उत्तराखंड घूमने का प्लान बना रहे हैं और चकराता के अलावा किसी शांत और बर्फीली जगह की तलाश है तो लोखंडी आपके लिए अच्छा विकल्प अच्छा रहेगा. चकराता से करीब 20 किलोमीटर दूर स्थित लोखंडी सर्दियों में पर्यटकों के बीच अपनी अलग पहचान बना रहा है. ऊंचाई ज्यादा होने के कारण यहां आसपास के इलाकों की तुलना में बर्फबारी के मौके अधिक रहते हैं. यही वजह है कि बर्फ देखने की चाह रखने वाले पर्यटक अब चकराता के साथ लोखंडी का रुख कर रहे हैं. जानकारी के अनुसार, लोखंडी में मुख्य रूप से दिसंबर के आखिरी हफ्ते से लेकर फरवरी के दौरान सर्दियों के महीनों में बर्फबारी होती है. आपको बर्फबारी का नजारा देखना है तो दिसंबर और फरवरी के बीच का प्लान बना सकते हैं.
बर्फबारी के लिए बढ़ रही लोखंडी की लोकप्रियता
चकराता में करीब 8,500 फीट की ऊंचाई पर स्थित लोखंडी और लोहारी गांव बांज, बुरांश और देवदार के घने जंगलों से घिरा है. इसी साल जनवरी में जब चकराता में बर्फबारी कम हुई, तब लोखंडी क्षेत्र में अच्छी बर्फ देखने को मिली. इसके बाद सर्दियों में यहां पर्यटकों की आवाजाही बढ़ने लगी है.
दिल्ली से करीब 330-350 किलोमीटर दूर
दिल्ली से लोखंडी की सड़क दूरी करीब 330 से 350 किलोमीटर है. सड़क मार्ग से यहां पहुंचने में लगभग 6 से 7 घंटे लग सकते हैं. दिल्ली से देहरादून एक्सप्रेसवे होते हुए विकासनगर, कालसी और चकराता के रास्ते लोखंडी पहुंचा जा सकताा है. पहाड़ी रास्तों पर मौसम और सड़क की स्थिति के हिसााब से समय बढ़ भी सकता है.

ये भी पढ़ें- दिल्ली से लैंडोर कैसे जाएं? 5 घंटे की दूरी पर ये सुंदर हिल स्टेशन, जानें लैंडोर में कहां-कहां जाएं
बस और ट्रेन से कैसे पहुंचें?
दिल्ली के ISBT कश्मीरी गेट से देहरादून या विकासनगर के लिए बस ली जा सकती है. वहां से चकराता तक बस या शेयरिंग टैक्सी मिलती है और आगे लोखंडी पहुंचाा जा सकता है. ट्रेन से जाने वालों के लिए देहरादून रेलवे स्टेशन नजदीकी प्रमुख स्टेशन है. दिल्ली से देहरादून के लिए कई ट्रेनें चलती हैं. स्टेशन से टैक्सी लेकर लोखंडी पहुंचा जा सकता है.
सर्दियों में घूमने वालों की पहली पसंद बन रहा
गर्मियों में चकराता का टाइगर फॉल पर्यटकों को आकर्षित करता है, जबकि सर्दियों में लोखंडी की बर्फ और शांत पहाड़ी माहौल लोगों को अपनी ओर खींचता है. यहां होटल, रिसॉर्ट और होमस्टे बढ़ने से स्थानीय लोगों के लिए रोजगाार के अवसर भी बने हैं.
लोखंडी नाम पड़ने की कहानी भी दिलचस्प
लोखंडी सिर्फ प्राकृतिक खूबसूरती के लिए ही खास नहीं है. स्थानीय मान्यताओं के अनुसार, आसपास लोहे की खदानें थीं और लोग लोहे से घरेलू सामान व कृषि उपकरण तैयार करते थे. इसी वजह से लोहारी-लोखंडी नाम प्रचलित हुआ. आज भी आसपास पुराने खनन के अवशेष बतााए जाते हैं.
ये भी पढ़ें- जयपुर घूमने का है प्लान? जानिए अक्टूबर का महीना क्यों रहेगा बेस्ट, ये रही खास वजहें
NDTV.in पर ताज़ातरीन ख़बरों को ट्रैक करें, व देश के कोने-कोने से और दुनियाभर से न्यूज़ अपडेट पाएं