भारत की अध्यक्षता में नई दिल्ली के 'भारत मंडपम' में 18वां ब्रिक्स शिखर सम्मेलन (BRICS Summit 2026) आयोजित किया जा रहा है. दो दिन के इस सम्मेलन में कुल 21 देश हिस्सा ले रहे हैं. पीएम मोदी भारत मंडपम में सभी देशों के राष्ट्राध्यक्षों का स्वागत कर रहे हैं. पीएम मोदी जहां BRICS राष्ट्राध्यक्षों के साथ हाथ मिला रहे हैं, उसके पीछे लगी तस्वीर का ऐतिहासिक, धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व है. पीएम मोदी के पीछे रामेश्वरम मंदिर की तस्वीर है. चलिए आपको बताते हैं इस मंदिर की कहानी और धार्मिक महत्व क्या है.
रामेश्वरम मंदिर आध्यात्मिक और पौराणिक महत्व
रामेश्वरम मंदिर तमिलनाडु के रामेश्वरम द्वीप पर स्थित हिंदुओं के पवित्र चार धामों और 12 ज्योतिर्लिंगों में से एक प्रमुख तीर्थ स्थल है. पौराणिक कथा के अनुसार, लंका पर विजय प्राप्त करने से पहले भगवान राम ने यहां भगवान शिव के आशीर्वाद के लिए शिवलिंग की स्थापना की थी. इसकी सबसे बड़ी विशेषता यह है कि यह उत्तर के 'काशी' की तरह ही दक्षिण का सबसे बड़ा पवित्र धाम माना जाता है. सनातन धर्म में हिंदू श्रद्धालुओं के लिए जीवन में एक बार चार धाम की यात्रा का विशेष महत्व है. रामेश्वरम मंदिर चार पवित्र धामों में से एक है. इस मंदिर का गलियारा दुनिया का तीसरा सबसे लंबा मंदिर गलियारा है, जो लगभग 1200 मीटर लंबा और 1212 नक्काशीदार भव्य स्तंभों पर टिका है. इस मंदिर के अंदर 22 पवित्र कुंड हैं, जिनमें स्नान करना अत्यंत पवित्र माना जाता है.
रामायण काल से संबंध
मान्यताओं के अनुसार, लंका पर चढ़ाई करने से पहले भगवान श्री राम ने माता सीता और लक्ष्मण के साथ इसी स्थान पर विश्राम किया था. रावण वध के बाद ब्रह्महत्या के दोष से मुक्ति पाने के लिए भगवान राम ने यहां शिवलिंग की स्थापना कर पूजा-अर्चना की थी. इसी कारण इसे 'रामेश्वर' (राम के ईश्वर) कहा जाता है.
दर्शन का समय
सुबह- सुबह 5:00 बजे से दोपहर 1:00 बजे तक (दोपहर 1:00 से 3:00/3:30 बजे तक मंदिर दर्शन के लिए बंद रहता है).
शाम- दोपहर 3:00 बजे से रात्रि 9:00 बजे तक
वास्तुकला और ऐतिहासिक विशेषताएं
भव्य संरचना- इसमें 38 मीटर ऊंचा गोपुरम यानी प्रवेश द्वार, सुंदर नक्काशीदार खंभे और विशाल गलियारे हैं.
निर्माण- 12वीं शताब्दी से विभिन्न शासकों का योगदान, जिसमें सेतुपति मारवर राजवंश का प्रमुख योगदान रहा है.
विश्व प्रसिद्ध तीसरा गलियारा- यहां एशिया का सबसे लंबा और दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा मंदिर गलियारा है, जो पूर्व से पश्चिम तक 197 मीटर और दक्षिण से उत्तर तक 133 मीटर फैला है.
ब्रिक्स में भारतीय संस्कृति की प्रस्तुति
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में जब भी भारत किसी बड़े अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन की मेजबानी करता है, तो वैश्विक नेताओं के सामने भारत के गौरवशाली इतिहास को प्रमुखता से रखा जाता है. आयोजन स्थल पर भव्य कलाकृतियों, प्रतीकों और भारत की आध्यात्मिक धरोहरों की प्रस्तुति से वैश्विक मंच पर देश की सांस्कृतिक कूटनीति को एक नई मजबूती मिलती है.
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