Harsiddhi Temple Ujjain: जैसे ही शाम ढलती है...उज्जैन के हरसिद्धि मंदिर में कुछ ऐसा होता है, जिसे देखने के बाद लोग कुछ पल के लिए ठहर जाते हैं. सैकड़ों नहीं, हजारों दीप जब एक साथ जलते हैं, तो लगता है जैसे रोशनी खुद कोई राज बयां कर रही हो. नवरात्रि की शुरुआत के साथ यहां उमड़ी भीड़ सिर्फ दर्शन के लिए नहीं, बल्कि उस अनदेखी ताकत को महसूस करने के लिए है, जिसके बारे में लोग आज भी फुसफुसाकर बात करते हैं.
ये भी पढ़ें:-सदियों बाद फिर जगा ये रहस्यमयी शक्तिपीठ! पढ़ें जोगुलाम्बा मंदिर की अनोखी कहानी
महाकाल के साए में बसा शक्तिपीठ (Shaktipeeth Near Mahakal Temple)
महाकालेश्वर मंदिर से करीब 200 मीटर दूर स्थित हरसिद्धि मंदिर को 51 शक्तिपीठों में गिना जाता है. मान्यता है कि यहां माता सती की दाहिनी कोहनी गिरी थी. यही वजह है कि यह स्थान रहस्यमयी शक्ति का केंद्र माना जाता है. कहा जाता है कि सम्राट विक्रमादित्य की यह आराध्य देवी थीं.
51 फीट दीपमाला का अनोखा करिश्मा (51 Feet Deepmala Magic)
मंदिर की सबसे बड़ी पहचान इसकी 51 फीट ऊंची दीपमाला है. इसमें 1000 से ज्यादा दीपक लगे हैं. जैसे ही शाम होती है और ये दीप एक साथ जलते हैं, तो पूरा मंदिर सुनहरी रोशनी में डूब जाता है. यह नजारा किसी ख्वाब जैसा लगता है. श्रद्धालुओं का कहना है कि यहां दीप जलाकर मां से मांगी गई मुराद जरूर पूरी होती है.
ये भी पढ़ें:-महाभारत के युद्ध से क्या है ग्रहण का कनेक्शन, अर्जुन की प्रतिज्ञा के लिए भगवान श्रीकृष्ण ने रची थी माया
9 दिनों तक खास पूजा और सुरक्षा इंतजाम (Special Rituals and Arrangements for 9 Days)
19 मार्च से 27 मार्च तक चलने वाले इस पर्व में हर दिन अलग देवी की पूजा होगी. मंदिर में विशेष सजावट और सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए हैं. हरसिद्धि मंदिर में नवरात्रि सिर्फ एक त्योहार नहीं, बल्कि एक एहसास है. यहां आने वाला हर व्यक्ति एक अजीब सी शांति और ऊर्जा महसूस करता है.
(डिस्क्लेमर: यहां दी गई सभी जानकारियां सामाजिक और धार्मिक आस्थाओं पर आधारित हैं. NDTV इसकी पुष्टि नहीं करता.)
NDTV.in पर ताज़ातरीन ख़बरों को ट्रैक करें, व देश के कोने-कोने से और दुनियाभर से न्यूज़ अपडेट पाएं