का इतिहास है बेहद पौराणिक.
- ऐसे शुरू हुआ रक्षा बंधन का त्योहार.
Raksha Bandhan History: भाई-बहन के प्रेम का प्रतीक रक्षा बंधन सावन मास की पूर्णिमा को मनाया जाता है. इस बार रक्षा बंधन की तिथि को लेकर दुविधा की स्थिति बनी हुई है. रक्षा बंधन की सही तिथि (Raksha Bandhan Exact Date 2022) कुछ पंडितों और विद्वानों का कहना है कि 11 अगस्त को है. वहीं इस संबंध में कुछ ज्योतिर्विदों का मानना है कि रक्षा बंधन 12 अगस्त को मनाया जाएगा, क्योंकि उदय व्यापिनी तिथि के अनुसार, पूर्णिमा 12 तारीख को पड़ रही है. हालांकि इस दिन सुबह 7 बजकर 05 मिनट तक ही पूर्णिमा तिथि है. रक्षा बंधन का त्योहार पौराणिक है. इस पर्व की चर्चा कई पौरिणिक ग्रंथों में की गई है. आइए जानते हैं कि रक्षा बंधन का त्योहार कैसे शुरू हुआ और इससे जुड़ी रोचक कथा क्या है.
राजा बली की कथा
राजा बली बहुत दानी और भगवान विष्णु के परम भक्त थे. एक बार उन्होंने यज्ञ का आयोजन किया. उस यज्ञ में भगवान विष्णु, राजा बली की परीक्षा लेने के लिए वामन अवतार में पहुंचे. जिसके बाद उन्होंने राजा बलि के तीन पग भूमि दान स्वरूप देने के लिए कहा. राजा बलि तो दानवीर थे ही, उन्होंने भगवान विष्णु को तीन पग भूमि दान में दे दिया. उसके बाद भगवान विष्णु ने दो पग में ही पूरी पृथ्वी और आकाश नाप लिया. भगवान विष्णु की इस चाल को राजा बलि समझ गए और उनके तीसरे पग को अपने सिर पर रखवा लिया. राजा बलि ने भगवान से प्रार्थना की कि हे प्रभु! अब तो मेरा सबकुछ चला ही गया है, मेरी विनती स्वीकार करें और मेरे साथ पाताल लोक चलें. भगवान विष्णु ने भक्त की विनती स्वीकार कहते हुए पाताल लोग चले गए. दूसरी ओर मां लक्ष्मी परेशान होने लगीं. जिसके बाद उन्होंने एक गरीब महिला का रूप बनाकर राजा बलि के पास पहुंची और राजा बलि को राखी बांधीं. जिसके बाद राजा बलि ने मां लक्ष्मी के कहा कि मेरे पास तो आपको देने के लिए कुछ भी नहीं है. जिस पर मां लक्ष्मी ने कहा कि आपके पास को साक्षात् भगवान विष्णु हैं, मुझे वही चाहिए. इस पर राजा बलि ने भगवान विष्ण को मां लक्ष्मी के साथ जाने दिया. साथ ही जाते वक्त भगवान विष्णु ने बलि को वचन दिया कि वह हर साल 4 महीने पाताल लोक में निवास करेंगे.
-
AI से बुलेट ट्रेन तक... अश्विनी वैष्णव ने बताया भारत का फ्यूचर प्लान -
बिकिनी सीन करने में कृति सेनन को क्यों लगे 12 साल? बोलीं- 6-7 साल पहले ऐसा नहीं कर पातीं -
AI एक्ट्रेस टिली नॉरवुड को पसंद है ये बॉलीवुड फिल्म, कृति सेनन के सामने सुनाया फेमस डायलॉग -
‘AI एक्टर्स इंसानी एक्टर्स की जगह नहीं ले सकते’, बोलीं एलाइन वैन डेर वेल्डन -
NDTV World Summit 2026: वेजिटेरियन खिलाड़ियों को कौन सी दिक्कतें होती हैं? Savita, Neeru ने बताया -
नो इंडियंस अलाउड से मेयर तक का सफर, NDTV समिट में रोहतक से लंदन गई मां-बेटे की जोड़ी ने बताई अपनी जर्नी -
NDTV World Summit 2026 के मंच पर भारत की 'गोल्डन गर्ल्स' ने बताया जीत का मंत्रा! | Asian Games 2026 -
NDTV World Summit 2026: Lovlina Borgohain ने बताया जीवन का सबसे बड़ा चैलेंज! क्यों लगने लगे ठहाके? -
NDTV World Summit 2026: हॉकी चैंपियन नेहा गोयल का बड़ा खुलासा! दर्द में भी जीत का जश्न -
Ashwini Vaishnaw के ऑफिस में कुर्सी के पीछे क्यों लगी है कील? NDTV World Summit में खोला राज
महाभारत में राखी से जुड़ी कथा
कथा है कि जब युधिष्ठिर इंद्रप्रस्थ में राजसूय यज्ञ कर रहे थे उस समय सभा में शिशुपाल भी मौजूद था। शिशुपाल ने भगवान श्रीकृष्ण का अपमान किया तो श्रीकृष्ण ने अपने सुदर्शन चक्र से उसका वध कर दिया। लौटते हुए सुदर्शन चक्र से भगवान की छोटी उंगली थोड़ी कट गई और रक्त बहने लगा। यह देख द्रौपदी आगे आईं और उन्होंने अपनी साड़ी का पल्लू फाड़कर श्रीकृष्ण की उंगली पर लपेट दिया। इसी समय श्रीकृष्ण ने द्रौपदी को वचन दिया कि वह एक-एक धागे का ऋण चुकाएंगे। इसके बाद जब कौरवों ने द्रौपदी का चीरहरण करने का प्रयास किया तो श्रीकृष्ण ने चीर बढ़ाकर द्रौपदी के चीर की लाज रखी। कहते हैं जिस दिन द्रौपदी ने श्रीकृष्ण की कलाई में साड़ी का पल्लू बांधा था वह श्रावण पूर्णिमा की दिन था।
युधिष्ठिर से जुड़ी कथा
रक्षा बंधन की एक अन्य कथा युधिष्ठिर से जुड़ी हुई है. कहते हैं कि पांडवों को महाभारत का युद्ध जिताने में रक्षासूत्र का बड़ा योगदान था. महाभारत युद्ध के दौरान युधिष्ठिर ने भगवान कृष्ण से पूछा कि हे भगवन! मैं कैसे सभी संकटों से पार पा सकता हूं, मुझे कोई उपाय बताएं. तब श्रीकृष्ण ने युधिष्ठिर से कहा कि वह अपने सभी सैनिकों को रक्षासूत्र बांधें. इससे उनकी विजय सुनिश्चित होगी. तब युधिष्ठिर ने ऐसा ही किया और विजयी हुए. यह घटना भी सावन महीने की पूर्णिमा तिथि पर ही घटित हुई मानी जाती है.
राखी 11 या 12 अगस्त को चाहते हैं बांधना तो जानें दोनों दिन के शुभ मुहूर्त
भविष्य पुराण की कथा
भविष्य पुराण में एक कथा है कि वृत्रासुर से युद्ध में देवराज इंद्र की रक्षा के लिए इंद्राणी शची ने अपने तपोबल से एक रक्षासूत्र तैयार किया. जिसे श्रावण पूर्णिमा के दिन इंद्र की कलाई में बांध दी। इस रक्षासूत्र ने देवराज की रक्षा की और वह युद्ध में विजयी हुए. यह घटना भी सतयुग में हुई थी.
राजा पुरु से जुड़ी कथा
राजा पुरु बहुत वीर और बलशाली राजा थे, उन्होंने युद्ध में सिकंदर को धूल चटा दी थी. इसी दौरान सिकंदर की पत्नी को भारतीय त्योहार रक्षाबंधन के बारे में पता चला. उन्होंने अपने पति सिकंदर की जान बख्शने के लिए राजा पुरु को राखी भेजी. पुरु आश्चर्य में पड़ गए, लेकिन राखी के धागों का सम्मान करते हुए उन्होंने युद्ध के दौरान जब सिकंदर पर वार करने के लिए अपना हाथ उठाया तो राखी देखकर ठिठक गए और बाद में बंदी बना लिए गए.
(Disclaimer: यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. एनडीटीवी इसकी पुष्टि नहीं करता है.)
मॉनसून स्किन केयर टिप्स बता रही हैं ब्यूटी एक्सपर्ट भारती तनेजा
NDTV.in पर ताज़ातरीन ख़बरों को ट्रैक करें, व देश के कोने-कोने से और दुनियाभर से न्यूज़ अपडेट पाएं