Chandra Grahan aur Mahabharat ka connection: आसमान में जब ग्रहण लगता है तो फिजा में एक अजीब सा सन्नाटा उतर आता है. कुछ ऐसा ही मंजर महाभारत के युद्ध में भी बना था, जब अचानक अंधेरा छा गया और सबको लगा सूरज डूब चुका है, लेकिन वो सिर्फ अंधेरा नहीं था, वह एक ऐसी माया थी जिसने इतिहास की दिशा बदल दी. आखिर उस शाम क्या हुआ था, जिसने अर्जुन की प्रतिज्ञा पूरी कर दी? जानें ज्योतिषाचार्य डॉ. गौरव कुमार दीक्षित से...
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फाल्गुन पूर्णिमा और Chandra Grahan 2026 की खोज के बीच महाभारत की एक दिलचस्प दास्तान फिर सुर्खियों में है. यह वही किस्सा है जब भगवान श्रीकृष्ण ने युद्ध के मैदान में ऐसा माहौल बना दिया कि, कौरवों को लगा सूर्यास्त हो गया है.
अभिमन्यु का वध और अर्जुन की प्रतिज्ञा (Kya Mahabharat me Surya Grahan hua tha)
महाभारत युद्ध के दौरान द्रोणाचार्य ने चक्रव्यूह रचा. अर्जुन के अलावा केवल अभिमन्यु ही उसमें प्रवेश करना जानते थे, लेकिन निकलने का तरीका नहीं जानते थे. जयद्रथ ने बाकी पांडवों को रोक दिया और सात महारथियों ने मिलकर अभिमन्यु का वध कर दिया. पुत्र की मौत से आहत अर्जुन ने प्रतिज्ञा ली कि अगले दिन सूर्यास्त से पहले जयद्रथ का वध करेंगे, वरना अग्नि समाधि ले लेंगे.
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श्रीकृष्ण की माया और ग्रहण जैसा अंधेरा (Krishna Created Eclipse Like Illusion)
अगले दिन जयद्रथ की सुरक्षा में पूरी कौरव सेना खड़ी थी, तब भगवान श्रीकृष्ण ने अपनी माया से सूर्य को ढक दिया. युद्धभूमि में अंधेरा छा गया और सबको लगा सूर्यास्त हो गया. जयद्रथ बाहर आया, तभी माया हट गई और सूर्य फिर दिखने लगा. उसी पल अर्जुन ने गांडीव से उसका वध कर दिया.
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क्यों ट्रेंड कर रही है ये कथा? (Why This Story Trends During Eclipse)
जब भी चंद्र ग्रहण (Chandra Grahan) या सूर्य ग्रहण (Surya Grahan) की चर्चा होती है, लोग महाभारत की ये कहानी (Mahabharat story) और श्रीकृष्ण माया (Krishna Maya) को खोजते हैं. यह घटना बताती है कि धर्म और रणनीति का संगम कैसे इतिहास बदल देता है. ग्रहण चाहे खगोलीय घटना हो या युद्ध की रणनीति, इसकी गूंज सदियों तक सुनाई देती है.
(Disclaimer: यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. एनडीटीवी इसकी पुष्टि नहीं करता है.)
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